सोनभद्र के जिलाधिकारी का प्रयास, एक भी बच्चे का स्कूल न छूटे

सोनभद्र के जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा, मुसहर बस्तियों पर हम विशेष ध्यान दे रहे हैं कि कोई बच्चा पीछे न रह जाए। यहां पर हमारा लक्ष्य है कि हर एक बच्चे को बेहतर शिक्षा मिले।

सोनभद्र के जिलाधिकारी का प्रयास, एक भी बच्चे का स्कूल न छूटे

सोनभद्र। एक भी बच्चा स्कूल जाने से न रह जाए इसके लिए प्रदेश भर में सर्वे किए जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों को और बेहतर बनाया जा सके और शिक्षकों की कमी पढ़ाई के आड़े नहीं आए इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। सोनभद्र के जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह से इन मुद्दों पर खास चर्चा हुई।

सवाल : सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए नया क्या कर रहे हैं ?

जवाब: अभी गाँव-गाँव जाकर सर्वे किया जा रहा है, कोशिश है कि एक भी बच्चा स्कूल जाने से रह न जाए। इसमें हम गाँव में ग्रामीणों का फीडबैक लेते हैं कि क्यों बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। ड्रॉप आउट भी एक बड़ी समस्या है इसके पीछे के कारणों को भी जानने की कोशिश की जा रही है। अभी सर्वे में सामने आया कि मुसहर बस्तियों में ड्रॉप आउट की समस्या ज्यादा है।

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सवाल : जहां पर ड्रॉप आउट की अधिक समस्या है वहां के लिए क्या कर रहे हैं ?

जवाब : मुसहर बस्तियों में ऐसी समस्याएं ज्यादा थीं, इसके लिए पूरे जिले का सर्वे किया तो 77 ऐसी मुसहर बस्तियां सामने आयी हैं। ऐसी बस्तियों पर हम विशेष ध्यान दे रहे हैं कि कोई बच्चा पीछे न रह जाए। यहां पर हमारा लक्ष्य है कि हर एक बच्चे को बेहतर शिक्षा मिले।

सवाल : स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर क्या काम हो रहा, अभी कितने स्कूलों का कायाकल्प हो रहा है ?

जवाब : हमें जिले के हर एक स्कूल को बेहतर बनाना है। अभी हमने दो सौ स्कूलों से शुरुआत की है। ऐसे स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, शौचालय और पानी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, इसके बाद हम जिले के सभी स्कूलों में इसे लागू करेंगे। इन स्कूलों में बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग ऐड) के तहत भी काम होगा। इससे बच्चों को समझने में आसानी होती है।

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सवाल : जिले में लड़कियों के ड्रॉप आडट की भी समस्या है ?

जवाब: हमने देखा कि किन स्कूलों में जरूरी संसाधनों की कमी है, इसके लिए अलग से सर्वे किया गया। सर्वे में 64 विद्यालय सामने आए जिनमें शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं थी। स्कूल में शौचालय की कमी लड़कियों के ड्रॉप आउट की एक बड़ी वजह सामने आई है। ऐसे स्कूलों में खास ध्यान दिया जा रहा है।

सवाल : ग्राम प्रधान और विद्यालय प्रबंधन समितियों की क्या भूमिका है ?

जवाब : प्रधान गाँव की मुख्य कड़ी होता है, उनसे बेहतर गाँव को कोई नहीं समझ सकता। उसके बाद आती है विद्यालय प्रबंध समिति, जिसके गठन से स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। इसके लिए हम समय-समय पर इन लोगों को अवेयर करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाते हैं, जिससे ये बेहतर ढंग से जिम्मेदारी को समझें। सर्वे में भी इन लोगों का काफी योगदान रहा है। अभी जल्दी ही फिर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जाएगा।

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