छोटी उम्र में बड़ी कोशिश : बच्चियों ने ख़ुद रोका बाल विवाह, पकड़ी पढ़ाई की राह

लड़कियों की हिम्मत, आगे पढ़ने की इच्छा और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें आज एक मुकाम दिलाया है।

Divendra SinghDivendra Singh   23 Aug 2018 6:42 AM GMT

छोटी उम्र में बड़ी कोशिश : बच्चियों ने ख़ुद रोका बाल विवाह, पकड़ी पढ़ाई की राह

ललितपुर। छठी कक्षा में पढ़ने वाली कल्पना और उसकी सहेलियों ने आवाज न उठायी होती तो दूसरी लड़कियों की तरह उनकी शादी भी महज 12-13 साल में ही हो गई होती।

कल्पना ललितपुर जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर सहरिया आदिवासी बाहुल्य कल्याणपुरा गाँव की है। यहां बेटियों की शादी 12-13 साल में कर दी जाती है। हमेशा अव्वल आने वाली 12 साल की कल्पना ने पांचवीं पास ही की थी कि उसके घरवाले शादी की तैयारी करने लगे। कल्पना जैसी ही कहानी संध्या, रामदेवी, आरती और पूजा की है, जिन्होंने कल्याणपुरा प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं पास की।

वो आगे की पढ़ाई के लिए पूर्व माध्यमिक विद्यालय जाना चाहती थीं। विद्यालय गाँव से चार किलोमीटर दूर है, लिहाजा घरवाले पढ़ाई के पक्ष में नहीं थे। वे चाहते थे कि बेटियों की शादी हो जाए। कल्पना बताती हैं, "जब हमने घर में पढ़ाई जारी रखने की बात की तो कोई तैयार नहीं था। सबका कहना था, घर में बैठकर छोटे भाई-बहनों की देखभाल करो, स्कूल जाने की जरूरत नहीं।"

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उस वक्त कल्पना और उनके साथियों ने हिम्मत नहीं हारी। एक्शन एड के किशोर समूह की बैठक में परेशानी बतायी। समूह के स्वयं सेवकों ने उन बच्चों के अभिभावकों से बात की। विद्यालय प्रबंधन समिति और एक्शन एड की बैठकों में इन लड़कियों के माता-पिता को बुलाया गया और शिक्षा की अहमियत बताई गई। शुरुआत में तो वो नहीं माने, लेकिन समूह ने गांव के कुछ और लोगों को जोड़ा और उन्हें मनाने की कोशिश की।

कोशिशों का असर हुआ और उनके परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए मान गए। कल्पना और उनके साथियों की कोशिश ने गांव में बरसों से चली आ रही बाल विवाह की कुप्रथा पर काफी हद तक रोक लगाई। अब सारी सहेलियां एक साथ पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाती हैं। लड़कियों की हिम्मत, आगे पढ़ने की इच्छा और कुछ कर दिखाने के जज्बे ने उन्हें आज एक मुकाम दिलाया है। कल्पना आज खुद एक्शन एड के किशोर समूह की प्रमुख हैं। कल्पना बताती हैं, "एक्शन एड की सहायता से हम ऐसा कर पाए। अब हम अपनी तरह दूसरी लड़कियों को भी समझाते हैं कि पढ़ाई कितनी जरूरी है।"


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बाल विवाह: कमी आई लेकिन कोशिश जारी रखनी होगी

देश के कई इलाकों में बाल विवाह की कुरीति अब भी चल रही है। हाल के सर्वे में भले ही बाल विवाह के आंकड़ों में गिरावट आई हो लेकिन अब भी हालात चिंताजनक हैं।

27 फीसदी लड़कियों की शादी देश में 18 साल की उम्र से पहले होती है। 2016 के नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के मुताबिक।

47 फीसदी था 2005 के नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यह आंकड़ा

20 फीसदी की गिरावट आई है 10 वर्षों में

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15.6 करोड़ पुरुषों की तुलना में करीब 72 करोड़ महिलाओं की शादी 18 साल से कम उम्र में हुई दुनिया में
24 करोड़ लगभग इनमें भारतीय थीं।
(2014 में आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार)

लखनऊ जिले के माल में भी बदले हालात

कुछ ऐसा ही हाल लखनऊ के माल ब्लॉक के सिसवारा गाँव का था। यहां पंद्रह साल की सोनी (बदला हुआ नाम) की शादी तय कर दी गई। पंचायत बाल सुरक्षा समिति की सदस्य कंचन को जब इसकी जानकारी मिली तो वो उन्हें समझाने पहुंचीं। कंचन बताती हैं, "सोनी से बात की तो पता चला कि वह पढ़ना चाहती है, शादी नहीं करना चाहती। तब मैंने उससे घरवालों से बात करके शादी के लिए मना करने की सलाह दी। उसे बताया कि वह 1090, 181 या 100 पर कॉल करके पुलिस की मदद ले सकती है। हालांकि सोनी उस वक्त हिम्मत नहीं जुटा सकी। ऐसे में मैंने उनके पिता को समझाया। लेकिन वह नहीं माने। मैंने पुलिस को खबर करने की बात की तो वह और बिफर गए।"

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कंचन कहती हैं कि कोशिशों का असर हुआ और सोनी ने भी विरोध की हिम्मत जुटाई। सोनी खुद पिता से बोल पड़ी, 'अगर आप शादी नहीं रोकेंगे तो मैं खुद रोक दूंगी।' बेटी की हिम्मत के आगे आखिरकार उसके पिता को झुकना पड़ा। उन्हें समझ में आ गया कि वह क्या गलत करने जा रहे थे।

17 लाख भारतीय बच्चों में से 6 प्रतिशत जिनकी उम्र 10 से 19 साल के बीच है, शादीशुदा हैं। इनमें से कई की अपने से बड़े लोगों से शादी हुई।
28 लाख उत्तर प्रदेश और बिहार में शादीशुदा बच्चों की संख्या, यह देश में सबसे ज्यादा है
(2011 की जनगणना के अनुसार)

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