कभी स्कूल में लगती थी सब्जी मंडी, आज बच्चों से गुलजार

विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों की सक्रियता से बदायूं के विकास खंड जगत का पूर्व प्राथमिक विद्यालय उपरैरा में बदली स्थिति

कभी स्कूल में लगती थी सब्जी मंडी, आज बच्चों से गुलजार

बदायूं। एक समय इस स्कूल में सब्जी मंडी लगती थी, पूरा स्कूल से गंदगी से पटा रहता था, मगर कुछ लोगों की कोशिशों के बदौलत आज इस स्कूल की रंगत बदल चुकी है।

विकास खंड जगत का पूर्व प्राथमिक विद्यालय उपरैरा... यह वो स्कूल है, जहां कभी बच्चे तो दूर अभिभावक भी आना पसंद नहीं करते थे। विद्यालय का भवन काफी जर्जर था, बाउंड्री वॉल तक नहीं थी। ऐसे में इलाके की सब्जी मंडी विद्यालय परिसर में ही लगती थी।

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लोग गंदगी फैलाकर चले जाते थे, उस गंदगी के बीच शिक्षक और बच्चे स्कूल में घुसने से भी कतराते थे, लेकिन विद्यालय प्रबंधन समिति, अध्यापक और प्रधान ने मिलकर इस विद्यालय के हालात बदल दिए हैं। अब यह आदर्श विद्यालय की गिनती में आता है और सुविधाओं के मामले में भी निजी विद्यालयों को भी टक्कर दे रहा है।

विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक जुनैद यूनुस गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "वर्ष 2015 में मेरी जब इस विद्यालय में नियुक्ति हुई थी तो विद्यालय बहुत ही बदहाल स्थिति में था। मैंने ग्राम प्रधान वीरपाल को समस्या के बारे में बताया। उन्होंने स्कूल की जरूरतों को समझते हुए ग्राम पंचायत के विकास के लिए आने वाली निधि से करीब दो लाख रुपए का इस्तेमाल विद्यालय के लिए किया।"

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जुनैद कहते हैं, "उन दो लाख रुपयों से सबसे पहले बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया। फिर हम सभी अध्यापकों ने अपनी सैलरी से विद्यालय की रंगाई-पुताई भी कराई। विद्यालय में आधुनिक लैब भी है, जहां बच्चे विज्ञान के प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही विद्यालय में आधुनिक और साफ-सुथरे शौचालय बनवाए गए हैं।"

पड़ोस के गाँव से भी आते हैं बच्चे

प्रधानाध्यापक जुनैद ने बताया, "पहले विद्यालय में बहुत कम बच्चे स्कूल आते थे। आज हमारे विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 228 है। स्कूल की पढ़ाई और सुविधाएं ऐसी हैं कि दूसरे गाँव से भी बच्चे पढ़ने आते हैं।" पड़ोस के गाँव से आने वाले छात्र राकेश ने बताया, "मैं पहले जिस स्कूल में पढ़ता था वहां पढ़ाई अच्छी नहीं होती थी। हमें होमवर्क तक नहीं दिया जाता था, लेकिन यहां बहुत अच्छी पढ़ाई होती है। हमें हर विषय के बारे में बताया जाता है।"

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रोज होती है सफाई

यह विद्यालय अपनी सफाई के लिए भी काफी मशहूर है। गाँव में तैनात सफाईकर्मी रोज विद्यालय की सफाई करते हैं। स्कूल में लगे पेड़-पौधों की देखभाल भी वही करते हैं। सफाई कर्मी राकेश ने बताया, "यह स्कूल हमारे गाँव का है। यहां मेरे गाँव के बच्चे पढ़ते हैं। अगर विद्यालय में गंदगी होगी तो बच्चों को परेशानी होगी, इसलिए मैं रोज यहां सफाई करता हूं।"

कक्षा आठवीं के छात्र विजय ने बताया, " हमारा विद्यालय बहुत साफ-सुथरा रहता है। हम लोग भी इस बात का ध्यान रखते हैं कि स्कूल में गंदगी न फैले। इसके लिए हम लोग कूड़ा या बेकार सामान कूड़ेदान में ही डालते हैं।"

जनपद में विद्यालय

माध्यमिक: 1802

पूर्व माध्यमिक: 656

कस्तूरबा गांधी विद्यालय: १८

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उपरैरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बच्चे

228 बच्चे पंजीकृत

102 छात्राएं

126 छात्र

शतप्रतिशत हुई बच्चों की उपस्थिति

विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष वीरपाल ने बताया, " हमारे बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि विद्यालय की भलाई के लिए जितना हो सके उतना काम किया जाए। हम लोग हर महीने स्कूल और गाँव में एक बैठक करते हैं, जिसमें बच्चों के अभिभावक भी शामिल रहते हैं। स्कूल और बच्चों की बेहतरी के लिए जितना हो सकता है हम लोग करते हैं। हम लोगों के प्रयास से स्कूल में बच्चों की उपस्थिति शतप्रतिशत हो गई है।"

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