इस प्राथमिक विद्यालय के बच्चे बिना झिझके अंग्रेजी में सुनाते हैं कविता

इस स्कूल के बच्चे बिना झिझके और बिना अटके अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं, अंग्रेजी में कविताएं सुनाते हैं।

Neetu SinghNeetu Singh   9 Jun 2018 9:28 AM GMT

इस प्राथमिक विद्यालय के बच्चे बिना झिझके अंग्रेजी में सुनाते हैं कविता

बलरामपुर। सरकारी स्कूल में पढ़े बच्चों को क्या अच्छी नौकरी मिल पाएगी? आज के समय इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है लेकिन यह सच है। इस प्राथमिक स्कूल से पढ़ चुके विद्यार्थियों में कोई लेखपाल बना है तो कोई बी. फार्मा की पढ़ाई कर रहा है। यहां आस-पास के बच्चे पब्लिक स्कूल में पढ़ने की बजाए इस सरकारी स्कूल में दाखिला लेते हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक बच्चों की कॉपियां खुद चेक करते हैं।

बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 22 किमी. दूर प्राथमिक विद्यालय तुलसीपुर में इस समय 200 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में दो वर्षों से नियमित विद्यालय प्रबन्धन समिति की बैठक हर महीने की 7 तारीख़ को होती है। विद्यालय की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसे इंग्लिश मॉडल स्कूल के लिए चयनित किया और अब ये मॉडल स्कूल बन गया है। इस स्कूल के बच्चे बिना झिझके और बिना अटके अंग्रेजी में अपना परिचय देते हैं, अंग्रेजी में कविताएं सुनाते हैं, हर दिन ब्लैकबोर्ड पर अंग्रेजी में सद्वाक्य लिखते हैं। विद्यालय के बच्चे हर सुबह हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत में प्रार्थना करते हैं, ड्रम की धुन पर ये बच्चे व्यायाम करते हैं।

विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य रामसागर चौहान (57 वर्ष) की एक बेटी दूसरी कक्षा में और एक चौथी कक्षा में पढ़ती है। उन्होंने बताया, "हम अपनी दोनों बेटियों की कॉपियां रोज चेक करते हैं, अगर कोई गलती नजर आती है तो उसी पेज पर नोट लिख देते हैं। स्कूल में वो कॉपी मेरी बेटी टीचर को दिखाती है, जिससे फिर उसमें टीचर सुधार कर देते हैं। समिति की बैठक के अलावा जब भी समय मिलता है बीच-बीच में स्कूल आते रहते हैं।"

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रामसागर ने पांच साल पहले इस स्कूल की स्थिति बताते हुए कहा, "पहले जो मास्टर यहां पर थे वो कुर्सी पर बैठकर तम्बाकू खाते रहते थे और बच्चे बस्ता रखकर सड़क पर घूमते रहते थे। जबसे ये नया स्टाफ आया है तबसे पढ़ाई अच्छी हो रही है। हम पहले स्कूल नहीं आते थे दो साल पहले विद्यालय प्रबंधन समिति की जब ट्रेनिंग ली तब हमें पता चला कि हमारी क्या जिम्मेवारियां हैं।"


रामसागर की तरह इस विद्यालय प्रबन्धन समिति के जितने भी सदस्य हैं सभी हर महीने की बैठक में जरुर शामिल होते हैं। ये सदस्य या तो किसान हैं या फिर कोई छोटी-मोटी दुकान चलाते हैं। इन सब कामों के बावजूद ये अभिभावक महीने की सात तारीख़ को स्कूल में होने वाली विद्यालय प्रबन्धन समिति की बैठक में अपने काम को छोड़कर जरुर आते हैं। बैठक में आकर ही ये केवल अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालय के रखरखाव पर भी खुलकर बात करते हैं।

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प्राथमिक विद्यालय तुलसीपुर में पढ़ा रहे शिक्षा मित्र अनवारुल हक़ ने बताया, "शिक्षा मित्र के पद पर 18 साल से इसी स्कूल में पढ़ा रहा हूँ, हमेशा से कुछ अलग करना चाहता था, पहले शिक्षक कम थे इसलिए ज्यादा अच्छा काम नहीं कर पाते थे। दो तीन साल से यहां पर्याप्त स्टॉफ हो गया है, इस समय छह स्टाफ है। बच्चे जो भी लिखें उसे मुंहजुबानी पढ़कर सुना सके ये मेरी कोशिश रहती है।"

विद्यालय प्रबंधन समिति की देखरेख में होता है विद्यालय का हर काम

स्कूल में छोटे से लेकर बड़े कामों तक की निगरानी विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य ही करते हैं। इस प्राथमिक स्कूल में चाहें हैण्डवाश पॉइंट्स लगे हों या फिर लाइब्रेरी बनी हो इन सभी चीजों के निर्माण कार्य में समिति के सदस्यों की राय जरुर ली जाती है।

मई माह में ग्राम प्रधान और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों के सहयोग और देखरेख में एक अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया जा रहा है जिससे सारे बच्चे किसी कार्यक्रम में एक साथ बैठ सकें। एक गैर सरकारी संस्था एक्शन ऐड के मुस्कान परियोजना के तहत इस स्कूल की विद्यालय प्रबंधन समिति को इतना मजबूत किया गया है। अब अभिभावक सरकारी स्कूल को गम्भीरता से ले रहे हैं जिसकी वजह से शिक्षक भी लापरवाही नहीं बरत पा रहे हैं।

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प्राइवेट स्कूल से नाम कटवाकर इस प्राथमिक स्कूल में पढ़ने आते हैं बच्चे

जो बच्चे पहले पब्लिक स्कूल में पढ़ने जाते थे आज वही बच्चे इस सरकारी स्कूल में पढ़ने आ रहे हैं। विद्यालय प्रबन्धन समिति के सदस्य मेवालाल गुप्ता ने बताया, "मेरे तीन बच्चे फ़ौजी पब्लिक स्कूल में पढ़ने जाते थे, महीने 150 रुपए फीस देते थे लेकिन बच्चों को ज्यादा कुछ आता जाता नहीं था। उस स्कूल से नाम कटवाकर अब बच्चे यहां पढ़ रहे हैं, कमसेकम अंगेजी में अपना नाम तो बताते हैं।" उन्होंने आए बताया, "सब्जी की दुकान चलाते हैं लेकिन हर महीने की सात तारीख़ को दो-तीन घंटे दुकान बंद करके बैठक में जरुर आते हैं। बैठक के अलावा जब भी स्कूल आना होता है तो मैं ये नहीं देखता की दुकान बंद है और मेरा नुकसान हो जाएगा।"


इस स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चे अब कर रहे सरकारी नौकरी

ये स्कूल बहुत पुराना है इसमें पढ़े बच्चे सरकारी और प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मोहम्मद अनवर ने बताया, "मेरे छोटे भाई ने इसी प्राथमिक स्कूल से पढ़ाई की है आज वो बीफार्मा कर रहा है। हमारे गांव का एक लड़का लेखपा बन गया है, एक बीएमएस की पढ़ाई कर रहा है, ये सभी इसी स्कूल में पढ़ें हैं। हमारे बच्चे पहले प्राइवेट मदरसे में पढ़ते थे हमने इनका नाम कटवाकर यहां दाखिला करवाया है।"

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पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी विद्यालय प्रबन्धन समिति की बैठक में करती हैं खुलकर बात

विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में सिर्फ पुरुष ही हिस्सा नहीं लेते बल्कि महिलाएं भी बैठक में आती हैं और अपनी राय देती हैं। समिति की सदस्य रामवती (50 वर्ष) ने कहा, "हमारी नातिन यहां पढ़ती है, सुबह ड्रेस पहनकर टाई लगाकर जब वो स्कूल आती है तो हमें लगता है जैसे वो किसी महंगे स्कूल में पढ़ने जा रही हो। बैठक में आते हैं ये लोग जो बात करते हैं उसमें हमें जो समझ आता है बोल देते हैं। मिडडे मील का खाना चेक करने हफ़्ते में एक दो दिन आते हैं।" ये महिलाएं अब पुरुषों के सामने बेंच पर बैठने में झिझक नहीं करती हैं। बच्चों की पढ़ाई और कैसे बेहतर हो इनको जो समझ आता है सुझाव देती हैं।


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