ग्रामीणों के प्रयास से इस स्कूल में हर दिन आते हैं बच्चे

प्राथमिक विद्यालय लालपुर खदरा गाँव में हर महीने विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक होती है। 12 सदस्यों में से हर मीटिंग में आठ से नौ लोग शामिल होते हैं। मीटिंग में किन-किन विषयों पर चर्चा होती है और उसमें क्या सुधार किया जाता है, इसकी पूरी रिपोर्ट रजिस्टर में लिखी होती है।

ग्रामीणों के प्रयास से इस स्कूल में हर दिन आते हैं बच्चे

लालपुर खदरा (श्रावस्ती)। तीन वर्ष पहले जहां लालपुर खदरा गाँव के प्राथमिक विद्यालय में गिने-चुने ही बच्चे पढ़ने आते थे, वहीं इस स्कूल में आज 100 से ज्यादा बच्चों का नामांकन हो चुका है। लालपुर खदरा गाँव के ग्राम प्रधान शकीद खां बताते हैं, 'जब बच्चों को सुविधाएं मिलेगी, पढ़ाई अच्छी होगी, तभी बच्चे स्कूल आने में रुचि लेंगे। जब गाँव में स्कूल खोला गया, तब कोई भी सुविधा नहीं थी। बहुत प्रयासों के बाद शिक्षक की तैनाती हुई। उसके बाद धीरे-धीरे स्कूल में में टाइल्स, शौचालय, मिड-डे मील की व्यवस्था की गई, तो बच्चों का आना शुरू हुआ।"

मेरी ग्राम पंचायत में चार विद्यालय आते हैं। सभी में जो स्कूल में सुविधाएं होती हैं, उनको पूरा किया गया है। हम चाहते हैं सरकार अगर रुपए खर्च कर रही है तो गाँव के सभी बच्चे प्राइवेट स्कूल की बजाय सरकारी में दाखिला कराएं। शकीद ने बताया, अगर कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है तो समिति का कोई सदस्य उसके घर जाकर बुला कर लाता है। इसके अलावा हर महीने बैठक में अभिभावक को जागरूक किया जाता है।

प्राथमिक विद्यालय लालपुर खदरा गाँव में हर महीने विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक होती है। 12 सदस्यों में से हर मीटिंग में आठ से नौ लोग शामिल होते हैं। मीटिंग में किन-किन विषयों पर चर्चा होती है और उसमें क्या सुधार किया जाता है, इसकी पूरी रिपोर्ट रजिस्टर में लिखी होती है। विद्यालय के संचालन में अभिभावकों की सक्रिय भूमिका को यह समिति ही निभाती है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 21 के तहत प्रदेश में हर विद्यालय में प्रबंध समिति का गठन किया गया है।

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प्राथमिक विद्यालय लालपुर खदरा की हेड मास्टर बबीता गुप्ता बताती हैं, 'शुरू में गाँव के लोग बच्चों को स्कूल भेजते ही नहीं थे। बैठकों के जरिए समिति के सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करना शुरू किया। अब स्कूल में 110 बच्चों का नांमाकन है और 80 से 90 बच्चों की रोजाना उपस्थिति रहती है।' उन्होंने बताया कि , नई-नई गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाता है, ताकि उनकी रुचि बने रहे। एसएमसी अगर हर स्कूल में अच्छे से काम करे तो सरकारी स्कूलों की स्थिति में काफी सुधार होगा।

विद्यालय के व्यवस्थित संचालन में आस-पास के ग्रामीणों का पूरा सहयोग मिलता है, जब से स्कूल में व्यवस्था बदली है, अभिभावक भी जागरूक हुए हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष कृष्णावती बताती हैं, जब बैठक होती है तो सभी काम बांट दिए जाते हैं। गाँव में अभिभावकों को जागरूक करना, बच्चे साफ-सफाई से आ रहे हैं या नहीं, मिड-डे मील का खाना देखना कई काम रहते हैं।

वो आगे कहती हैं, पहले स्कूल में शौचालय नहीं था, जिस कारण महिला शिक्षक भी स्कूल नहीं आती थी। तब ग्राम प्रधान की मदद से शौचालय बनवाया गया। अब समय से और रोजाना शिक्षक और बच्चे आते हैं। अगर स्कूल में कोई दिक्कत होती है तो हेड मास्टर भी बताते हैं। स्कूल में पीने के लिए एक हैंडपंप, शौचालय, कमरों में पंखे और लाइट की व्यवस्था है। इसके अलावा बच्चों के लिए मीनू के हिसाब से मिड-डे मील तैयार किया जाता है। मिड-डे मील को देखने के लिए हर रोज कोई एक समिति का व्यक्ति खाने की गुणवत्ता को चेक करने के लिए आता है।

शिक्षकों की कमी, मगर बच्चों को सभी सुविधाएं

हेड मास्टर बबीता गुप्ता ने बताया, इस स्कूल में शिक्षकों कमी है, फिर भी बच्चों को अच्छे से पढ़ाया जाता है। अभी स्कूल में एक शिक्षामित्र और मैं बच्चों को पढ़ा रही हूं। शिक्षकों की कमी है, लेकिन बच्चे रोज स्कूल आएं, इसके बच्चों को सारी सुविधाएं दी गई हैं और बच्चों को नए-नए तरीकों से पढ़ाते हैं।

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