सीमा पर तनाव है, रणनीति की आलोचना ठीक नहीं

सीमा पर तनाव है, रणनीति की आलोचना ठीक नहींराहुल गांधी और केजरीवाल

सबसे पुरानी और सर्वाधिक अनुभव वाली कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी खून की राजनीति करते हैं, शिवसेना से कांग्रेस में आए संजय निरुपम बोले सर्जिकल स्ट्राइक ड्रामा है और अरविन्द केजरीवाल ने कहा सबूत देकर पाकिस्तान का मुंह बन्द कर देना चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया ने उन्हें अपना हीरो बना दिया। देश की सुरक्षा जैसे मुद्दे पर ऐसे बयान ठीक नहीं। यदि उन्हें लगता है नरेन्द्र मोदी यश लूटे ले रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है। क्या 1965 में शास्त्री जी को और 1971 में इन्दिरा गांधी को यश नहीं मिला था और तब किसी विपक्ष ने आपत्ति नहीं की थी। यदि कोई बड़ा काम करेगा उसे यश तो मिलेगा ही।

नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर का मसला गृह मंत्रालय के हवाले कर रखा है जबकि पहले यह प्रधानमंत्री के पास रहता था। उन्होंने अपने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सुरक्षा के मसलों पर सेना अथवा सरकार द्वारा अधिकृत मंत्री ही बात करें। इसमें यश लूटने का कोई प्रयास नज़र नहीं आता। पाकिस्तान या चीन के खिलाफ जब कभी लड़ना पड़ा तो उस समय की विरोधी पार्टियों ने कांग्रेस सरकारों का भरपूर साथ दिया था और अपने लिए कोई यश नहीं चाहा था।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपनी संसद में सर्जिकल स्ट्राइक पर बोला कि वे शान्ति चाहते हैं और भारत सरहद पर उन्हें उकसा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं किया है, झूठा प्रपोगंडा कर रहा है, वह सबूत पेश करे कि उसने आतंकवादियों को घुसकर मारा है। उधर कश्मीर और जेएनयू में लोग पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाते हैं, उसका झंडा फहराते हैं, सैनिकों और नागरिकों पर पत्थर मारते हैं और इसी के साथ कुछ भारतीय भी ऐसे हैं जो पाकिस्तान की हां में हां मिलाते हुए कहते हैं सबूत पेश करो कि सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था।

अमेरिका और रूस सहित तमाम देशों के सेटेलाइट आसमान में मौजूद हैं और पल-पल की खबर अपने देशों को भेज रहे हैं। रूस, फ्रांस, जर्मनी और यूरोप के अन्य देशों ने सन्देह नहीं व्यक्त किया क्योंकि वे पाकिस्तान के समर्थक और शुभचिन्तक नहीं हैं। यदि हमारे लोगों को मोदी से खुन्दक है तो सेना और देश की जनता को क्यों पीड़ा पहुंचा रहे हैं। तनाव समाप्त होने के बाद शान्त वातावरण में हिसाब बराबर कर लेना।

मोदी की समस्या यह नहीं है कि पाकिस्तानी सेना से कैसे निपटा जाए, समस्या यह है कि घर में घुसे हुए देश का मनोबल गिराने वाले अविश्वासी लोगों को कैसे विश्वास दिलाया जाए। ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है शायद हजारों में लेकिन ये लोग पाकिस्तानियों को सुख और भारतीयों को पीड़ा पहुंचा रहे हैं। ये लोग थोड़ा इंतजार कर सकते थे और माहौल शान्त होने पर जांच की मांग कर सकते थे जैसे तत्कालीन विपक्ष ने चीनी आक्रमण और उसके परिणामों पर जांच की मांग की थी। यह बात अलग है कि वह रिपोर्ट कभी जनता के सामने नहीं आई।

संघ की शाखाओं पर दक्ष आरम करने वाले मोदी ने किसी विदेशी विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र की पढ़ाई नहीं की है लेकिन आज दुनिया उनकी कूटनीति और विदेशी सम्बन्धों की सराहना करती है। उनके द्वारा किए गए देशहित के कामों में खोट नहीं ढूंढनी चाहिए।

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