सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाकर लोगों की सोच बदल रहे सरकारी कर्मचारी

सिद्धार्थनगर जिले के भनवापुर ब्लॉक के हसुड़ी ग्राम पंचायत के विद्यालय बने लोगों की पसंद, सरकारी कर्मचारी भी निजी स्कूलों से नाम कटवा कर यहां बच्चों को पढ़ा रहे

Divendra SinghDivendra Singh   19 Dec 2018 8:14 AM GMT

सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाकर लोगों की सोच बदल रहे सरकारी कर्मचारी

सिद्धार्थनगर। आमतौर पर देखा जाता है कि सरकारी नौकरी करने वाले अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने से कतराते हैं, लेकिन भनवापुर ब्लॉक के हसुड़ी ग्राम पंचायत के विद्यालय ने अपनी पढ़ाई और अनुशासन के दम पर लोगों की सोच को बदला है।

हसुड़ी ग्राम पंचायत के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों के बच्चे भी यहीं शिक्षा ग्रहण कर रहे है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के एक दर्जन से भी अधिक बच्चे यहां पढ़ाई कर रहे हैं।

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अध्यापक मनोज कुमार की बेटी आराध्या कक्षा एक व अभिलाषा कक्षा तीन में पढ़ती है वहीं शिक्षक मनोज कुमार वरुण के पोता-पोती गरिमा कक्षा तीन व सौरभ कक्षा छह में नामांकित हैं। मनोज कुमार वरुण बताते हैं, "मैं यहां पर अंग्रेजी, गणित और विज्ञान पढ़ाता हूं। जैसे हम दूसरे बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं वैसे ही अपने बच्चों पर भी ध्यान दे पा रहे हैं।"


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शिक्षामित्र त्रियुगी की बेटी खुशी कक्षा तीन व शुभी कक्षा एक और शिक्षा मित्र राजेश यादव की पुत्री गरिमा कक्षा दो की छात्रा है। एएनएम द्रोपदी का बेटा आकाश भी कक्षा तीन में पढ़ता है। एएनएम द्रोपदी बताती हैं, "मेरे बच्चे पहले एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे, जो घर से चार किमी. दूर है। इसके लिए डेढ़ सौ रुपए फीस और दो सौ रुपए गाड़ी के अलग से लगते थे। जब यहां की पढ़ाई के बारे में पता चला तो बच्चों का दाखिला करवा दिया। जब घर के पास ही सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई हो रही हो तो बच्चों को इतनी दूर भेजने का क्या फायदा। पैसे की भी बचत होती है।"

मैंने भी इसी प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय से पढ़ायी की थी, इसलिए यहीं से शुरुआत की। हमारी कोशिश रही है कि स्कूल बेहतर बनें।
दिलीप त्रिपाठी, ग्राम प्रधान, हसुड़ी ग्राम पंचायत

बीडीसी फेरई यादव का पोता नितिन व पोती साक्षी कक्षा पांच में नामांकित हैं। फेरई बताते हैं, "मेरे बच्चे पिछले दो साल से यहां पढ़ रहे हैं। बच्चों को यहां पढ़ाई के साथ अच्छे संस्कार भी मिल रहे हैं। स्कूल में स्वच्छता पर भी खास ध्यान दिया जाता है। नियमित बाल और नाखून की भी जांच होती है। यहां का अनुशासन सख्त और पढ़ाई अच्छी है।"

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आशा बहू मिथिलेश त्रिपाठी का पुत्र शिवम कक्षा पांच तो अमन कक्षा सात का छात्र है। ये दोनों बच्चे पहले निजी विद्यालय में पढ़ते थे। मिथिलेश बताती हैं, "दोनों बच्चों पर बाहर की पढ़ाई पर आठ से दस हजार रुपये प्रतिमाह खर्च होते थे, लेकिन अब इसकी चिंता नहीं है। निजी स्कूल से अच्छी शिक्षा यहां के सरकारी स्कूल में मिल रही है।

प्राथमिक विद्यालय

219 विद्यार्थी

4 अध्यापक

पूर्व माध्यमिक विद्यालय

50 विद्यार्थी

02 अध्यापक हैं

ग्राम प्रधान के प्रयासों से बदली है तस्वीर

हसुड़ी औसानपुर के ग्राम प्रधान के प्रयासों से इस स्कूल की तस्वीर बदली है। उनके प्रयास से गाँव में स्थित प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय का पूरी तरह कायाकल्प हो चुका है, ये अब हाईटेक विद्यालय बन गए हैं। फर्श पर लगे टाइल्स, दीवारों पर लगी पुट्टी व शौचालयों में लगा फ्लश इस विद्यालय को अन्य विद्यालयों से अलग करता है। अपनी पढ़ाई की गुरुदक्षिणा के रूप में ग्राम प्रधान निजी तौर पर दस लाख रुपये खर्च कर चुके हैं।

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