एक साथ दो सर्जरी कर गर्भवती की बचाई जान, बच्चा भी स्वस्थ

एक साथ दो सर्जरी कर गर्भवती की बचाई जान, बच्चा भी स्वस्थफोटो साभार: गूगल इमेज

नोएडा (आईएएनएस)। मस्तिष्क के अंदर खून का थक्का जमा देने वाली इंट्राक्रेनियल हेमाटोमा (ब्लीड) बीमारी से जूझ रही गर्भवती महिला की एक साथ दो सर्जरी कर के न केवल जान बचाई गई, बल्कि उसने बाद में बच्चे को जन्म भी दिया। यह उपलब्धि नोएडा सेक्टर 128 स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों की दो टीम ने हासिल की।

अस्पताल की तरफ से जारी बयान के अनुसार, न्यूरोसर्जरी एवं प्रसूति विभाग के चिकित्सकों ने अलीगढ़ निवासी गर्भवती हिमांशी की अति गंभीर बीमारी से जान तो बचाई ही साथ ही निर्धारित समय से काफी पहले जन्म लिए शिशु को भी सुरक्षित बचा लिया। यह कामयाबी अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विशाल जैन और प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. संदीप चढ्ढा की टीम ने हासिल की।

डॉ. संदीप चढ्ढा ने कहा, "23 वर्षीय गर्भवती हिमांशी अग्रवाल अलीगढ़ में चिकित्सकों से परामर्श ले रही थी। एक दिन अचानक हिमांशी को उल्टी होने लगी और सिर में दर्द हुआ तो उसने स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क किया। सी.टी.स्कैन जांच के बाद हिमांशी के सिर के अंदर ब्लीडिंग होने का पता चला और बीमारी की अग्रिम जांच एवं उचित इलाज के लिए महिला को तुरंत जेपी हॉस्पिटल जाने की सलाह दी गई।"

डॉ. विशाल जैन के अनुसार, "वास्तव में चिकित्सकों को पहले हिमांशी के गर्भवती होने की जानकारी नहीं थी, क्योंकि वह यहां सिर्फ मस्तिष्क संबंधी बीमारी की जांच व इलाज कराने आई थी। यहां जब उसकी अग्रिम जांच की गई तो पता चला कि उसे इंट्राक्रेनियल हेमाटोमा (ब्लीड) नामक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में मस्तिष्क के अंदर खून का थक्का जम जाता है जो ब्रेन हेमरेज का कारण बन सकता है। परिजनों को जब इस बात का पता चला तब उन्होंने इलाज का निर्णय लिया और इसके बाद चिकित्सकों को हिमांशी के गर्भवती होने की जानकारी दी गई।"

डॉ. चढ्ढा ने बताया, "आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं का ब्लडप्रेशर काफी बढ़ जाता है, जो प्रसव के बाद ही सामान्य अवस्था में आता है। यही स्थिति इस मरीज के साथ भी थी। इस बीमारी को प्री एक्लेम्पसिया कहते हैं। यदि इसी स्थिति में मरीज का इलाज किया जाता तो दोबारा मस्तिष्क में खून का थक्का जम सकता था, जिससे मरीज सहित गर्भस्थ शिशु के जीवन को जोखिम हो सकता था।"

उन्होंने कहा, "इसे देखते हुए न्यूरोसर्जरी एवं हमारी टीम के चिकित्सकों ने एक साथ दो ऑपरेशन करने की योजना बनाई। पहली योजना बनी कि निर्धारित समय से करीब 10 हफ्ते पहले ही प्रसव कराया जाएगा और फिर बाद में मस्तिष्क संबंधी बीमारी का इलाज किया जाएगा। समय से पूर्व प्रसव कराना हमेशा से जोखिम भरा काम होता है, इसलिए करीब 12 घंटों तक गर्भस्थ शिशु को दवाओं द्वारा प्रसव के अनुकूल अवस्था में लाया गया और फिर एक ही ऑपरेशन कक्ष में बारी-बारी से दोनों सर्जरी की गई। जब शिशु का जन्म हुआ तो उसका वजन 1.2 किलोग्राम था। उसे कुछ दिनों के लिए चिकित्सकीय देख-रेख में रखा गया। अब वह स्वस्थ है।"

डॉ. जैन ने कहा, "खून का थक्का हिमांशी के सिर के दाई तरफ था। इसके लिए क्रेनियोटॉमी एंड इवैकुएशन ऑफ हीमोटोमा (ब्लीड) सर्जरी की गई। न्यूरो सर्जरी में 1 से 2 घंटे और कुल ऑपरेशन में करीब 4 घंटों का समय लगा। आखिरकार सर्जरी सफल हुई।"

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