विश्व शिक्षक दिवस : अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाकर शिक्षक तोड़ रहे मिथक

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक के विद्यालय में टीचर भी अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के कई शिक्षक हर दिन अपने साथ अपने बच्चों को लेकर कई किमी. दूर से लेकर आते हैं और इन्हें अपने विद्यालय में ही पढ़ा रहे हैं।

Divendra SinghDivendra Singh   5 Oct 2018 6:59 AM GMT

विश्व शिक्षक दिवस : अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाकर शिक्षक तोड़ रहे मिथक

निचलौल (महराजगंज)। अमूमन सभी यह सोचते हैं कि सरकारी विद्यालयों के टीचर खुद अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं। यह काफी हद तक सही भी जान पड़ता है। लेकिन महराजगंज जिले के निचलौल ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय यह छवि तोड़ता है।

महाराजगंज जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी. दूर निचलौल ब्लॉक के गिरहिया पंचायत के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के ज्यादातर अध्यापक रोज अपने बच्चों को भी साथ लाते हैं। प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक शम्भू रावत बताते हैं, "जब मैंने अपने दोनों बच्चों का नाम अपने विद्यालय में लिखाने की बात की तो लोगों ने मजाक बनाया। लोग यहां तक कहने लगे, लगता है मास्टर जी के पास पैसों की कमी हो गई। लेकिन मैंने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। जब खुद सरकारी विद्यालयों में पढ़ाते हैं तो अपने बच्चों को यहां क्यों नहीं पढ़ा सकते हैं। जब हम पढ़ाएंगे तो तभी दूसरे भी सरकारी स्कूल आएंगे।"

अकेले शम्भू रावत नहीं विद्यालय के कई शिक्षक ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं, प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय के कई शिक्षक हर दिन अपने साथ अपने बच्चों को लेकर कई किमी. दूर से लेकर आते हैं और इन्हें अपने विद्यालय में ही पढ़ा रहे हैं।


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प्राथमिक विद्यालय में 500 से ज्यादा बच्चे

प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों का ही प्रयास है कि इस बार 580 बच्चों का नामांकन हुआ है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 139 बच्चों का नामांकन है। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक भूपेंद्र सिंह बताते हैं, "अध्यापकों के साथ ही एसएमसी सदस्यों का भी काफी सहयोग मिलता है, तभी पांच-छह किलोमीटर दूर से भी बच्चे अपने गाँव के विद्यालयों को छोड़कर यहां पर नाम लिखाते हैं। इस बार हमारा विद्यालय अंग्रेजी माध्यम का हुआ है। हमारा प्रयास रहता है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दे पाएं।"

"अध्यापकों व ग्रामीणों का ही सहयोग है कि विद्यालय का माहौल परिवार की तरह लगता है, इससे कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होती है, हमारे बच्चे यही नहीं प्रदेश स्तर तक खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं।"
धनु चौहान, प्रधानाध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय

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नहीं करते सरकारी बजट का इंतजार

विद्यालय प्रबंधन समिति व अध्यापक विद्यालय की जरूरतों के लिए कभी बजट का इंतजार नहीं करते। प्राथमिक विद्यालय के विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जीतेंद्र चौधरी कहते हैं, "विद्यालय में हमारे बच्चे ही पढ़ते हैं तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें। स्कूल में बेंच-डेस्क की जरूरत थी। अध्यापकों ने बताया तो हम गाँववालों ने अपने पेड़ गाँव को दे दिए, जिससे फर्नीचर बन गया। विद्यालय में हर कमरे में लगी घड़ी, पंखे सब ग्रामीणों ने ही दिए हैं।"


महराजगंज में विद्यालयों की संख्या
प्राथमिक : 1478
पूर्व माध्यमिक: 673

साथ होती है प्रार्थना

प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में है, जिससे कोई भी काम होता है तो सभी अध्यापक मिलकर करते हैं। बच्चों के दिन की शुरुआत प्रार्थना से होती है, जिसमें दोनों विद्यालयों के बच्चे शामिल होते हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय में ढ़ोलक, हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्र, जिसके साथ हर सुबह संगीतमयी प्रार्थना होती है।।

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निचलौल ब्लॉक के विद्यालय का हाल
प्राथमिक: 06 अध्यापक, 580 बच्चे
पूर्व माध्यमिक: 05 अध्यापक, 139 बच्चे


प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में लेते हैं भाग

अध्यापकों व ग्रामीणों का ही सहयोग कि विद्यालय का माहौल परिवार जैसा लगता है, इससे कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होती है। बच्चे यही नहीं प्रदेश स्तर तक खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य लक्ष्मीकांत बतातेे हैैं, "अगर किसी दिन कोई बच्चा स्कूूल नहीं आता तो मास्टर जी लोग घर तक देखने जाते हैं कि बच्चा क्यों नहीं अगर कोई परेशानी होती है तो उसे भी दूर करते हैं, अगर कोई बच्चा बीमार हो गया तो खुद यही लोग डॉक्टर को दिखाने भी जाते हैं।"

मैंने कई बार वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लिया है और जीत भी गई, टीचर हमें संगीत भी सिखाते हैं, कोई अनुपस्थित नहीं होता।
गुड़िया, कक्षा- आठ, पूर्व माध्यमिक विद्यालय

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