हार्ट अटैक : दिल न खुश होता है न दुखी, दिनचर्या बदलकर इस तरह करें बचाव

हार्ट अटैक : दिल न खुश होता है न दुखी, दिनचर्या बदलकर इस तरह करें बचावकेजीएमयू के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीएस नारायण।

"दिल का काम पूरे शरीर में खून पहुंचाना होता है। लोग कहते हैं दिल खुश हो गया दिल दुखी हो गया और दिल रोने लगा ये सब गलत है, ऐसा कभी दिल के साथ नहीं होता है। ये सारे काम दिमाग के होते हैं दिल के नहीं। दिल को खून पहुंचाने के लिए तीन नसें होती हैं, जिसे कोरोनरी कहते हैं। इन नसों में जब रुकावट या कोई बाधा आती है, जिसके कारण दिल का दौरा पड़ता है।" केजीएमयू में हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीएस नारायण बताते हैं।

बदलती दिनचर्या के चलते लोग तेजी से दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। आपकी दिनचर्या में बदलाव आपको दिल की बीमारियों से बचा सकता है। दिल से जुड़ी बीमारियों की वजह क्या है और कैसे इनसे बचा जा सकता है, इसे लेकर गांव कनेक्शन ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के हृदय रोग विभाग अध्यक्ष प्रो.वीएस नारायण से विशेष बात की।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दिल के दौरे से हर 33 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। भारत में हर साल करीब 20 लाख लोग दिल के दौरे से पीड़ित हैं, जिनमें ज़्यादातर युवा हैं। शहर में रहने वाले पुरुषों को, गाँव में रहने वाले पुरुषों से दिल के दौरे की संभावना तीन गुना अधिक होती है। वहीं, महिलाओं में मेनोपॉज के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है।

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ये हैं दिल के दौरे के कारण

दिल तक खून पहुंचाने वाली जो नसें होती हैं इनमें समय के साथ-साथ चिकनाई जमा होने लगती है और कई तरीके की रूकावटें आने लगती हैं। खून का दौरा इन कारणों से रुक जाता है और सीने में दर्द होने लगता है, जिसे हम लोग एंजाइना कहते हैं जब दौरान बिलकुल रुक जाता है उसमें थक्का जम जाता है। दिल के जिस हिस्से को खून नहीं मिल पाता है वो हिस्सा मर जाता है। उम्र के साथ-साथ नसें पतली हो जाती हैं। नसें पतली क्यों होती हैं और उसमें चिकनाई क्यों जमती है इसके तीन कारण होते हैं।

प्रो.नाराणय बताते हैं, “सबसे पहला कारण खाने-पीने में गड़बड़ी जैसे की चिकनाई का ज्यादा प्रयोग करते हैं। धूम्रपान, नशा और गुटखा चबाने की आदत। दूसरा कारण व्यायाम न करना बैठे-बैठे टीवी देखना, जिसके कारण पेट बढ़ता है और लोगों में जो मोटापा होता है वो दिल के दौरे का सीधा कारण बनता है।”

वो तीसरा कारण भारत में तनाव और मधुमेह बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। भारत में 30 प्रतिशत लोग मधुमेह और रक्तचाप की समस्या से पीढ़ित हैं और दिल के लिए ये बहुत खतरनाक है। ये सभी समस्याएं दिल में रुकावट पैदा करती हैं, रुकावट से एंजाइना होता है और इसके बाद दिल का दौरा पड़ जाता है।

दुनियाभर में होने वाली हर तीन में से एक मौत दिल संबंधी रोगों के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2015 में दिल के रोग के कारण 17.7 मिलियन लोग अपनी जान खो बैठे है। इन चौका देने वाले आंकड़ों में ये खुलासा हुआ है कि 7.4 मिलियन लोगों को कोरोनरी दिल के रोग के कारण मृत्यु हुई वही 6.7 मिलियन लोग स्ट्रोक के कारण अपनी जान गंवा बैठे।

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इमोशनल स्ट्रेस से भी दिल के दौरे का खतरा

इमोशनल स्ट्रेस एक बहुत अहम मुद्दा है दिल की बीमारियों और दिल के दौरे के लिए। ज्यादातर देखा गया है कि किसी को व्यवसाय से जुड़ा बहुत बढ़ा नुकसान हो जाए। परिवार में या किसी नजदीकी की मौत हो जाए और ऐसी हर समस्या जो जिससे व्यक्ति को अचानक से झटका (शॉक) लगे इससे लोगों को दिल का दौरा पढ़ जाता है। कभी-कभी ऐसा होता है दिल के दौरे की सूरत में दिल गुब्बारे के तरीके से फूल जाता है और अचानक से सांस का तेजी से फूल जाता है और दिल का दौरा पड़ने लगता है। इसे टॉकट सूबो डिजीज कहते हैं। ये जल्दी ही ठीक हो जाती है इसमें कोई भी ऑपरेशन नहीं करना पड़ता है। इमोशनल स्ट्रेस से होने वाले दिल के दौरे पर जान का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

ऐसे कर सकते हैं बचाव

प्रो. वीएस नारायण के मुताबिक हार्ट अटैक से बचने के लिए इंसान प्रयास करें कि तनाव में न रहे रोजाना होने वाले तनाव से बचना चाहिए। योग करना चाहिए, ध्यान करना चाहिए और व्यायाम करना चाहिए। परिवार को समय दें ज्यादा पैसा-पैसा नहीं करते रहना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा खुश रहने की कोशिश करें। बाहर के खाने से दूर रहें। मधुमेह और रक्तचाप पर काबू रखें इस तरीके से सावधानी बरती जा सकती है। इसके अलावा धूम्रपान, गुटखा और नशा से दूर रहें।

दौड़भाग वाली जिंदगी में 30 से 40 साल की उम्र में ही लोगों को दिल के रोग होने लगे हैं। पिछले एक से दो दशकों में भारत में बुरी लाइफ स्टाइल, तनाव, एक्सरसाइज ना करने और खाने पीने में लापरवाही की वजह से लोगों को दिल संबंधित गंभीर रोग होने लगे हैं।

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युवाओं में बढ़ रहीं दिल की बीमारियां

युवाओं में जो दिल की बीमारी बढ़ रहीं है उसका कारण सिगरेट, तम्बाकू, गुटखा है। आजकल देखा जाता है कि ज्यादातर लोग युवा गुटखा खाने के शौक़ीन होते जा रहे हैं। व्यायाम करते नहीं हैं एक ही जगह बैठे रहते हैं। एक मुख्य कारण नौकरी का दबाव जो दिल की बीमारियों को बढ़ा रहा है। लोगों को टारगेट दे दिए जाते हैं आपको इतना काम करना है तो वो अपने काम को करने के दबाव में रहते हैं जिसके कारण वो तनाव में आ जाते हैं। तनाव दिल के रोग का बहुत बढ़ा खतरा है।

पहले दिल का दौरा 55-60 वर्ष की उम्र में होता था लेकिन अब 25-30 वर्ष की उम्र में भी दिल का दौरा पड़ने लगा है। मधुमेह और रक्तचाप के कंट्रोल से बचाव दिल के रोग से बचाव है अगर रक्तचाप 140-190 से नीचे रहे और मधुमेह न होने दें तो दिल की बीमारियों और दिल के खतरों से काफी मात्रा में बचा सकते है। इसके अलावा धुम्रपान, गुटखा और नशा से दूर रहें।

गाँव के लोग रखें अपना ध्यान

गाँव में बीमारियों से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है, सुबह उठकर खाली पेट 30 मिनट तक टहलें। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। समय-समय पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर अपनी जांच जरूर करवाएं। अब ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियां तेजी से बढ़ने लगी हैं तो अपना ख्याल रखें।

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First Published: 2017-12-30 13:54:49.0

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