रक्षाबंधन विशेष : बच्चों ने रद्दी सामान से बनाई खूबसूरत राखियां

Divendra SinghDivendra Singh   25 Aug 2018 12:41 PM GMT

रक्षाबंधन विशेष : बच्चों ने रद्दी सामान से बनाई खूबसूरत राखियां

लखनऊ। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में आज छात्र-छात्राओं को ही नहीं अभिभावकों को भी पहुंचने की जल्दी थी, जिनके बच्चे स्कूल में नहीं भी पढ़ते हैं, वो भी आज स्कूल जल्दी पहुंचना चाहते थे, आपको यही लग रहा होगा कि लोगों को इतनी जल्दी क्यों थी, क्योंकि हर किसी को रक्षाबंधन के लिए सबसे अच्छी राखी जो खरीदनी थी।

इन्हीं बच्चों ने बनाई हैं रद्दी सामान से खूबसूरत राखियां

बस्ती जिले के गौर ब्लॉक के कलवसिया गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में इस बच्चों की बनी राखियों का मेला लगाया गया, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों की बनायी राखियों की दुकान लगाई गई। ये सारी राखियां बच्चों ने रद्दी कागज, धागे की रील, रक्षासूत्र, व पुराने कपड़ों की मोतियों से बनाई गईं हैं।

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इसका श्रेय जाता है पूर्व माध्यमिक विद्यालय के कला व शिल्प शिक्षक आलोक शुक्ला को, वो बताते हैं, "बच्चों की बनायी राखियों को अभिभावकों और ग्रामीणों को बच्चों की बनायी ये राखियां बहुत पसंद आयी, सभी ने राखियां खरीद ली, बच्चों की बनायी इन राखियों की 1100 रुपए की कमाई हुई जो बाल संसद के कोष में जमा कर दिया गया।"

हस्तकला की शुरूआत के बारे में वो बताते हैं, "2013 में जब से मेरी यहां पर नियुक्ति हुई तभी से बच्चों को कुछ न कुछ नया सिखाता रहता हूं, अब बच्चे राखी ही नहीं कागज की कतरनों से फ्लावट पाट, पेन स्टैंड जैसे सामान बना लेते हैं।"

बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था, आखिर क्यों न हो उनकी बनाई राखियां लोगों को खुब पसंद आ रही थीं। बाल संसद के अध्यक्ष सुरज गुप्ता ने बताया, "इस बार बाल संसद के कोष में 1100 की ज्यादा बढ़ोतरी हुई, ये हम स्कूल के काम में लगाएंगे।"

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ग्रामीणों को पसंद आयी राखियां, खूब की खरीददारी

ग्राम प्रधान अली अहमद ने कहा, "इस प्रकार के आयोजनों में से बच्चों को पढ़ाई के साथ ही दूसरे हुनर को भी पहचान मिलती है।

कई जगह पर लगा चुके हैं प्रदर्शनी

आलोक और बच्चों ने मिलकर ब्लॉक या जिला स्तर पर ही नहीं राष्ट्रीय स्तर तक प्रदर्शनी लगायी है। राजधानी लखनऊ में लगी प्रदर्शनी में केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इनके काम की तारीफ की। विद्यालय के रजिस्टर में उन्होंने खुद तारीफ की लाइनें लिखी। साल 2015 में सूरज कुंड दिल्ली में भी इनके काम की तारीफ हुई।

18 बच्चों की टोली में है ये हुनर

आलोक शुक्ला की टोली में 18 बच्चे शामिल हैं, जो रद्दी में फेंके जाने वाले कागज से उपयोगी सामान बनाते हैं। आलोक को राज्य व केंद्रीय संस्थाओं द्वारा कार्यशालाओं प्रशिक्षक के रूप में भी बुलाया जाता है।

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