गर्मी की छुट्टियों में भी खेल-कूद के साथ ही हर दिन चलती रही क्लास

Divendra SinghDivendra Singh   1 July 2018 11:32 AM GMT

गर्मी की छुट्टियों में भी खेल-कूद के साथ ही हर दिन चलती रही क्लास

माल (लखनऊ)। गर्मियों की छुट्टी में जहां बच्चे अपने स्कूल को भूल ही जाते हैं, लेकिन इस गाँव के बच्चों ने अपनी छुट्टियों को बर्बाद नहीं जाने दिया, स्कूल तो बंद रहा लेकिन गाँव में ही हर दिन क्लास लगती रही। गाँव के बड़े बच्चों ने अपनी जिम्मेदारी समझी है और छोटे बच्चों को हर दिन पढ़ाने लगे हैं।

चौथी कक्षा में पढ़ने वाले राज बिना रुके हिंदी और अंग्रेजी पढ़ लेते हैं, राज और दूसरे बच्चे गर्मी की छ्ट्टी में खेल के साथ ही पढ़ाई भी करते हैं। ये पाठशाला लखनऊ जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी. दूर माल ब्लॉक के रामपुर गाँव में लगती है।


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इस पाठशाला में हर दिन करीब 30 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं, प्राथमिक विद्यालय की विद्यालय प्रबंधन समिति और गैर सरकारी संस्था वात्सल्य के सहयोग से सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली नीरज पहले गाँव भर के बच्चों को इकट्ठा करती हैं, फिर उन्हें पढ़ाती हैं।

दस साल के राज बताते हैं, "हम लोग हर दिन गाँव में ही क्लास में पढ़ते हैं, नीरज दीदी हम लोगों को हर दिन घर से बुलाकर ले आती हैं और पढ़ाती हैं।"

नीरज बताती हैं, "सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को गर्मी की छुट्टी के लिए कोई होमवर्क नहीं मिलता है, हम लोग छोटे थे तो गर्मी में दिन भर घूमते स्कूल खुलने तक जितना कुछ पढ़ा रहता सब भूल जाते, लेकिन अब मुझे जितना आता है बच्चों को पढ़ा देती हूं। पहले तो छोटे बच्चे आना ही नहीं चाहते थे, लेकिन अब सब आते हैं, खेल के साथ ही हर दिन पढ़ायी भी हो जाती है।"

प्राथमिक विद्यालय में हर महीने की पांच या छह तारीख़ को विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक होती है। 15 सदस्यों में से हर मीटिंग में 10 से 12 लोग शामिल होते हैं। मीटिंग में किन-किन विषयों पर चर्चा होती है और उसमें क्या सुधार किया जाता है इसकी पूरी रिपोर्ट रजिस्टर में लिखी होती है। लखनऊ में काम कर रही एक गैर सरकारी संस्था वात्सल्य द्वारा प्लान इण्डिया के सहयोग से इस विद्यालय में ही नहीं बल्कि माल ब्लॉक के 32 माध्यमिक और पूर्व माध्यमिक में नियमित हर महीने विद्यालय प्रबंधन समिति की मीटिंग होती है। इसके अलावा लखनऊ के आठ ब्लॉक के 10-10 स्कूल मिलाकर 80 विद्यालयों में लगातार ये बैठकें होती हैं।

वात्सल्य संस्था की तरफ से इन बच्चों के लिए किताबें, कॉपियां और पढ़ाई के जरूरी सामान दिए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय की विद्यालय प्रबंधन समिति की सदस्य पिंकी कहती हैं, "अब हर दिन सभी बच्चे नीरज के घर इकट्ठा हो जाते हैं, हम लोग भी बच्चों को देखते रहते हैं, बच्चे स्कूल बंद होने के बाद भी तो हमारी ही जिम्मेदारी में आते हैं।"

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