समझ जरूरी है पैकेज़्ड फूड लेबल्स की

खाद्य एवम औषधि प्रशासन के अनुसार ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन ए, सी और ई की तय मात्रा पायी जाती है उन्हें बेहतर सेहत के लिए बतौर एंटीओक्सीडेंट "उत्तम स्रोत या Good Source" कहा जा सकता है। बाजार में एंटिओक्सिडेंटयुक्त उत्पादों के लेबल से कई कंपनियों ने लूट मचा रखी है। इन उत्पादों का आकलन करने पर पाया गया कि इनमें कई विटामिन्स की उपस्थिती लगभग नगण्य जैसी थी।

समझ जरूरी है पैकेज़्ड फूड लेबल्स की

हमारे देश के बाजारों में जहाँ एक तरफ देश में ही बने पैकेज़्ड फूड की डिमांड बढ़ती जा रही है वहीं दूसरी तरफ विदेशों से आने वाले खाद्य पदार्थों ने भी पैर पसारने शुरु कर दिये हैं। पैकेज़्ड फूड की जमकर बिकवाली और ग्राहक को अपने उत्पादों की तरफ आकर्षित करने के लिए कंपनियां अपना सारा जोर उत्पादों के लेबल पर लगाती हैं। लेबल पर किए जाने वाले क्लेम कितनी सही हैं या कितने गलत, ये एक अलग विषय हो सकता है लेकिन उन क्लेम के बारे में उपभोक्ता की समझ कितनी है, ये बेहद जरूरी विषय है और इसी तथ्य को ध्यान में रखकर हम अपने पाठकों को उत्पादों पर दर्शाए गए लेबल को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस विषय पर गहन चर्चा भी जरूरी है, आखिर पैकेज़्ड फूड का सीधा संबंध हमारी सेहत है। चलिए जिक्र करते हैं कुछ ऐसे दावों के बारे में जिन्हें अक्सर हम पैकेज़्ड फूड के लेबल पर देख सकते हैं--

"ओमेगा-३ एस के साथ" (With Omega-3s): अक्सर ब्रेड, दूध और मक्खन के पैकेट पर इस दावे को देख सकते हैं और इस दावे के साथ जो उत्पाद बेचे जाते हैं, ऐसे उत्पाद बिल काउंटर पर उपभोक्ता की जेब ढ़ीली करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ये एक वसीय अम्ल है जो हृदय की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसियेशन की मानी जाए तो सप्ताह में दो बार ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाना जरूरी है जिनमें ओमेगा ३ एस पाया जाता है, खासकर मछलियों में। मजे की बात ये है कि इस लेबल की आड़ में कंपनियां रकम तो पीट लेती हैं लेकिन कई बार अनेक उत्पादों को मापदंड पर खरा उतरते नहीं देखा गया है।

"एंटीओक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत" (Good Source of Antioxidants): खाद्य एवम औषधि प्रशासन के अनुसार ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन ए, सी और ई की तय मात्रा पायी जाती है उन्हें बेहतर सेहत के लिए बतौर एंटीओक्सीडेंट "उत्तम स्रोत या Good Source" कहा जा सकता है। बाजार में एंटिओक्सिडेंटयुक्त उत्पादों के लेबल से कई कंपनियों ने लूट मचा रखी है। इन उत्पादों का आकलन करने पर पाया गया कि इनमें कई विटामिन्स की उपस्थिती लगभग नगण्य जैसी थी। और मजे की बात ये है कि ऐसे उत्पादों में जिक्र होने वाले विटामिन्स और उनकी भारी कीमत के एवज में आप महज एक छोटा सा गाजर चबा जाएं तो ऐसे २ उत्पादों को मिलाकर जितना विटामिन मिलेगा, उससे ज्यादा इस छोटे से गाजर से प्राप्त हो जाएगा, कहने का तात्पर्य यह है कि अच्छी खासी कीमत अदा करने के बावजूद भी आपको कई बार सिवाए धोखे के कुछ नहीं मिलता। दिन में भर में दो बार फ्रू्ट सलाद का सेवन आपके शरीर में विटामिन्स की कमी को सामान्य करने में काफी कारगर हो सकते हैं।

"फाईबरयुक्त उत्पाद" (High in Fiber): कई ब्राण्ड के ब्रेड, एनर्जी बार, बिस्किट्स और आटे के पैकेट पर 'हाई इन फाइबर' लिखा हुआ देखा जा सकता है। कई उत्पादों में या तो कृत्रिम तौर से तैयार फाईबर होते हैं या इन्हें बतौर एक्ट्रेक्ट पौधों से तैयार किया जाता है और उपयोग में लाया जाता है। आधुनिक शोधें बताती हैं कि फाईबर हृदय के रोगियों के लिए बेहद कारगर होते हैं लेकिन ये फाईबर प्राकृतिक होने चाहिए कृत्रिम नहीं। वैसे फल्लियों, जौ, बेरी और ब्रोक्कोलाई जैसे पादपों के अंगों को चबाकर हमारे शरीर के लिए ज्यादा बेहतर प्राकृतिक फाईबर प्राप्त किए जा सकते हैं।

"मेड विद होल ग्रेन" (Made with Whole Grains): वेफर्स, ब्रेड, पिज्जा बेस, पफ, बिस्किट्स और कई अन्य उत्पादों को "संपूर्ण अनाज से बना" बताकर बेचा जाता है। दावे किए जाते हैं कि इस तरह के उत्पाद में फाईबर, विटामिन, खनिज लवण और कई सूक्ष्म तत्वों की भरमार होती है लेकिन दुर्भाग्य से कंपनियां कभी भी इसके सही अनुपात को लेबल पर दिखाने में संकोच करती हैं। ब्रेड बनाने वाले एक प्रसिद्ध ब्रांड जो कि ब्रेड को संपूर्ण रूप से गेंहूं (whole wheat) से बना होने का दावा करता है, इसके पोषक तत्वों के आकलन से पाया गया कि हर एक सर्विंग में 5 ग्राम से ज्यादा सम्पूर्ण अनाज नही पाया गया, यानि सम्पूर्ण अनाज के नाम पर यह एक धोखा है। यदि आप ऐसी एक ब्रेड की एक सर्विंग भी उपभोग में लाते हैं तो सारे दिन के लिए तय सीमा का 1 /16 हिस्सा ही आप सेवन करते हैं। ऐसी दुविधा से बचने के लिए उन उत्पादों का चयन किया जाना चाहिए जिन पर 100% "संपूर्ण अनाज" लिखा हो, तब हम वाकई समझ पाएंगे कि हमसे छ्लावा नहीं हो रहा।

"लो फैट उत्पाद" (Low Fat): कम वसा उत्पाद का तात्पर्य FDA के अनुसार उस खाद्य पदार्थ से है जिसकी एक सर्विंग में 3 या 3 से कम ग्राम वसीय पदार्थ हों।

"प्राकृतिक" (Natural): आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उत्पादों के लेबल पर "प्राकृतिक" शब्द के इस्तमाल के लिए FDA के कोई भी तय मानदंड या दिशानिर्देश नहीं है बल्कि इस शब्द का इस्तमाल करना कंपनियों का ऐसा हथकंडा है जिसमें आमतौर पर लोग चक्कर खा जाते हैं, दूसरे शब्दों में कहें तो अपने उत्पाद को बेचने और उत्पाद की खासियत बताने का ये भी एक फण्डा है। यदि उत्पाद में कोई कृत्रिम रंग, स्वाद या पदार्थ नहीं है तो FDA को इसके इस्तमाल से कोई आपत्ति नहीं होगी और कंपनी उत्पाद के दावों में सिर्फ एक शब्द "प्राकृतिक" जोड़कर उत्पाद के मायने ही बदल देती है।

"लाईट" (Light): किसी भी खाद्य पदार्थ के लेबल पर "Light" लिखा जाना यह संदेश देता है कि इस उत्पाद को दुबारा बाजार में लाया जा रहा है और इसमें पहले की तुलना अब कम वसा, कैलोरी या सोडियम की मात्रा है। जब किसी उत्पाद को सेहत की दृष्टि से पहले से बेहतर बनाया जाता है यानि इसमें पूर्व की तुलना में 50% से कम वसा या अन्य रसायन उपस्थित हो तो लेबल पर इस तरह लिखा जाता है।

"जीरो ट्रांस फैट" (Zero Trans Fats): हर एक सर्विंग पर 1/2 ग्राम से भी कम ट्रांस फैट वाले उत्पाद को "जीरो ट्रांस फैट" लिखने की अनुमति मिलती है लेकिन अब यह विषय विवाद का है। लोग दिन में एक से ज्यादा बार इस तरह के उत्पाद का सेवन करेंगे, इस तरह के उत्पादों के सेवन से हमे वसा नियंत्रण में कैसी मदद मिलेगी? और दूसरी बात यह कि क्या कंपनियां लेबल पर यह भी लिखेंगी कि दिन में सिर्फ़ एक बार ही इस तरह के उत्पादों का सेवन हो?

"ऑर्गेनिक" (Organic): ऑर्गेनिक शब्द को लेकर FDA के पास कोई भी विधिक परिभाषा नहीं है। अमेरिका में उत्पादों पर USDA Organic लिखा हो तो माना जा सकता है कि इसमें कम से कम ९५% ऑर्गेनिक पदार्थ समाहित हैं लेकिन किसी उत्पाद में सारे पदार्थ ऑर्गेनिक हो तों उन्हें एक अलग लेबल "100 percent organic" यानि शत प्रतिशत ऑर्गेनिक लिखने की अनुमति होती है।

"ओर्गेनिक पदार्थों से बना" (Made From Organic Ingredients): "ऑर्गेनिक" की तरह "ओर्गेनिक पदार्थों से बना" भी एक USDA लेबल है जिसका अर्थ उत्पाद में कम से ७०% पदार्थ ऑर्गेनिक हैं।

"कोलेस्ट्राल फ्री" (Cholesterol Free): "कोलेस्ट्राल फ्री" उत्पादों में हर एक सर्विंग या पैक में २ मिलीग्राम से कम कोलेस्ट्राल और २ ग्राम से कम सेच्युरेटेड फैट होना जरूरी है।

"होल व्हीट" (Whole Wheat): ऐसे खाद्य पदार्थ जो 100% गेंहूं के दानों से ही बने हों "होल व्हीट" लेबल के साथ बाजार में बेचे जाते हैं।

"मल्टी ग्रेन" (Multigrain): ये भी एक ऐसा लेबल है जिसे पढ़कर अक्सर शंका होती है, हलांकि जिस तरह लिखा जाता है साफ समझ आता है कि इसमें एक से ज्यादा प्रकार के अनाज का इस्तमाल किया गया है लेकिन लेबल यह नहीं दर्शाता कि अनाज की गुणवत्ता कैसी है?

"लो सोडियम" (Low Sodium): लो सोडियम लेबल का तात्पर्य उन खाद्य पदार्थों से हैं जिसमें 180 या उससे कम मिलीग्राम सोडियम की मात्रा है।

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सवाल सेहत का--

प्रेषक: दयालसिंह राजपूत, नैनीताल

सवाल: सर, मुझे एढ़ी के पास काफी दिनों से दाद जैसा कुछ हुआ है जो अक्सर खुजलाता भी है। आपके नुस्खों के बारे में अक्सर पढ़ता रहता हूँ, मेरे लिए कोई सलाह दीजिए।

जवाब: गंवारफल्ली की पत्तियों को कुचलकर लगभग ४ चम्मच रस तैयार किया जाए और दूसरी तरफ ३-४ लहसून की कलियाँ लेकर कुचला जाए और अंत में गंवार फल्ली की पत्तियों के रस और कुचले लहसून को मिला लिया जाए और दाद, खाज और खुजली वाले अंगों पर लगाया जाए, आराम मिल जाता है। रोज दिन में ३-४ बार लेपित करें, जल्द फर्क दिखेगा।

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