पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी आगे हैं ललितपुर जिले की ये लड़कियां

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने से यहां पर कोई अपनी लड़कियों को पढ़ने नहीं भेजना चाहता था, लेकिन अध्यापकों व विद्यालय प्रबंधन समिति के प्रयासों से यहां पर अब लड़कियों संख्या बढ़ी है।

Divendra SinghDivendra Singh   17 July 2018 12:29 PM GMT

महरौनी (ललितपुर)। बारह साल की रोशनी हर दिन स्कूल समय से पहले पहुंच जाती हैं, जबकि घर वाले ये भी कहते हैं कि इतनी जल्दी क्यों जा रही हो, ये सिर्फ रोशनी ही उनके स्कूल की सारी लड़कियां समय से पहले स्कूल पहुंच जाती है, क्योंकि सुबह योग की क्लास जो करनी होती है।

रोशनी ललितपुर ज़िला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर महरौनी ब्लॉक की कुम्हेड़ी ग्राम पंचायत के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में आठवीं कक्षा में पढ़ती हैं। रोशनी ही नहीं इस विद्यालय की ज्यादातर छात्राएं पढ़ाई में अव्वल हैं।


पूर्व माध्यमिक विद्यालय के अनुदेशक शिक्षक शिव सहाय श्रीवास्तव बताते हैं, "यहां के ज्यादातर लोग बाहर मजदूरी करते हैं, कई लोग तो अपनी बेटियों को स्कूल भी नहीं भेजना चाहते, लेकिन फिर भी हम लोगों के प्रयास से हमेशा 200 से ज्यादा बच्चियों का नामांकन रहता है।"

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इस कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई के साथ ही लड़कियां खेल-कूद में भी आगे रहती हैं, बारह साल की रोशनी को देश-दुनिया के नक्शे का एक-एक देश याद है, यही नहीं मिनटों में वो देश का नक्शा भी बना देती हैं। भूगोल में छात्राओं का रुझान यहां के पूर्व प्रधानाध्यापक शरीफ अहमद के प्रयासों से हुआ है।

कुमहेड़ी ललितपुर ज़िले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है, मध्यप्रदेश से सटा हुआ उत्तर प्रदेश का ये आखिरी ज़िला वैसे तो कई मायनों में दूसरे जिलों से अलग है, ऐसे में यहां की शिक्षा व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जाता है। ललितपुर ज़िले में 1024 प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण और 25 शहरी क्षेत्रों में हैं, साथ ही ज़िले में 484 पूर्व माध्यमिक ग्रामीण व 9 शहरी क्षेत्रों में हैं।


विद्यालय प्रबंधन समिति का रहता है पूरा सहयोग

बच्चों के यूनिफार्म से लेकर स्कूल में कोई भी काम हो, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य पूरा सहयोग करते हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति के कार्यकारिणी सदस्य रतिभान सिंह कुशवाहा बताते हैं, "हम सदस्य विद्यालय का पूरा ध्यान रखते हैं, हमारे बच्चे पढ़ते हैं तो हम और ध्यान देते हैं, मास्टर लोग दूर से आते हैं तो कभी कभी आने में देर हो जाती है हम हर दिन स्कूल खुलने से लेकर मिड डे मील में क्या बनना है देखते हैं। जैसे अभी यूनिफार्म देने हैं तो हम रेडीमेड खरीदकर नहीं देते, अभी कई दुकानों से कपड़ा लेकर यहां के टीचरों को दिखाया है अब जो फाइनल हो जाएगा वही सिला जाएगा। इसलिए हम चीज देख सुनकर ही लेते हैं।

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पढ़ाई के साथ ही हर दिन चलती है योग की क्लास


विद्यालय के शारीरिक शिक्षा के अनुदेशक जितेंद्र कुमार सेन हर दिन बच्चियों को योग भी कराते हैं। जितेंद्र कुमार सेन, "हमारी यही कोशिश रहती है की बच्चियों को पढ़ाई के साथ ही दूसरी एक्टिविटी भी कराएं, यहां की एक एक बच्ची को हर एक योग रट गया है, किस योग में क्या करना है सब बता देंगी।"

घर-घर से बुलाए जाते हैं बच्चे

यहां के ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं, इसलिए बच्चों को घर पर ही रहना पड़ता है, ऐसे में एसएमसी सदस्यों ने पहल की और अब हर एक बच्ची स्कूल आती है। विद्यालय की इंचार्ज सुधा रानी बताती हैं, "लोग बड़ी बच्चियों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं, लेकिन अब सुधार हुआ है, जब एसएमसी का सहयोग मिलना शुरू हुआ है। अब गांव के लोग हैं तो ज्यादा ध्यान दे पाते हैं।"

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यहां के पूर्व प्रधानाध्यापक ने बदली थी इस विद्यालय की तस्वीर

यहां के पूर्व प्रधानाध्यापक शरीफ अहमद के प्रयासों से इस स्कूल की तस्वीर बदली है। शिव सहाय श्रीवास्तव बताते हैं, "यहाँ पर जो पहले इंचार्ज थे उन्होंने कभी सरकारी बजट का इंतज़ार नहीं किया, जो भी करना होता वो अपने वेतन से ही कर देते, पूरे स्कूल में पेड़ पौधे, समर्सिबल, और स्कूल का गेट सब उन्होंने ही बनाया था, हमारी भी यही कोशिश रहती है जो अच्छी शुरुआत की हम उसे आगे ले जाएं।"

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