निजी स्कूल छोड़ ग्रामीणों का भा रहा ये सरकारी स्कूल

Divendra SinghDivendra Singh   12 Jun 2018 10:12 AM GMT

निजी स्कूल छोड़ ग्रामीणों का भा रहा ये सरकारी स्कूल

पिछले कुछ वर्षों में गाँवों से शहरों को लोग इसलिए पलायन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपने बच्चों को शहर के कान्वेंट स्कूल में पढ़ाना होता है, लेकिन कई सरकारी विद्यालय ऐसे भी हैं, जहां पर अब कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूलों से कटाकर यहां लिखा दिया है।

रायबरेली जिले के सलोन ब्लॉक के आदर्श प्राथमिक विद्यालय में आज के कुछ साल पहले तक नाममात्र के बच्चे थे, जिन बच्चों का नाम भी लिखा था वो स्कूल नहीं आना चाहते थे, लेकिन विद्यालय प्रबंधन समिति, ग्राम प्रधान व अध्यापकों के प्रयास से आज विद्यालय के तस्वीर बदल गई है। यहां पर बच्चों के बैठने के लिए हर कमरे में बेंच-डेस्क, हर कमरे में पंखे, पीने के लिए साफ पानी जैसी सारी सुविधाएं हैं।

विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य रामचंदर बताते हैं, "गाँव के बच्चों को क्या चाहिए, बैठने के लिए बढ़िया कुर्सी मेज मिले, अच्छी पढ़ाई मिले यही सबको चाहिए, ये सब यहां पर मिलता है तो कोई अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूल में क्यों लिखाएगा।"

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उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अनुसार प्रदेश में 1,13,500 प्राथमिक व 45,700 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, अगर इनमें भी ऐसी सुविधा हो जाये तो कोई भी बच्चा निजी विद्यालयों में न पढ़ने जाएगा।


प्राथमिक विद्यालय के इंचार्ज श्याम सुंदर पांडेय कहते हैं, "2005 में जब यहां पर नियुक्ति हुई तो स्कूल में नाम मात्र के बच्चे थे, कहने को तो अंबेडकर ग्राम था लेकिन कोई अपने बच्चों को स्कूल में नहीं भेजना चाहता था, न ही स्कूल में चारदीवारी थी न और न ही पीने के लिए साफ पानी मिलता था।"

लेकिन आज स्कूल में समर्मसिबल लग गया है, पूरे स्कूल में टाइल्स लग गए हैं, सफाईकर्मी हर दिन स्कूल साफ करने आता है। "आज गाँव के कई लोगों ने अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूल से हटाकर हमारे स्कूल में लिखा दिया, विद्यालय में लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बने हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति और ग्राम प्रधान के सहयोग के बिना कुछ नहीं हो पाता, "श्याम सुंदर पांडेय आगे कहते हैं।

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यूनीसेफ एक अन्तराष्ट्रीय संस्था है जो देश के 190 से ज्यादा देशों में बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर काम कर रही है। यूनीसेफ द्वारा यूपी के छह जिले बलरामपुर, श्रावस्ती, मिर्जापुर, सोनभद्र, बदायूं, और लखनऊ में दो साल पहले विद्यालय प्रबंधन समिति पर काम हुआ है। जिसमें इन छह जिलों के हर न्याय पंचायत के दो सरकारी स्कूलों सहित 1400 विद्यालयों में काम किया गया।

ग्राम प्रधान भी करते हैं पूरी मदद

हर महीने के आख़िरी सप्ताह में इस समिति की बैठक की जाती है, प्रबंधन समिति के सदस्य और अध्यक्ष मीटिंग में स्कूल के जरूरत की वस्तुओं के बारे में बताते हैं, वो सारी लिस्ट फिर ग्राम प्रधान व अध्यापकों के सहयोग से सारा सामान आ जाता है।

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विद्यालय प्रबंधन समिति व अध्यापकों के सहयोग से इस स्कूल में हैं कई सुविधाएं

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बच्चों को सरकारी स्कूल में ही बेहतर शिक्षा के साथ सभी तरह की सुविधाएं मिल सके इसके लिए विद्यालय प्रबंधन समिति का महत्वपूर्ण योगदान है। इस स्कूल में प्रधानाध्यापक की इच्छाशक्ति और समिति के सदस्यों के सहयोग से यहाँ जरूरत की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। हैंडवाश के लिए पांच टोटियां, रिचार्ज वाटर सिस्टम, कूड़ादान, खेल किट जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं। जल्द ही स्कूल में वाटर कूलर, आरओ, इंवर्टर लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

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