महिला शिक्षकों ने बदल दी स्कूल की सूरत

प्रधानाध्यापिका अर्चना गुप्ता के साथ मिलकर तीन महिला शिक्षामित्र और तीन सहायक शिक्षिकाएं स्कूल की सूरत बदलने में लगी हुई हैं। इसी का नतीजा है जो विद्यालय में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। विद्यालय में कुल 294 छात्रों का नामांकन है, जिसमें से 165 लड़कियां है और 129 लड़के हैं।

Jigyasa MishraJigyasa Mishra   5 Sep 2018 4:30 AM GMT

महिला शिक्षकों ने बदल दी स्कूल की सूरत

कबरई (महोबा): महोबा जिले के कबरई ब्लॉक में स्थित प्राथमिक विद्यालय बरा... एक ऐसा विद्यालय जिसकी पूरी कमान महिलाओं के हाथ है। प्रधानाध्यापिका अर्चना गुप्ता के साथ मिलकर तीन महिला शिक्षामित्र और तीन सहायक शिक्षिकाएं स्कूल की सूरत बदलने में लगी हुई हैं। इसी का नतीजा है जो विद्यालय में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। विद्यालय में कुल 294 छात्रों का नामांकन है, जिसमें से 165 लड़कियां है और 129 लड़के हैं।

ये हैं बच्चों को पढ़ाने के खास तरीके


1-गुड-टच, बैड-टच का सीख रहे पाठ

विद्यालय में गुणवत्ता लाने के लिए सभी शिक्षक एकजुट होकर अलग अलग सेक्टर में काम कर रही हैं। बच्चों के साथ बढ़ते अपराधों को नज़रअंदाज़ न करके ये शिक्षिकाएं हर हफ्ते सभी विद्यार्थियों को आसान कहानियों के माध्यम से गुड-टच और बैड-टच की जानकारी देती हैं। इस सेशन में छात्राओं के साथ छात्रों को भी सम्मिलित किया जाता है। सहायक शिक्षक, मीना पाण्डेय बताती हैं, आज के माहौल में बच्चे घर और बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में हमें बचपन से यह सीख देनी जरूरी है ताकि बच्चे अच्छाई और बुराई की समझ रख सकें।

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2-कविता-कहानी संरचना सीखना

महीने में एक दिन 'बाल सभा के दौरान बच्चों द्वारा लिखी गई कहानियां और कविताओं की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जिसमें जीतने वाले छात्रों की रचनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाती है। शिक्षा मित्र आशा सिंह बताती हैं, बच्चे हर रोज कुछ न कुछ लिखने की कोशिश करते हैं और हम लोगों से राय भी लेते हैं। कुछ बच्चे जिन्हें चित्र बनाने का शौक है वह लिखने की बजाय चित्रकारी करते हैं और फिर महीने के अंत में बड़ी उत्सुकता से अपनी रचनायें प्रदर्शित करते हैं। बच्चों को सभी आयामों में बढ़ता देखकर हम भी अपना बचपन याद कर लेते हैं।



3-आखिरी पीरियड यानी 'लाइब्रेरी टाइम '

विद्यालय प्रांगण में एक लाइब्रेरी भी बनी हुई है, जिसमें बच्चों के लिए 1500 से भी अधिक किताबें उपलब्ध हैं। शिक्षिकाओं की कोशिश होती है कि हर बच्चे में पढ़ने की रुचि बढ़ाएं। हर दिन आखिरी पीरियड में बच्चे लाइब्रेरी जाकर पढ़ते हैं और अपनी पसंद के अनुसार किताबें घर ले जाते हैं। शिक्षिकाओं ने हर कक्षा से एक विद्यार्थी की यह जिम्मेदारी सौंप दी है कि जमा हुई और पढ़ने के लिए ली गयी किताबों की सूची बनाएं।

4-सर्वाधिक उपस्थिति के लिए पुरस्कार

सहायक शिक्षक, अर्चना तिवारी बताती हैं, विद्यालय में सत्र के प्रारम्भ से ही बच्चों को बताना शुरू कर दिया जाता है कि जो बच्चा एक भी छुट्टी नहीं लेगा उसको इनाम दिया जाएगा। हम सुबह प्रार्थना के दौरान और कक्षाओं में अटेंडेंस लेते वक़्त बच्चों को बताते रहते हैं कि डेली स्कूल आने पर उनको पुरस्कार मिलेगा। यही वजह है कि विद्यालय में 294 बच्चों में से औसतन 230 हमेशा उपस्थित रहते हैं। सत्र के अंत में हम हर कक्षा से तीन विद्यार्थियों को इनाम भी देते हैं।

"हर महीने, प्रबंधन समिति की बैठक में हम अभिभावकों को बुलाते हैं ताकि अपने बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और गतिविधियों के बारे में वे जान पाएं। हम कोशिश करते हैं की अधिक से अधिक अभिभावक विद्यालय के कार्यक्रमों में भी सम्मिलित हों ताकी बच्चे भी पढ़ाई व अन्य गतिविधियां उत्साह पूर्वक करें," अर्चना गुप्ता, प्रधानाध्यापिका।

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