मुद्दा: कैशलेस का विचार अच्छा पर वक़्त लगेगा

मुद्दा: कैशलेस का विचार अच्छा पर वक़्त लगेगाफोटो साभार: इंटरनेट

शैलेश मिश्र

एक दशक पहले जब मैं अमेरिका की यात्राओं पर जाता था तो जेब में हमेशा कुछ सौ डॉलर की नोटें लेकर जाता था। जो कि बेवकूफी थी क्योंकि अमेरिका पूरी तरह से नोटरहित अर्थव्यवस्था है और अगर आप 100 डॉलर का भुगतान करने के लिए नोट बढ़ाते तो किसी भी दुकानदार का आपको तीन बार पलटकर देखना तय था।

कुछ समय में मुझे ये एहसास हो गया था कि अमेरिका में आप को जेब में पैसे लेकर घूमने की ज़रूरत नहीं लेकिन जब मैंने ये करने की कोशिश की तो मैं थोड़ा डरा हुआ महसूस करने लगा ये सोचकर कि जेब में एक भी पैसा नहीं है? ये वो और तमाम बातें। लेकिन अमेरिका में जेब में बिना नकदी लिए घूमा जा सकता है, आसानी से। तब से लेकर आज तक मैं जितनी बार भी अमेरिका गया, मैंने एक आना भी नकदी नहीं खर्च की, मेरा सारा काम प्लास्टिक मनी (यानि डेबिट/क्रेडिट कार्ड) से ही हो गया।

अब जब मैं दस साल पहले के अपने उस डर को याद करता हूं तो लगता है कि वो बस नकदी की चाहत रखने वाले एक भारतीय की झिझक थी। हमें बड़े ही ये समझते-जानते हुए हैं कि घर से बाहर जाते समय जेब में पैसे होना एक बहुत ज़रूरी आवश्यकता है। इसका कारण तो ये है कि हमारी बाज़ार नकदीरहित नहीं हैं लेकिन मेरा ये मानना है कि इसका एक सांस्कृतिक पहलू भी है जो कि है सुरक्षित महसूस करने के लिए नकदी जेब में रखना।

भारत का नकदरहित देश बनने की ओर बढ़ना एक बहुत बढ़िया विचार है। इससे अनेकों फायदे होंगे। लेकिन ये बस कहना ही आसान है। भारत की स्थिति नकदीरहित बन चुके कई देशों से बिलकुल अलग है। भारत के लगभग 40 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। नकदीरहित अर्थव्यवस्था बनाने के पश्चिमी देशों के उपाय भारत में काम करें ये ज़रूरी नहीं। हो सकता है भारत को नकदीरहित होने की अपनी परिभाषा दोबारा परिभाषित करनी पड़ी। पे-टीएम जैसी कंपनियों को एक ऐसे आसान तरीके सोचने होंगे जिससे वो कप पढ़े-लिखे या अनपढ़ लोगों को नकदी इस्तेमाल करने के विकल्प से जोड़ सकें।

उदाहरण के तौर पर क्या ऐसी बायोमीट्रिक मशीनें (शरीर के अंगों की पहचान से चलने वाली मशीनें) हो सकती हैं जो भुगतान की रकम पता करके अंगूठे के निशान के ज़रिए भुगतान प्राप्त कर ले। भारत के नकदीरहित अर्थव्यवस्था बनने के सफर को हमें थोड़ा अलग तरीके से तय करना पड़ेगा। नकदीरहित बनने के सफर के साथ ही भारत को साइबर क्राइम से निपटने की अपनी आधारभूत संरचना को भी मज़बूत करना पड़ेगा।

लेखक- इंटरनेशनल कंपनी में साफ्टवेयर एक्सपर्ट हैं।

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