प्रधानाध्यापक ने वीरान स्कूल को बनाया हराभरा, बच्चे खुद करते हैं पेड़-पौधों की देखभाल

महोबा के विकास खंड कबरई के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजहरी के प्रधानाध्यापक ने बदली तस्वीर, बच्चे खुद करते हैं पेड़-पौधों की देखभाल, हरियाली की वजह से गर्मी के मौसम में भी स्कूल में रहती है राहत

महोबा। " जब मेरी नियुक्ति इस विद्यालय में हुई तो यहां जंगल जैसी स्थिति थी। बच्चे स्कूल में पढ़ने की जगह विद्यालय के पास स्थित पहाड़ी पर खेलने चले जाते थे। मैंने एसएमसी सदस्यों के साथ मिलकर विद्यालय सुधारने की ठानी। हमारी कोशिशों का नतीजा है जो आज विद्यालय अपने खूबसूरत परिसर और अनुसाशन के लिए पूरे जनपद में मशहूर है।" यह कहना है विकास खंड कबरई के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजहरी के प्रधानाध्यापक दयाराम का।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक दयाराम ने बताया, '2015 में जब मेरी इस विद्यालय में तैनाती हुई थी तब बहुत ही कम विद्यार्थी पंजीकृत थे। विद्यालय की हालत बेहद खराब थी। हर तरफ झाड़ियां और घास उगी हुई थी। हालात इतने बुरे थे कि स्कूल के बगल में स्थित पहाड़ पर जाने के लिए ग्रामीण स्कूल परिसर से होकर निकलते थे।

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वे अपने जानवरों को भी विद्यालय परिसर में छोड़ देते थे। इस वजह से यहां बच्चे पढ़ने नहीं आते थे। विद्यालय में पढ़ाई और अनुशासन का कोई माहौल नहीं था। मैंने अपने सहकर्मी अध्यापकों और एसएमसी सदस्यों की मदद से विद्यालय परिसर को साफ सुथरा कराया। आज विद्यालय में 256 बच्चे पंजीकृत हैं।'


झांसी से मंगाकर लगाए पौधे

प्रधानाध्यापक ने बताया, 'मैंने हर बच्चे से एक-एक पौधा लगवाया। जो बच्चा जिस पौधे को लगाता है उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। यह सब इतना आसान नहीं था। शुरू में बहुत परेशानी हुई। पहले जब हम पौधे लगाते थे तो गाँव के कुछ अराजक तत्व सब उखाड़ देते थे। हम अगले दिन आकर फिर उसे ठीक करते। गाँव के लोग परिसर को भी गंदा कर जाते थे। हमने उन्हें समझाया। धीरे-धीरे लोगों ने मदद करनी शुरू की। अब उनकी देखभाल भी वही करते हैं।'

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विद्यालय में पंजीकरण: 256 बच्चे
छात्र: 127 छात्र
छात्राएं: 129 छात्राएं


विद्यालय में बना रखा है किचन गार्डेन

विद्यालय परिसर में फूल-पौधों के साथ-साथ कई प्रकार की सब्जियां भी लगाई गई हैं। यहां उगने वाली शुद्ध और ताजी सब्जियों को मिड-डे-मील में इस्तेमाल किया जाता है। एसएमसी अध्यक्ष तुलसी दास ने बताया, 'हमारे विद्यालय का परिसर काफी बड़ा है। हम लोग खाली जगह में टमाटर, लौकी, बैंगन और पालक की खेती करते हैं। इन सब्जियों को उगाने के लिए हम लोग जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं ताकि बच्चों को पौष्टिक खाना मिल सके।'

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कक्षा सात की छात्रा वर्षा राजपूत ने बताया, " हमारे विद्यालय का परिसर बहुत ही सुंदर है। पहले गर्मी के मौसम में बहुत दिक्कत होती थी। अब हरियाली की वजह से कक्षा में कम गर्मी महसूस होती है। हम बच्चों ने स्कूल में बहुत से पौधे लगाए हैं। रोजाना पौधों में हम पानी डालते हैं और उनकी देखभाल करते हैं।"


अभिभावक जगदीश कुमार ने बताया, " पहले स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं होती थी। बच्चे स्कूल जाने की जगह पहाड़ी पर खेलने चले जाते थे लेकिन जबसे नए प्रिंसिपल दयाराम आए हैं तब से काफी बदलाव हुआ है। बच्चे अब स्कूल की देखभाल खुद करते हैं। पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ी है।"

प्रधानाध्यापक दयाराम ने बताया, " विद्यालय में मैंने करीब पचास किस्म के पेड़-पौधे लगवाए हैं। कई पौधे झांसी से मंगवाए हैं। विद्यालय में पौधे लगाने का मेरा उद्देश्य बच्चों को प्रकृति से लगाव पैदा करना था।"

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