उनके कलाकार आतंकवादी नहीं, हमारे कलाकार भी नहीं हैं

उनके कलाकार आतंकवादी नहीं, हमारे कलाकार भी नहीं हैंसलमान खान- फवाद खान

सलमान खान ने कहा है कि पाकिस्तानी कलाकार आतंकवादी नहीं हैं और उन्हें सोच समझकर वीसा दिया गया था। यह बिल्कुल सच है कि सामान्य परिस्थितियों में पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध नहीं होना चाहिए था। आज परिस्थितियां अलग हैं और यह कलाकारों का अपमान हो जाएगा यदि उनकी कला से श्रोता मनोरंजन का अनुभव महसूस न करें।

शिवसेना की विचारधारा से वे लोग सहमत नहीं होंगे या सहमत नहीं होना चाहिए जो कभी अखंड भारत की बात करते थे। अखंड भारत की कल्पना में तो पाकिस्तानी कलाकार भी शामिल होंगे और दूसरे भी लेकिन कलाकारों या सामान्य नागरिकों के सम्मान या अपमान को समझना उतना सरल नहीं है, यह रेसीप्रोकल होता है।

बहुतों को याद होगा 2005 में पाक अधिकृत कश्मीर में भूकम्प आया था और पीड़ितों की मदद के लिए धन इकट्ठा करने के लिए कलाकारों को पाकिस्तान में कार्यक्रम आयोजित करना था। जाने-माने कलाकार जावेद अख्तर और उनकी पत्नी शबाना आज़मी को भी निमंत्रण था। पाकिस्तान सरकार ने उन्हें वीसा दिया था लेकिन बाद में निरस्त कर दिया। भारतीय पंजाब के मुख्यमंत्री को पाकिस्तानी पंजाब के मुख्यमंत्री का निमंत्रण था और उनके साथ एक पत्रकार गए थे जो होटल में पहुंचे तो पता चला उनका वीसा निरस्त कर दिया गया। भारतीय कलाकार फ़ीरोज़ खान को वीसा दिया गया था लेकिन उन्हें वापस आना पड़ा था।

अनुपम खेर को वीज़ा दिया ही नहीं और लता मंगेशकर को भी कभी वीज़ा नहीं दिया गया। इनमें से एक भी आतंकवादी नहीं है। लिस्ट बहुत लम्बी हो जाएगी और आप कह सकते हैं कि ईसा मसीह की तरह कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल भी सामने कर दो लेकिन सब लोग ईसा मसीह नहीं हो सकते।

जब कलाकारों को अपमान का घूंट पीना पड़ता है तो आम आदमी की क्या बिसात। मुझे याद है 10 अगस्त 1970 का वह दिन जब मैं कनाडा से सीरियन एअरलाइन से भारत लौट रहा था। हवाई जहाज कराची हवाई अड्डे पर रुका और सभी यात्रियों को एयरपोर्ट पर बाहर जाने दिया गया सिवाय भारतीय यात्रियों के जिन्हें हवाई जहाज के अन्दर ही बैठे रहने के लिए कहा गया। आप कल्पना कर सकते हैं कितना अपमानित महसूस किया था हम लोगों ने। एक ही वजह थी कि हम लोग भारत के नागरिक थे जो पाकिस्तान के लिए शत्रु देश था।

हमें सलमान खान की नाराज़गी को समझना चाहिए क्योंकि जिन कलाकारों को वापस भेजा गया वे सलमान के मेहमान रहे होंगे या उनकी फिल्मों में काम करने आए होंगे या सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए भारत के आम आदमी का मनोरंजन करने आए होंगे लेकिन इस समय हमारा देश मनोरंजन के मूड में नहीं है और सलमान खान को भारत की जनता की नाराज़गी को भी समझना चाहिए।

उन्हें सोचना चाहिए जब हमारे कलाकार वहां से अपमानित होकर लौटते हैं और सलमान जैसे लोग चुप रहते हैं, तो कलाकारों की बिरादरी के साथ देश की जनता को नाराजगी होती है। जब भारतीय कलाकारों का अपमान हुआ तो आपने क्या किया, यह पूछने का भारतवासियों का हक है।

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