पांच साल में यूपी में एंबुलेंस में हुए 17000 सुरक्षित प्रसव

पांच साल में यूपी में एंबुलेंस में हुए 17000 सुरक्षित प्रसव108 व 102 एंबुलेंस सेवा ने आकस्मिक स्थिति में प्रसूताओं का प्रसव कराने का भी काम किया है

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की एंबुलेंस सेवाओँ पर अक्सर लेटलतीफी और नहीं पहुंचने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इसी बीच इन एंबुलेंस की बदौलत लाखों जिंदगियां भी बची हैं। 2012 से लेकर 2017 तक ही बात करें साढ़े नौ लाख मरीजों को अस्पताल पहुंचाया है तो 17 हजार से ज्यादा डिलीवरी इन एंबुलेंस में भी हुई हैं।

108 व 102 एंबुलेंस सेवा ने गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के साथ ही अकस्मिक स्थित में प्रसूताओं का प्रसव कराने का भी काम किया है, जिसमें एम्बुलेंस के अंदर सुरक्षित प्रसव कराने में शत-प्रतिशत कामयाबी मिली है, जिसके चलते अब तक किसी भी जच्चा-बच्चा की जान नहीं गई। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी अत्यंत गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

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वर्ष 2012 से 2017 तक 108 एम्बुलेंस द्वारा 8,64000 और 102 सेवा द्वारा 95,000 लोगों तक लाभ पहुंचाया गया। अब तक करीब 17,000 प्रसूताओं का सुरक्षित प्रसव एम्बुलेंस में ही कराया गया।
जितेंद्र वालिया, मुख्य परिचालन अधिकारी, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस सेवा के मुख्य परिचालन अधिकारी जितेंद्र वालिया बताते हैं, “वर्ष 2012 से 2017 तक 108 एम्बुलेंस द्वारा 8,64000 और 102 सेवा द्वारा 95,000 लोगों तक लाभ पहुंचाया गया। अब तक करीब 17,000 प्रसूताओं का सुरक्षित प्रसव एम्बुलेंस में ही कराया गया।’’ उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में हुए ट्रेन हादसों व अन्य आकस्मिक दुर्घटनाओं में भी 108 एम्बुलेंस ने रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर सैकड़ों जाने बचाने का काम किया है।

अभी हाल ही में शुरू हुई एएलएस एम्बुलेंस सेवा के द्वारा भी अब तक 425 लोगों की जान बचाई गई है। वालिया ने बताया कि 108 और 102 सेवा में फर्जी कॉल भी अक्सर आया करती हैं, जिसके चलते जरूरतमन्दों को त्वरित मदद पहुंचाने में अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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एंबुलेंस (फाइल फोट)

योगी के राज में पिज्जा से पहले आएगी एंबुलेंस

लखनऊ। 108 और 102 एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम को घटा कर 15 मिनट किया जाएगा। ये तय किया जाएगा कि इसी समय के भीतर एंबुलेंस जरूरतमंदों तक पहुंच जाए। एंबुलेंस मरीजों तक पहुंचने का समय पिज्जा पहुंचने के समय से अधिक न हो ये सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य से लेकर जिला स्तर तक रैपिड रिस्पांस टीम का गठन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग करेगा। किसी भी आपदा और महामारी के वक्त ये टीमें काम करेंगी।

भाजपा के लोक संकल्प पत्र को लेकर उत्तर प्रदेश में सेहत सुधारने की कोशिशों की शुरुआत हो गई है। राज्य भर में सभी 59 हजार ग्राम पंचायतों में नये सिरे से स्वास्थ्य उपकेंद्र सृजित करने की तैयारी है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं, मगर उनकी हालत खराब है। जिनको सुधारा जाएगा। जबकि करीब 12 हजार ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य उपकेंद्र है ही नहीं। वहां नये उपकेंद्र बनाए जाएंगे।

भाजपा के लोकसंकल्प पत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बड़े बड़े वादे किये गये हैं। जिसमें सबसे बड़ा वादा गांव गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए उपकेंद्रों को विकसित करने का है। जिसको लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय ने काम का आगाज भी कर दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा ने पिछले दिनों महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ पद्माकर सिंह और अन्य विभागीय अफसरों की बैठक ली। जिसमें भाजपा के लोकसंकल्प पत्र पर बिंदुवार चर्चा की गई। जिसके बाद में विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों की बैठक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने ली। जिसमें स्वास्थ्य विभाग ने लोक संकल्प पत्र को लेकर अपने रोडमैप का प्रस्ताव रखा। जिसमें कई अन्य सलाहें भी दी गईं

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