अभिभावकों ने समझी जिम्मेदारी, अब हर एक बच्चा जाता है स्कूल

सहारनपुर जिले के रामपुर ब्लॉक के जंधेड़ा शमसपुर गाँव के प्राथमिक विद्यालय में विद्यालय प्रबंधन समिति के प्रयास से स्कूल में बढ़ी बच्चों की संख्या

अभिभावकों ने समझी जिम्मेदारी, अब हर एक बच्चा जाता है स्कूल

सहारनपुर। हर बच्चे की पढ़ाई पर खास ध्यान...उनकी कमजोरियों को ताकत बनाने की कवायद और शिक्षा के साथ संस्कार का पाठ पढ़ाना...ये वो बातें हैं जो सहारनपुर जिले के रामपुर ब्लॉक के जंधेड़ा शमसपुर गाँव के प्राथमिक विद्यालय को खास बनाती हैं। कुछ साल तक यहां पर बच्चों का नामांकन नाममात्र का था, शहर से नजदीक होने के कारण यहां के लोग बच्चों को शहर के निजी स्कूलों में भेजते थे। ऐसे माहौल में विद्यालय प्रबंधन समिति ने अहम रोल निभाया।

प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मोनीशा इस बारे में बताती हैं, "शहर के नजदीक होने के कारण गाँव के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ने जाया करते थे, लेकिन जब से विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन हुआ अभिभावक खुद स्कूल आने लगे। एक को देखकर दूसरे को भी प्रेरणा मिली और स्कूल में बच्चों की संख्या में इजाफा होने लगा।"

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घर-घर जाकर बुलाते हैं बच्चे

विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य अध्यापकों के साथ महीने में एक बार गाँव का चक्कर लगाते हैं। प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रवेश बताते हैं, "पहले तो लोग अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूलों में लिखा तो लेते थे, लेकिन पढ़ने के लिए नहीं भेजते थे। पहले मैं अभिभावकों से कुछ कह नहीं सकता था, लेकिन जब से एसएमसी का अध्यक्ष बना हूं, घर-घर जाकर देखता हूं कि किसका बच्चा आ रहा है और किसका नहीं, अगर नहीं आ रहा तो क्यों नहीं आ रहा है। हमारी इस पहल में स्कूल के अध्यापक भी मदद कर रहे हैं।"

"समिति के सदस्यों के सहयोग से ही हमारे विद्यालय की पहचान हर तरफ है, जितने भी सदस्य हैं उन्हें उनकी जिम्मेदारी का पूरा अहसास है। पहले इस गाँव के ज्यादातर बच्चे दूसरे स्कूलों में पढ़ने जाते थे। आज गाँव का पांचवी तक का हर बच्चा यहीं पढ़ता है, "मोनिशा, प्रधानाध्यापिका

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घुमंतू परिवारों के बच्चों का भी कराया एडमिशन

गाँव में कई ऐसे परिवार हैं जो घूमते रहते हैं, ऐसे में उनके बच्चे पढ़ ही नहीं पाते हैं। सदस्यों व ग्राम प्रधान ने घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाया कि अगर बच्चे नहीं पढ़ेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। अब उनमें से कई बच्चों का नाम लिख गया है। इससे साफ है कि विद्यालय प्रबंधन समितियां अगर अपने दायित्वों को समझें और स्कूलों पर ध्यान दें तो तस्वीर बदल सकती है।


विद्यालय में हैं छह अध्यापक

कई साल से विद्यालय में अध्यापकों की काफी कमी थी, इस साल अंग्रेजी मीडियम होने से स्कूल में छह अध्यापक हो गए हैं। अध्यापकों की संख्या बढ़ने और इंग्लिश मीडियम होने से भी लोगों का रुझान प्राथमिक विद्यालय की तरफ बढ़ा है।

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"मैं गाँव की हूं तो लोगों को ज्यादा अच्छे से समझती हूं, स्कूल आते-जाते अभिभावकों से मुलाकात हो जाती है, ऐसे में जिसका बच्चा नहीं आ रहा, उसे समझाते भी हैं। अब लोगों की सोच में बदलाव दिखने लगा है, "सरिता, शिक्षामित्र

हर महीने होती है विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक

महीने में एक बार विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक होती है। मीटिंग में किन-किन विषयों पर चर्चा होती है और उसमें क्या सुधार किया जाता है इसकी पूरी रिपोर्ट रजिस्टर में लिखी होती है। इसमें ज्यादातर सदस्य भाग लेते हैं। ऐसी मीटिंग काफी मददगार साबित हो रही हैं।

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