प्रधानाध्यापिका के प्रयासों से बदली स्कूल की तस्वीर, शुरू हुई लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास

Divendra SinghDivendra Singh   20 Dec 2018 7:30 AM GMT

प्रधानाध्यापिका के प्रयासों से बदली स्कूल की तस्वीर, शुरू हुई लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लासस्कूल के एक कार्यक्रम मेें आए प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी

(डोमी भुवालपुर) प्रतापगढ़। कुछ माह पहले गिरती दीवारें... टूटी फर्श... डोमी भुवालपुर प्राथमिक विद्यालय की पहचान हुआ करती थीं। आज दीवारों पर शानदार पेंटिंग, चमचमाती फर्श, अत्याधुनिक लाइब्रेरी और प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, साफ-सुथरे शौचालय और बच्चों की बढ़ती संख्या स्कूल में बदलाव की कहानी बयां कर रहे हैं।

प्रतापगढ़ जिले के सदर ब्लॉक का डोमी भुवालपुर प्राथमिक विद्यालय साल भर पहले दूसरे सरकारी स्कूलों की तरह ही था। वर्ष 2015 में यहां प्रधानाध्यापिका डॉ. नीलम सिंह की नियुक्ति हुई। अंग्रेजी में पीएचडी कर चुकी नीलम ने स्कूल में आते ही नए प्रयोग करने शुरू कर दिए। सबसे पहले उन्होंने अपनी सैलरी से दस हजार रुपए खर्च कर बच्चों के बैठने के लिए डेस्क-बेंच का इंतजाम किया।


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डॉ. नीलम सिंह बताती हैं, "स्कूल में व्यापक बदलाव की जरूरत थी। धीरे-धीरे मैंने चीजों में बदलाव लाने की शुरुआत की। सबसे पहले शनिवार को नो बैग डे घोषित किया। इस दिन आधे दिन खेल और बाकी समय सोशल एक्टिविटी शुरू की। हम लोगों की मेहनत का ही नतीजा है कि आज हमारे स्कूल में 250 से अधिक बच्चे हैं।"

वह आगे बताती हैं, "बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास की जरूरत नहीं पड़ी। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आने से अभिभावक खुद अपने बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए आगे आए। हमारे स्कूल में कॉन्वेंट विद्यालयों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है।"

प्रोजेक्टर से चलती है स्मार्ट क्लास

प्रोजक्टर से स्मार्ट क्लास तो चलती ही है साथ ही प्रेरणादायक फिल्में और कहानियां भी बच्चों को दिखाई जाती हैं। प्रधानाध्यापिका बताती हैं, "प्रोजेक्टर के माध्यम से हम बच्चों को उनका पाठ्यक्रम तो पढ़ाते ही हैं, प्रेरणादायक फिल्में और कहानियां भी दिखाते हैं, जिससे उन्हें बेहतर शिक्षा मिले और उनकी सोच का दायरा बढ़े।"


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लाइब्रेरी में हैं छह सौ किताबें

स्कूल में विज्ञान और कंप्यूटर की लैब के साथ लाइब्रेरी भी है, जिसमें छह सौ से अधिक किताबें हैं। यहां से बच्चों को किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। स्कूल के पुस्तकालय में लोगों की मदद से किताबें इकट्ठा की गई हैं।

प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इस बार जिले के 127 स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर विकसित किया गया है। इन स्कूलों में कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होगी।
बीएन सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रतापगढ़

स्कूल में पांच अध्यापक हैं। बच्चों को कैरम, बैडमिंटन, क्रिकेट और शतरंज भी खेलवाया जाता है। स्कूल के विकास में प्रधान ने भी सहयोग किया है और अब यहां साफ-सुथरे शौचालय के साथ हर कमरे में टाइल्स और पानी के लिए सबमर्सिबल भी लगा दिया गया है।

अफसर भी करते हैं तारीफ

इस विद्यालय में कई बार डीएम और सीडीओ भी आ चुके हैं। इतना ही नहीं जिले के अलग-अलग ब्लॉकों के डेढ़ सौ से अधिक परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर भी पूरी तरह से बदल गई है। ये सब हुआ है यहां के प्रधानाध्यापकों, ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के सहयोग से।

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जिले में स्कूलों की संख्या

प्राथमिक विद्यालय: 2,022

पूर्व माध्यमिक विद्यालय: 727

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