रुपये ऐंठने के लिए मृत बच्ची को तीन दिन तक वेंटीलेटर पर रखा, हंगामा

रुपये ऐंठने के लिए मृत बच्ची को तीन दिन तक वेंटीलेटर पर रखा, हंगामाफोटो साभार: गूगल

लखनऊ। पैसे के लिए प्राइवेट अस्पताल किस हद तक मानवता को तार-तार कर सकते हैं। इसका उदाहरण देखने को मिला राजधानी के मिडलैंड कपूरथला अस्पताल में। अस्पताल में एक बच्ची की मौत दो दिन पहले हो गयी थी, लेकिल अस्पताल ने उसे कमाई का जरिया बनाकर तीन दिन तक वेंटीलेटर पर रखे रहे। वहीं, बच्ची की मौत से बेखबर परिवार वाले बच्ची के ठीक होने की आस लगाए बैठे रहे और डॉक्टर के मनमुताबिक पैसा देते रहे। जब इस बात का शक परिवार वालों को हुआ तो उन्होंने 100 नम्बर पर फोन करके पुलिस को इस बात की खबर दी।

तब पुलिस को किया फोन

पुलिस के आने के बाद जब परिवार वालों ने बच्ची को देखा तो वह दंग रह गए। बच्ची की मौत करीब तीन दिन पहले हो चुकी थी। बच्ची की मौत के बारे मे पता चलते ही परिवार वालो गुस्से में हंगामा काटने लगे। पुलिस ने जब पोस्टमार्टम की बात कही तो परिवार वाले पीछे हट गए और शव लेकर चले गए।

फिर परिजनों को हुआ शक

विकास नगर निवासी विजय शर्मा ने बताया कि 10 से 15 नवम्बर तक लाखों रूपये का बिल बना दिया। उन्होंने बताया कि बच्ची अंशी शर्मा को पेट मे कुछ शिकायत थी। 10 नवम्बर को उसे मिडलैण्ड के अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती करते ही डॉक्टर ने ऑक्सीजन कम होने की बात कहकर वेंटीलेटर पर रखने के लिए कहा। और जांच पर जांच और दवाईयों पर दवाईयां मांगते रहे। जब डॉक्टर से बच्ची की हालत पूछी जाती तो वह बच्ची की हालत नाजुक बताकर दवा पर दवा मांगते रहे। उन्होंने बताया कि जब डॉक्टर ने बच्ची की एमआरआई करायी तो रिपोर्ट में बच्ची के मरने की आशंका से परिवार वालों ने पुलिस को इस बात की जानकारी दी। पुलिस ने जब बच्ची को देखा तो उसके होश उड़ गए। बच्ची मर चुकी थी, अस्पताल प्रशासन ने मृत बच्ची को पैसा कमाने के लिए वेंटीलेटर पर रखा था।

पांच दिन में ऐंठ लिए लाखों रुपये

बच्चे के पिता ने बताया कि जब उन्होंने बच्चे को देखा तो उसका शरीर फूला हुआ था। बच्चे में कोई हलचल नहीं थी। वहीं, डॉक्टर ने बताया कि बच्ची बेहोश है। मंगलवार को जब उन्होंने अस्पताल पर बच्ची को दिखाने का दबाव बनाया तो डॉक्टर आनाकानी करने लगे और कहा बच्ची बेहोश है। वहीं जब बच्ची को देखा गया तो बच्ची की मौत हो चुकी थी। विजय शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चे की मौत तीन दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल ने फीस के चक्कर में इतने दिन बच्चे को अस्पताल में रखा। परिवार का कहना है कि 5 दिन में अस्पताल ने बच्ची के इलाज पर कई लाख रुपये ऐंठ लिए।

क्या बोले जिम्मेदार

बच्ची जब भर्ती हुई थी, तब ऑक्सीजन बहुत कम था। बच्ची को सात दिन से बुखार आ रहा था और ब्लीडिग भी हो रही थी। बच्ची पूरी तरह से डेंगू शाक में थी। जब बच्ची आई थी, तब ही बच्ची की हालत के बारे में बता दिया गया था और यह भी कहा गया था वह कही और दिखाना चाहते हैं तो दिखा सकते हैं। बच्ची की हालत की खबर बार-बार पैरेंटस को दी जा रही थी। यह आरोप सरासर गलत है।
बीवी सिंह, अस्पताल मालिक

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