इस स्कूल में चलती है स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी में है बच्चों के लिए हजारों किताबों

इस सरकारी स्कूल में लाइब्रेरी बनायी गई है, जिसमें अध्यापकों और बच्चों के लिए हजारों किताबें रखी हैं। हर दिन बच्चों के लिए लाइब्रेरी के लिए अलग क्लास लगती है

Divendra SinghDivendra Singh   28 Jan 2019 9:44 AM GMT

कछौना (हरदोई)। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले सुजीत गृह विभाग के मंत्री हैं उनका काम दूसरी समितियों क्या कर रहीं उनके कामों की देखरेख और सहयोग करना है। सुजीत ही नहीं यहां स्कूल की साफ-सफाई से लेकर कौन बच्चा स्कूल आ रहा है कौन नहीं आ रहा, सब जिम्मेदारियां बच्चों ने आपस में ही बांट रखी है।


हरदोई जिले के कछौना पतसेनी ब्लॉक के हथौड़ा ग्राम पंचायत का प्राथमिक विद्यालय अपने साफ-सुथरे परिसर और पढ़ाई के तौर तरीकों के लिए पूरे जिले में मशहूर है। दस वर्षों से प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार मिश्रा बताते हैं, "दस वर्षों से इस विद्यालय में हूं मैंने स्कूल को बदलते हुए देखा है, आज जो स्कूल है उसमें सालों की मेहनत लगी है, इसमें ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने भी पूरा सहयोग मिला है।"

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वो आगे कहते हैं, "मेरे यहां बाल संसद गठित है, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और हर विभाग है और सभी का कार्य बंटा है, जिसे बच्चे बखूबी निभाते हैं। और सभी बच्चे अपने अपने विभाग का काम समझते हैं, जिससे खेल से लेकर पढ़ाई में हमारे बच्चे आगे हैं। जैसे की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री सभी बच्चों को खाना खाने से पहले लाइन से हाथ धुलाने ले जाते हैं और सभी को लाइन से बैठाते हैं।"

स्कूल की है खुद की लाइब्रेरी, जिसमें हैं हजारों किताबों

प्राथमिक विद्यालय में एचसीएल फाउंडेशन की तरफ से लाइब्रेरी भी बनायी गई है, जिसमें अध्यापकों और बच्चों के लिए हजारों किताबें रखी हैं। हर दिन बच्चों के लिए लाइब्रेरी के लिए अलग क्लास लगती है, जिसमें बच्चे लाइन से जाते हैं और अपनी-अपनी जगह पर बैठकर पढ़ते हैं।

"हम साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं हर दिन सुबह बच्चों को प्रेयर में खड़ा करते हैं और कहते हैं कि देखों ये बच्चा आज नहा कर नहीं आया है। जो बच्चे नहाकर नहीं आता है उनके लिए भी व्यवस्था कर रखी है, उन्हें स्कूल में ही नहला देते हैं, जिससे बच्चों दूसरे दिन से नहाकर आते हैं।"
सौरभ कुमार मिश्रा, प्रधानाध्यापक


बच्चों के लिए है स्मार्ट क्लास

यहां पर बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास भी बनायी गई है, जिसमें प्रोजेक्टर के जरिए पढ़ाई होती है। प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार मिश्रा बताते हैं, "वैसे तो पहले हम किताबों और ब्लैक बोर्ड से पढ़ाते थे, लेकिन अब प्रोजेक्टेर के जरिए पढ़ाई होने से सब सजीव दिखता है, जिससे बच्चे अच्छे से पढ़ते और समझते हैं। बच्चे अपने घर में बताते हैं जिससे दूसरे अभिभावक भी ये सब देखकर अपने बच्चों का एडमिशन यहां कराते हैं।"

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हर दिन आने वाले बच्चों को किया जाता है पुरस्कृत

हर सुबह पहली घंटी देर तक बजाते हैं, जिससे गाँव वाले सुन ले कि विद्यालय खुल गया है, वो अपने बच्चों को तैयार कर स्कूल भेज देते हैं। जो बच्चे हर दिन समय से स्कूल आते हैं उन्हें हम पुरस्कृत भी करते हैं कि देखो ये बच्चा हर दिन जल्दी स्कूल आता है।

एसएमसी सदस्य रखते हैं स्कूल का ख्याल


विद्यालय परिसर में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रोज स्कूल में सफाई होती है। स्कूल की सफाई की जिम्मेदारी एसएमसी सदस्यों ने ले रखी है। पूरे परिसर को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है। बच्चों को प्रेरित करने के लिए देश के महान लोगों की पेंटिंग भी बनाई गई है। एसएमसी सदस्य रमेश बताते हैं, "'इस स्कूल की वजह से हमारे गाँव की पहचान पूरे प्रदेश में होने लगी है। यह नाम और पहचान हमेशा बनी रहे इसके लिए हम लोग भी पूरे मन से जिम्मेदारी निभाते हैं और स्कूल को साफ सुथरा रखते हैं।"

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दाखिले के लिए लगती है लाइन

प्रधानाध्यापक बताते हैं, "लगातार बढ़ती बच्चों की संख्या की वजह से स्कूल का परिसर छोटा पड़ने लगा है। आज हमारे विद्यालय में इतने बच्चे हो गए हैं कि उन्हें संभाल पाना मुश्किल होता है। अब हम नए बच्चों का प्रवेश लेने से मना कर देते हैं, बावजूद इसके कई अभिभावक जगह जगह सिफारिश कर यहां अपने बच्चों का नाम लिखवाना चाहते है।"

ग्राम प्रधान ने कराया चारदीवारी का निर्माण

कुछ साल पहले तक गाँव के कुछ लोग स्कूल से राशन चुरा ले जाते और स्कूल को भी गंदा कर देते, लेकिन अब ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के सहयोग स्कूल में ऊंची चारदीवारी का निर्माण हो गया है, जिससे स्कूल भी सुरक्षित हो गया है।

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