एक स्कूल ऐसा, जहां खेल-खेल में होती है पढ़ाई

Divendra SinghDivendra Singh   14 Aug 2018 7:13 AM GMT

चरथावल (मुजफ्फरनगर)। चौथी कक्षा में पढ़ने वाला आयुष सुबह से कुछ ज्यादा खुश नजर आ रहा है, खुश भी क्यों न हो आज उसे बैग और किताबें नहीं ले जानी हैं। आज सिर्फ वो अपना पसंदीदा खेल खेलेगा और उसके साथ ही पढ़ाई करेगा।

आयुष कुमार मुजफ्फरनगर ज़िले के चरथावल ब्लॉक के सलेमपुर गाँव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता है, जहां के प्रधानाध्यापक ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नए-नए तरीके खोजे हैं। यहां हर शनिवार को बच्चों को तरह-तरह के खेल और शिक्षाप्रद फिल्मों के जरिए पढ़ाया जाता है।

प्रधानाध्यापक विष्णु दत्त त्यागी बताते हैं, 'दो साल पहले जब मेरी यहां नियुक्ति हुई तो करीब बीस बच्चों का ही नामांकन था, जिसमें से सब रोज आते भी नहीं थे। लेकिन मैं अकेले कुछ नहीं कर सकता था। ऐसे में अपने साथ लोगों को जोड़ने की सोची। मैंने ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से बात की। तब पता चला यहां पर सबसे बड़ी परेशानी शौचालय न होना था। लड़कियों को खुले में जाना पड़ता था। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के सहयोग से आज यहां पर लड़के लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं।


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बात सिर्फ इतने में ही बनने वाली नहीं थी। चुनौतियां और भी थीं। शहर से नजदीक होने की वजह से ज्यादातर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही भेजते थे। तब विष्णु दत्त ने कुछ ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों के सहयोग से घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाना शुरू किया। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ी आज यहां पर 182 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। जिले के ज्यादातर जिलों में यूनिसेफ व एक्शन ऐड के सहयोग से शिक्षा के स्तर में सुधार आ रहा है। अब अध्यापकों के साथ अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारियां समझ रहे हैं।

'शनिवार की क्लास कोई नहीं छोड़ता'

"हर शनिवार को बच्चों के लिए स्पेशल क्लासेज लगाईं जाती हैं, जिसमें वो खो खो, बैडमिंटन, कबड्डी, क्रिकेट जैसे खेल तो खेलते ही हैं, साथ ही हर दिन विद्यालय के स्मार्ट क्लास में ऐसी फिल्में भी दिखाईं जाती हैं, जिनसे बच्चों को सीखने को मिले। सबसे खास बात हमारे यहां हमेशा बच्चों की उपस्थिति 70 से 80 प्रतिशत रहती है।"
विष्णु दत्त त्यागी, प्रधानाध्यापक

एक अलग कोशिश है...

चौथी कक्षा में पढ़ने वाले आयुष के पिता संदीप कुमार विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी हैं, बताते हैं, "पहले जब मास्टर जी ने स्मार्ट क्लास और खेल शुरू किए तो थोड़ा अजीब लगा। लेकिन जब स्कूल जाकर देखा तो बिल्कुल अलग कोशिश लगी। जो बच्चे किताबों से भागते थे वह भी फिल्मों और खेलों के जरिए पढ़ाई कर रहे थे।"

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कुछ और बड़े बदलाव...

अध्यापकों के साथ बच्चों की बायोमीट्रिक हाजिरी

प्रदेश सरकार ने सभी स्कूलों में अध्यापकों की बायोमीट्रिक हाजिरी लगाने के आदेश दिए थे। लेकिन इस प्राथमिक विद्यालय में अध्यापकों के साथ ही बच्चों की उपस्थिति भी बायोमीट्रिक तरीके से दर्ज होती है। प्रधानाध्यापक विष्णु दत्त त्यागी बताते हैं, "ज्यादातर स्कूलों में अध्यापकों के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम लगाए गए हैं, कई स्कूलों में तो अभी तक शुरुआत भी नहीं हो पाई है। हमने अपने स्कूल में बच्चों के लिए भी बायोमीट्रिक अटेंडेंस की शुरुआत की है। बच्चों को यह सिस्टम खूब पसंद आ रहा है।"

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बाल संसद में बच्चे ही बनते हैं अध्यक्ष व उपाध्यक्ष

विद्यालय में किसी भी बच्चे को कोई समस्या हो तो खुद ही सुलझा लेते हैं। इसके लिए स्कूल में बाल संसद भी लगती है। विद्यालय के सारे बच्चे वोट के जरिए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुनते हैं, उसके बाद वोटिंग से हर क्लास में मॉनिटर चुने जाते हैं। बाल संसद की उम्मीदवार पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली मेघा कहती हैं, "हमारे यहां बहुत अच्छी पढ़ाई होती है, मेरी क्लास के साथ ही दूसरी क्लास के लोग भी एक दूसरे का साथ देते हैं।"

मुजफ्फरनगर जिले का हाल

ग्रामीण क्षेत्र

858 प्राथमिक विद्यालय

355 पूर्व माध्यमिक विद्यालय

शहरी क्षेत्र

42 प्राथमिक विद्यालय

05 पूर्व माध्यमिक विद्यालय

ग्राम प्रधान खुद करते हैं मॉनिटरिंग

ग्राम प्रधान ऋषिपाल बताते हैं, "गाँव में स्कूल अच्छा चल रहा है, हम समय-समय पर आकर देखते कि मास्टर जी क्या पढ़ा रह हैं, इसके बारे में हम बच्चों से भी पूछते रहते हैं। स्कूल तो बहुत पुराना है, मैं भी यही पढ़ा हूं इसलिए स्कूल से ज्यादा जुड़ाव है। जब मैं प्रधान बना तो यहां पर एक मैडम थीं लेकिन बच्चे बहुत कम थे, मैं हमेशा स्कूल में आता रहता और हर बच्चे से पढ़ाई के बारे में पूछता। लेकिन पिछले दो साल से यहां बदलाव दिखने लगा है।"

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