स्कूल की दीवारें भी पढ़ा रहीं शिक्षा का पाठ

संतकबीर नगर के प्राथमिक विद्यालय राउतपार में बच्चों को चित्रों और प्रतीकों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।

संतकबीर नगर: संतकबीर नगर जिले में स्थित प्राथमिक विद्यालय राउतपार पूरे क्षेत्र में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यह स्कूल जिला मुख्यालय खलीलाबाद से 15 किलोमीटर दूर एक पिछड़े ग्रामीण इलाके में स्थित है। लेकिन इसकी खूबसूरती इसे जिले के दूसरे स्कूलों से अलग बनाती है। इस स्कूल को जिला शिक्षा विभाग ने अंग्रेजी माध्यम घोषित किया है।

खबसूरती के साथ बेहतर पढ़ाई से हुआ 'कायाकल्प'

विद्यालय के प्रधानाचार्य लालमणि यादव बताते हैं, सरकार के 'ऑपरेशन कायाकल्प' योजना के तहत मिली राशि के सदुपयोग से यह बदलाव संभव हो पाया है। ग्राम प्रधान जितेंद्र यादव ने हमारे साथ मिलकर काम करवाया, जिससे यह स्कूल क्षेत्र में बेहतर बना है।



लालमणि कहते हैं, 'कायाकल्प योजना के तहत स्कूल की दशा-दिशा सुधारनी थी। हमने सोचा कि क्यों न विद्यालय में ऐसी पेंटिंग करवाई जाए जिससे वह सुंदर भी दिखे और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद भी हो सके। हमने स्कूल की दीवारों को वर्णमाला, अंग्रेजी के अल्फाबेट, गिनती-पहाड़े लिखकर पेंटिंग करवाई। दीवारों पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक जैसे राष्ट्रीय पक्षी मोर, राष्ट्रीय पशु शेर और राष्ट्रीय फूल कमल के चित्र बनाए गए। ताकि बच्चे सामान्य ज्ञान के इन सवालों को आसानी से सीख सकें।'

दीवारों से सीखते हैं बच्चे

लालमणि आगे बताते हैं कि विजुअल्स से कोई भी चीज आसानी से सीखी जासकती है। हम कोशिश करते हैं कि बच्चे देखकर कुछ अच्छा सीख सकें। यही वजह है कि हमने विद्यालय की बाउंड्री वॉल पर स्वच्छता संबंधी पंक्तियां लिखवाई हैं, ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ स्वच्छता का महत्व भी सीख सकें। कक्षा के अंदरूनी भागों में नैतिक शिक्षा की सूक्तियां लिखी गई हैं। बच्चे इसे रोज देखकर अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा लेते हैं।



बढ़ गई बच्चों की संख्या



विद्यालय के सुंदरीकरण से ना सिर्फ शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है बल्कि अभिभावक भी आकर्षित हुए हैं। इससे स्कूल में बच्चों की पंजीकरण संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। लालमणि बताते हैं कि इस साल काफी बच्चे बढ़ गए हैं। आस-पास के तीन चार गांवों के बच्चे इस स्कूल में पढ़ने आते हैं।

बच्चे सीख रहे अंग्रेजी

अक्सर सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी सही से ना पढ़ाने की शिकायतें आती रहती हैं। यह धारणा है कि सरकारी स्कूल में अंग्रेजी की पढ़ाई ही नहीं होती है। इस स्कूल के अध्यापकों ने यह धारणा तोड़ने की भी कोशिश की है। शिक्षा विभाग ने संत कबीर नगर के खलीलाबाद ब्लॉक में स्थित इस स्कूल को अंग्रेजी माध्यम घोषित किया है।



विद्यालय की शिक्षिका प्रियंका श्रीवास्तव बच्चों को अंग्रेजी सिखा रही हैं। वह अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद, हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद और अंग्रेजी बोलना भी बच्चों को सिखाती हैं। 5वीं कक्षा की खुशबू यादव फटाफट अंग्रेजी की कहानी का भाव हिंदी में बताती है। वह अंग्रेजी में दिनों के नाम भी स्पेलिंग सहित फटाफट बता लेती हैं। खुशबू को गणित भी काफी पसंद है। वहीं पांचवीं के अमन भी अनुवाद भी कर लेते हैं।



पहली कक्षा में पढ़ने वाले श्रेयांश हिंदी के साथ अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों को बखूबी समझते हैं। वह गिनती को हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी पढ़ लेते हैं।

खेलों पर भी दिया जाता है समान महत्व



विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षक बच्चों में खेलों के प्रति भी रूझान बढ़ाने की कोशिश करते हैं। विद्यालय के छोटे से प्रांगण में मिड डे मील के बाद बच्चे रस्सी कूद, बैडमिंटन और फुटबॉल खेलते हैं। खेलों के लिए जरूरी सामान मसलन- बैडमिंटन, फुटबॉल और वॉलीबाल विद्यालय में उपलब्ध है।





विद्यालय के संचालन के लिए बनाए गए हैं संघ

स्कूल के बच्चों की माताओं का एक समूह बनाया गया है, जिसे 'मां समूह' नाम दिया गया है। यह समूह मिड-डे मील की शुद्धता और स्वच्छता की जांच करता है। इसी तरह प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर एक शिक्षक-अभिभावक संघ भी बनाया गया है। यह संघ हर महीने 'पैरंट्स-टीचर मीटिंग' भी करता है,जिसमें अभिभावकों के शिकायतों और सुझावों को स्थान दिया जाता है।



इसके अलावा विद्यालय प्रबंध समिति और ग्राम शिक्षा समिति भी है, जिसमें शिक्षक, प्रधानाचार्य सहित अभिभावक, ग्रामप्रधान और जिले के कुछ अधिकारी होते हैं। समितियों की बैठक के लिए आस-पास के गांवों में डुग्गी-मुनादी भी करवाई जाती है, ताकि बैठक की सूचना अभिभावकों तक पहुंच सके।




(सभी फोटो- अनुज त्रिपाठी/ गाँव कनेक्शन)


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