इस सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के साथ चलती है अभिनय की क्लास

Divendra SinghDivendra Singh   20 July 2018 7:30 AM GMT

इस सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के साथ चलती है अभिनय की क्लास

महरौनी (ललितपुर)। ये छोटे-छोटे बच्चे अपने अभिनय से किसी को भी रुला सकते हैं, यहां के बच्चे जिले व मंडलीय ही नहीं प्रदेश स्तर पर भी खेल प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं, किसी सरकारी विद्यालय के बच्चों में ऐसे हुनर कम ही देखने को मिलते हैं।

ललितपुर ज़िले के महरौनी ब्लॉक के नैनवारा पूर्व माध्यमिक विद्यालय वैसे तो दूसरे विद्यालयों की तरह है, लेकिन एक बात है जो इसे दूसरों से अलग बनाती है, यहां हर दिन पढ़ाई के साथ ही एक्टिंग की भी क्लास लगती है, ये बच्चे पढ़ाई में तो अच्छे हैं ही साथ ही एक्टिंग में भी किसी से कम नहीं।

इसका श्रेय जाता है यहां के प्रधानाध्यापक हृदेश गोस्वामी को, हृदेश गोस्वामी बताते हैं, "साल 2013 में जब मेरी यहां पर सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति हुई तो मुझे लगा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ दूसरे हुनर को भी तो पहचान मिलनी चाहिए। शुरू में तो काफी परेशानी हुई, लेकिन सबसे के साथ से हम आज यहां तक पहुंच गए हैं।"

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बस यहीं से इन बच्चों में हुनर को निखारने की शुरुआत हुई, कई बच्चे तो ज़िला स्तर पर भी भाग ले चुके हैं। हृदेश बताते हैं, "यहां पर पहले मेरे पापा ही इंचार्ज थे उनके रिटायर होने के बाद मेरे प्रमोशन के बाद मैं इंचार्ज के रूप में नियुक्त हुआ, बस वहीं से शुरुआत हुई।"

मध्यप्रदेश से सटा हुआ उत्तर प्रदेश का ये आखिरी ज़िला लि वैसे तो कई मायनों में दूसरे जिलों से अलग है, ऐसे में यहां की शिक्षा व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जाता है। ललितपुर ज़िले में 1024 प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण और 25 शहरी क्षेत्रों में हैं, साथ ही ज़िले में 484 पूर्व माध्यमिक ग्रामीण व 9 शहरी क्षेत्रों में हैं।

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यहां के बच्चों ने ज़िले से लेकर राज्य स्तर खेल में भी लिया है भाग

इस पूर्व माध्यमिक विद्यालय के कई बच्चों ने ज़िले, मंडल और प्रदेश स्तर की खेल प्रतियोगिता में भी भाग लिया है और हमेशा प्रथम स्थान भी उन्हें मिला। यहां पर छुट्टी से पहले हर दिन बच्चों के लिए स्पोर्ट्स क्लासेज भी चलती हैं।

हर महीने बच्चों का मनाया जाता है बर्थडे


ललितपुर प्रदेश के उन पिछड़े ज़िलों में आता है, जहां के लोग दूसरे शहरों में मजदूरी करते हैं, ऐसे में बच्चों का जन्मदिन मनाना तो दूर लोगों का जन्मदिन का नहीं पता होता है। हृदेश बताते हैं, "हर महीने बच्चों का जन्मदिन एक साथ मनाया जाता है, बच्चे तो खुश रहते ही हैं, उनके अभिभावक भी खुश रहते हैं।"

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कमजोर बच्चों के लिए चलती हैं एक्स्ट्रा क्लास


जो बच्चा छठवीं में एडमिशन लेता है, कई बार पढ़ने में बहुत कमजोर रहते हैं, ऐसे में उन बच्चों के लिए एक्स्ट्रा क्लास भी लगाई जाती है।"अब अप्रेल से ही सेशन शुरू हो जाते हैं, इसलिए पढ़ने में कमजोर बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टी में भी क्लास लगाई जाती है, ताकि जब जुलाई में विद्यालय शुरू हो तो वो बच्चे भी आगे बढ़ पाएं, एक अध्यापक की जिम्मेदारी होती है कि कुछ घंटे बिताकर न चले जाएं, उन्होंने विद्यालय में उन घंटों में क्या दिया ये जरूरी होता है, "हृदेश ने बताया।

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