अध्यापकों की कमी होने पर ग्रामीणों ने संभाली पढ़ाई की जिम्मेदारी, स्कूल में बढ़ा बच्चों का नामांकन

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक के शीतलापुर गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में अध्यापकों की कमी होने पर विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्यों ने ली पढ़ाई की जिम्मेदारी

अध्यापकों की कमी होने पर ग्रामीणों ने संभाली पढ़ाई की जिम्मेदारी, स्कूल में बढ़ा बच्चों का नामांकन

महराजगंज। हर सुबह मान सिंह अपनी कक्षा आठ में पढ़ने वाली बेटी उजाला के साथ स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाते हैं और स्कूल खत्म होने के बाद ही घर लौटते हैं। मान सिंह कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक नहीं, बल्कि विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं।


स्कूल में अध्यापकों की कमी और नई नियुक्ति न होने के कारण विद्यालय प्रबंधन समिति ने पढ़ाई की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले रखी है। महराजगंज जिले के निचलौल ब्लॉक के शीतलापुर गाँव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रबंधन समिति के सदस्य इतने जागरूक हैं कि किसी भी काम के लिए सरकारी बजट का इंतजार नहीं करते। उनकी कोशिश होती है आपसी सहयोग से सारे काम को पूरा कर लिया जाए।

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विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मानसिंह बताते हैं, "मेरी बेटी इसी विद्यालय में पढ़ती है। विद्यालय में शिक्षकों की कमीसे पढ़ाई का बहुत नुकसान हो जाता है, इसके लिए हमने कईप्रार्थना पत्र भी दिए कि अध्यापकों की नियुक्ति हो जाए। अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई तो हम लोगों ने मीटिंग में ये परेशानी सब के सामने रखी, तब जाकर फैसला किया गयाकि जब तक कोई अध्यापक नहीं आ जाता, हम लोग बारी-बारी से बच्चों को पढ़ाने आया करेंगे, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो पाए।

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महराजगंज में विद्यालयों की संख्या

प्राथमिक : 1478

पूर्व माध्यमिक: 673


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जन सहयोग से कराया शौचालय निर्माण

वैसे तो विद्यालय का नाम कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय है, लेकिन विद्यालय में बालक-बालिका दोनों पढ़ते हैं। पहले विद्यालय परिसर में शौचालय नहीं था, जिससे लड़कियों को बहुत परेशानी होती थी। विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में ये बात रखी गई और ग्राम प्रधान को भी बताया। आज यहां पर लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बन गए हैं।

65 बच्चों का हुआ नामांकन

विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों व प्रधानाध्यापक के प्रयास से बच्चों की संख्या 65 हो गई है। प्रधानाध्यापक रवि प्रसाद बताते हैं, विद्यालय का निर्माण साल 1999 में हुआ था, पहले ये सिर्फ लड़कियों के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब इसमें लड़के लड़कियां दोनों पढ़ते हैं। अभिभावकों का ही सहयोग है कि बच्चों की संख्या बढ़ी है। इस बार 65 बच्चों का नामांकन हुआ है।

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