खुद पढ़े नहीं, लेकिन जगा रहे शिक्षा की अलख

मैकू की कोशिशों का ही असर है कि अब गाँव का हर बच्चा स्कूल जाता है। मैकू अली ने अपने गाँव के साथ पांच अन्य विद्यालयों की भी जिम्मेदारी ले रखी है। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष बनने से पहले भी मैकू अली लोगों को शिक्षा के लिए जागरूक करते थे।

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   30 Aug 2018 9:40 AM GMT

श्रावस्ती। वो खुद पढ़े लिखे नहीं हैं, शायद यही वजह है कि पढ़ा लिखा न होने का दर्द समझते हैं और चाहते हैं कि उनके गाँव का कोई बच्चा निरक्षर न रहे। हम बात कर रहे हैं कि श्रावस्ती के विकास खंड सिरसिया के प्राथमिक विद्यालय सिकटहवा के विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मैकू अली की।

मैकू लाल बताते हैं, "मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं, लेकिन मैं चाहता हूं कि मेरी तरह गांव का कोई बच्चा निरक्षर न रहे। गाँव का विकास तभी होगा जब गांव का हर बच्चा शिक्षित होगा।"


मैकू की कोशिशों का ही असर है कि अब गाँव का हर बच्चा स्कूल जाता है। मैकू अली ने अपने गाँव के साथ पांच अन्य विद्यालयों की भी जिम्मेदारी ले रखी है। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष बनने से पहले भी मैकू अली लोगों को शिक्षा के लिए जागरूक करते थे। उनकी इन्ही कोशिशों को देखते हुए मैकू अली को विद्यालय प्रबंध समिति का अध्यक्ष बना दिया गया।

सिकटहवा गाँव के मैकू अली कहते हैं, "मैं चाहता हूं की देश का कोई बच्चा अशिक्षित न रहे। जब बच्चा पढ़ेगा तभी उसके गाँव और उसके परिवार का विकास होगा। यही वजह है कि मैं गाँव के हर बच्चे को स्कूल भेजने के लिए उनके माता-पिता को प्रेरित करता हूं। अपना स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूल भी जाता हूं। मैं जब किसी रिश्तेदारी में जाता हूं तो वहां भी लोगों को पढ़ाई के लिए जागरूक करता हूं।"

हम लोग जिले में शिक्षा का स्तर और बढ़ाना चाहते हैं। मुझे जानकारी है कि मैकू अली अपने विद्यालय के साथ कुछ और विद्यालयों की जिम्मेदारी लिए हुए हैं। मैकू की तरह अन्य एसएमसी अध्यक्ष को अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभानी चाहिए। जब सभी लोग अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाएंगे तभी हम लोग शिक्षा के स्तर को ऊंचा कर सकेंगे।
ओमकार राना, बीएसए

हर साल बढ़ रहे बच्चे


प्राथमिक विद्यालय सिकटहवा में कुछ साल पहले तक बच्चों की संख्या बहुत कम थी। माता-पिता बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। जो बच्चे पंजीकृत थे वे भी कभी कभी ही आते थे, लेकिन मैकू की कोशिशों का असर है कि विद्यालय में बच्चों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

सबने की तारीफ

प्रधानाध्यापक सुनील शुक्ला बताते हैं, "हमारे विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 170 है। अभी कुछ और के नाम लिखने बाकी हैं। हमारे विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मैकू अली और अन्य सदस्यों की भूमिका सराहनीय है। जब भी विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने की बात होती है सभी सदस्य बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। वो ग्रामीणों को जागरूक करते हैं कि बच्चों को स्कूल जरूर भेजें।"

सफाई के लिए करते हैं प्रेरित

मैकू लाल आगे कहते हैं, "दिन की शुरुआत घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल भेजने से होती है। हम बच्चों को साफ-सफाई के लिए भी जागरूक करते हैं। हर सप्ताह बच्चों के नाखून चेक करते हैं। जो बच्चा साफ कपड़े पहनकर नहीं आता उसे सफाई की अहमियत बताते हैं। इसके साथ ही बच्चों के माता-पिता को भी सफाई की जानकारी देते हैं। ध्यान रखते हैं कि बिना हाथ धोए कोई बच्चा मिड डे मिल न खाए।"

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