शनिवार यानी... बिना बैग पढ़ाई

Jigyasa MishraJigyasa Mishra   11 Sep 2018 7:11 AM GMT

शनिवार यानी... बिना बैग पढ़ाई

गोसाईगंज (लखनऊ): अनुष्का और युवराज सुबह 6:30 बजते ही रोज़ की तरह स्कूल के लिए निकलते हैं। दोनों ने स्कूल यूनिफॉर्म तो पहनी है पर बाकी दिनों की तरह आज उनकी पीठ पर बस्ता नहीं है। अनुष्का मुस्कुराते हुए बताती हैं, "शनिवार हमारे स्कूल में 'नो-बैग-डे' होता है। इस दिन हमें किताबों के बिना अलग तरीके से पढ़ाया जाता है।"

लखनऊ जिले के गोसाईगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सलौली में हर शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा होता है। यहां हर शनिवार बच्चों को बिना बस्ते के विद्यालय आना है। चौथी कक्षा की छात्रा नैंसी बताती है, 'शनिवार को हमें गणित, सामान्य-ज्ञान और विज्ञान पढ़ाया जाता है, वह भी बिना कॉपी किताब के। जो मॉनिटर होते हैं, वो बाकी सब बच्चों को अनुशासन में रखते हैं।

विद्यालय में कुल 150 छात्र नामांकित है जिनमे से रोज़ाना लगभग 120 बच्चे उपस्थित होते हैं लेकिन शनिवार को हमेशा उपस्थिति ज़्यादा होती है। "शनिवार को तो हमेशा 130 के ऊपर ही उपस्थिति होती है। बच्चों को कक्षा के बाहर, अलग तरीके से पढ़ना हमेशा पसंद आता है और इससे समझने में आसानी होती है विषयों को समझने में जो कभी कभी ब्लैकबोर्ड पे समझ में नहीं आती," प्रधानाध्यापक संतोष बताते हैं।

चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अंजली बताती है, "हम लोग मैदान में डांस करके पहाड़े याद करते हैं और वहीँ गणित और विज्ञान भी पढ़ते हैं।"

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स्टार ऑफ़ स्कूल बनने का मौका

चौथी में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले दो छात्रों को पांचवी कक्षा में 'स्टार ऑफ़ स्कूल' बनाया जाता है। कक्षा से एक बालक और एक बालिका को इसके लिए चुना जाता है । स्कूल में पढ़ने वाले अनुराग की मां गीता देवी प्रबंधन समिति की उपाध्यक्ष हैं। वह कहती हैं, "स्कूल के बच्चों को हम लोग कोई कमी महसूस नहीं होने देते। निजी विद्यालयों की तरह सभी कक्षा के मॉनिटर्स और दोनों स्टार ऑफ़ स्कूल को हेड सर ने अपने ही पैसों से बैज भी दिया है जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे प्रोत्साहित महसूस करें।"

पढ़ने का रोचक अंदाज

प्रबंधन समिति के सदस्य कमलेश सिंह बताते हैं, "बच्चों को शनिवार का इंतजार रहता है। खेल-खेल में पढ़ाई का एक अपना महत्व है। हम लोग बच्चों को एक बड़ा सा घेरा बनाकर खड़ा करते हैं। कभी पेड़ के नीचे तो कभी मैदान में यह अनोखी कक्षा लगती है। फिर एक बच्चा घेरे के अंदर आता है और डांस करते हुए पहाड़ा सुनाता है। जब बच्चा बीच में अटक जाता है तो दूसरा छात्र उसकी जगह आकर आगे का पहाड़ा सुनाना शुरू कर देता है। इस तरफ खेल-खेल में बच्चे पहाड़ा सीख लेते हैं।"

होती है अनोखी हाजि़री

शनिवार को स्कूल में सभी बच्चों की हाजि़री भी कुछ अलग तरीके से ली जाती है। हर बच्चा अपना नाम लिए जाने पर 'उपस्थित' बोलकर, बैठने से पहले देश के किसी एक राज्य व उसकी राजधानी का नाम बताता है।

नए तरीके से सीखते हैं जियोमेट्री

स्कूल में पढ़ने वाली गौरी बताती हैं, "हम सब को मैदान में गोला, तिकोनाकार, आयताकार और वर्गाकार में बैठाकर ज्योमेट्री के आकार सिखाये जाते हैं।"

शिक्षा मित्र, नीरज सिंह बताती हैं, "बच्चों को मैदान में दोस्तों के साथ खेल-खेल में सीखने मौका मिलता है। कक्षा में ब्लैक-बोर्ड पर जब लाइन खींचकर हम ये आकार सिखाते हैं तो छात्र उतनी दिलचस्पी नहीं दिखाते जितना उन्हें ऐसे सीखने में आता है।"

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अभिभावक व बच्चों को करते हैं पुरस्कृत

हर सत्र के अंत में, पांचवी कक्षा के बच्चों की विदाई समारोह के साथ एक वार्षिकोत्सव का आयोजन होता है जिसमें साल भर पढ़ाई व अन्य गतिविधियों में अव्वल आने वाले छात्रों और जागरूक अभिभावकों को सम्मानित किया जाता है।

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