महोबा के जैतपुर में लोगों का बदल रहा शिक्षा के प्रति नज़रिया

Jigyasa MishraJigyasa Mishra   29 Sep 2018 9:55 AM GMT

महोबा के जैतपुर में लोगों का बदल रहा शिक्षा के प्रति नज़रिया

जैतपुर (महोबा)। "सोनम अभी तीसरी कक्षा में है लेकिन स्कूल से घर पहुंचते ही वह विद्यालय से मिला गृह-कार्य करने में जुट जाती है, ऐसा लगता है जैसे हाई-स्कूल परीक्षा की तैयारी कर रही हो", विद्यालय प्रबंधन समिति की उपाध्यक्ष भारती देवी यह बताते हुए आत्मविश्वास से भरी हुई नजर आती हैं।

सोनम यादव जैतपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रजौनी में पढ़ती हैं। जैतपुर ब्लॉक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 230 किलोमीटर दूर, महोबा जिले में आता है। बच्चों में पढ़ने का यह शौक विद्यालय के प्रधानाचार्य, धर्मेंद्र कुमार गौर की देन है। धर्मेंद्र चाहते हैं कि उनके प्राथमिक विद्यालय से पास होकर हर बच्चे को नवोदय विद्यालय में दाखिला मिले। प्राथमिक विद्यालय रजौनी बालिका बहु-संख्यक विद्यालय है और शिक्षकों व प्रबंधन समिति के सहयोग से यहां की बालिकाएं हमेशा अव्वल आती हैं।

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राम अवतार की बेटी शिवानी विद्यालय की चौथी कक्षा में पढ़ती हैं और वह चाहते हैं कि अच्छे नंबर लाकर शिवानी अपना भविष्य बनाए। वह बताते हैं, "शिवानी पढ़ाई में बहुत अच्छी है। हमें स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों पर पूरा भरोसा है कि जिस तरह येलोग बच्चों पर ध्यान देते हैं। उनकी मेहनत देखकर लगता है कि शिवानी के अच्छे नंबर आएंगे और आगे चलकर उसका दाखिला भी अच्छे कॉलेज में होगा।"

प्राथमिक विद्यालय रजौनी से साल 2017 में साक्षी और 2016 में आकांक्षा राजपूत ने नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास की था। विद्यालय की शिक्षामित्र पुष्कल शर्मा बताती हैं, "हम लोग प्रयास करते हैं कि सभी बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें, खासतौर पर बालिकाएं। यदि एक बालिका पढ़ जाएगी तो आगे उसका पूरा परिवार शिक्षा के महत्त्व को समझेगा। हमारे विद्यालय के प्रबंधन समिति के सदस्य भी अब यह बात समझते हैं और पूरी कोशिश करते हैं कि गाँव भर में यह सन्देश पहुंचे।"

प्रबंधन समिति अध्यक्ष, जयपाल सिंह राजपूत और उपाध्यक्ष भारती देवी इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि कोई भी बच्चा अनुपस्थित न हो। जयपाल सिंह बच्चों के पिता से बात कर के उन्हें समझाते हैं और भारती देवी माताओं से बात करती हैं कि कैसे लड़कियों के साथ लड़कों को भी घर के कामों में हाथ बंटाना चाहिए और स्कूल की तरह घर पर भी दोनों को पढ़ाई का समान अधिकार मिलना चाहिए।

बच्चे भी समझते हैं जिम्मेदारी

मनोज कुमार, सहायक अध्यापक बताते हैं, "कक्षा चार का शैलेन्द्र और पांच की शिवानी राजपूत और शिखा राजपूत अपनी कक्षाओं में अव्वल आते हैं और उनके जो सहपाठी पढ़ाई में कमज़ोर हैं उन्हें पढ़ने में मदद भी करते हैं। बच्चे इस उम्र में अपनी जि़म्मेदारी समझें यह हमारे लिए गर्व की बात है।"

मैं प्रधान बन सकती हूं तो बेटियां अफसर क्यों नहीं

मन्नी देवी, ग्राम प्रधान बताती हैं, "अगर गाँव की महिला प्रधान बन सकती है तो गाँव की सभी लड़कियां अफसर भी बन सकती हैं। हमारे शिक्षक और अभिभावक सब यही चाहते हैं कि बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और अपना भविष्य संवारें।"

नजरिया बदल रहा है

धर्मेंद्र कुमार गौर, प्रधानाध्यापक बताते हैं, "शिक्षा के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। गाँव वाले जागरूक हुए हैं। बच्चों को अच्छी तालीम मिले इसके लिए वे अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हम बच्चों को बताते रहते हैं कि यदि वो मन लगाकर पढ़ेंगे तो आगे अच्छे स्कूल में एडमिशन पाएंगे। हमारे विद्यालय के बच्चे पिछले तीन साल से नवोदय में दाखिला पा रहे हैं और यह खुशी दोगुनी हो जाती है क्योंकि तीनों बालिकाएं हैं।"




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