प्रधानाध्यापक व जन सहयोग से आदिवासियों के बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा

यहां के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी ने फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से मदद मांगनी शुरू की लोग अपने पुरानी किताबें, खिलौने जैसे बच्चों की काम की चीजें विद्यालय को दे सकते हैं। अनंत की मुहिम रंग ला रही है, लोग स्कूल की मदद को आगे आ रहे हैं।

प्रधानाध्यापक व जन सहयोग से आदिवासियों के बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा

ललितपुर। सरकारी विद्यालयों की स्थिति के बारे में जहां दूसरे अध्यापक बजट का रोना रोते हैं, वहीं पर सहरिया जनजाति बाहुल्य इस गाँव के सरकारी विद्यालय के अध्यापक ने जन सहयोग से इसकी तस्वीर बदल दी है।

ललितपुर ज़िले के मसौरा कलां गाँव के नई बस्ती देहरे बाबा में बना प्राथमिक विद्यालय यह ऐसा सरकारी विद्यालय है, जहां पर दिन की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना व राष्ट्रगान से की जाती है। जहां पर बच्चे कुर्सी व मेज पर बैठकर पढ़ते हैं। यहां पर अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालय की तरह प्ले सेंटर रूम भी बना हुआ है।


प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी बताते हैं, "शुरू में यहां भी अव्यस्थाएं थीं, यहां गांव में ज्यादातर सहरिया आदिवासी जनजाति परिवार हैं, जो बच्चों को स्कूल तो भेज देते हैं, लेकिन उसके बाद कोई ध्यान नहीं देते, जब मैंने शुरुआत की तो सबने कहा कि सरकारी स्कूल तो ऐसे ही चलते हैं, क्यों अपना समय बर्बाद कर रहे हो।" लेकिन दूसरों की बातों का अनंत पर कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से मदद मांगनी शुरू की लोग अपने पुरानी किताबें, खिलौने जैसे बच्चों की काम की चीजें विद्यालय को दे सकते हैं। अनंत की मुहिम रंग ला रही है, लोग स्कूल की मदद को आगे आ रहे हैं।

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ललितपुर ज़िले में 1024 प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण और 25 शहरी क्षेत्रों में हैं, साथ ही ज़िले में 484 पूर्व माध्यमिक ग्रामीण व 9 शहरी क्षेत्रों में हैं। जिलाधिकारी व दूसरे अधिकारियों के सहयोग से यहां पर पिछले कुछ वर्षों में बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार आया है। साथ यूनिसेफ व एक्शन ऐड ने प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विद्यालय प्रबंधन समितियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे अभिभावक अपनी जिम्मेदारियों को समझ रहे हैं।

बच्चों के लिए है पुस्तकालय


पहली कक्षा में पढ़ने वाले रवि अपने साथ के बच्चों को बिना झिझके गिनती और वर्णमाला पढ़ाते हैं। विद्यालय में पुस्तकालय भी है जहां पर बच्चों के लिए पूरी किताब को चित्र के रूप में बनाया है, ताकि बच्चे आसानी से समझ सकें। लोग यहां पुरानी किताबें देते रहते हैं, जिससे बच्चों का पढ़ने की तरफ रुझान भी बढ़ता है।

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प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी ने बताते हैं, "बच्चों को चित्र देखकर जल्दी व आसानी से समझ आता है। सभी विषयों की पढ़ाई के लिए अलग-अलग चित्र बनाकर किताबें बनाईं गईं हैं, जिससे वो समझ सके। इसके साथ ही बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कक्षा वार सभी बच्चों का मूल्यांकन किया जाता है, अव्वल बच्चों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाता है।

विद्यालय में लगे हैं सैकड़ों पौधे

वहीं विद्यालय में चारदीवारी भी नहीं है इसके बावजूद विद्यालय हरे-भरे पेड़-पौधे का सुरक्षित बगीचा बना हुआ है। इसमें तरह-तरह के फूलों के साथ फलों में आम, अमरुद के साथ अंगूर के भी बेल लगी हुई हैं। यह सब यहां के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी व उनके स्टाफ ने सामुदायिक भागीदारी से करके दिखाया है।

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बच्चों के लिए लगाया है आरओ व वाटर कूलर

जनसहयोग से विद्यालय में लगा है आरओ और वाटर कूलर जहां दूसरे स्कूलों में बच्चों के लिए साफ पानी की व्यवस्था तक नहीं होती है, यहाँ पर लोगों के सहयोग से आरओ और वाटर कूलर तक कि सुविधा है, ताकि गर्मी में भी बच्चों को साफ औऱ ठंडा पानी मिल जाए।

विद्यालय की सुरक्षा के लिए रखा गया है चौकीदार

विद्यालय परिसर में लगे पेड़-पौधों व दूसरी सामान को कोई नुकसान न पहुंचाए इसके लिए अध्यापकों ने मिलकर एक चौकीदार भी रखा है। साथ ही गर्मियों में स्कूल में लगे पेड़-पौधे न सूख जाए इसके लिए पौधों में पुरानी ग्लूकोज बोतलों को लगाया गया है, जो ड्रिप इरिगेशन का काम करती हैं।

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