श्रीदेवी की तरह रीमा लागू, जयललिता भी हुई थीं कार्डियक अरेस्ट का शिकार, हार्टअटैक नहीं थी वजह

श्रीदेवी की तरह रीमा लागू, जयललिता भी हुई थीं कार्डियक अरेस्ट का शिकार, हार्टअटैक नहीं थी वजहकार्डियक अरेस्ट से हुई कई अभिनत्रियों की मौत 

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी की (54 वर्ष) की उम्र में 'कार्डियक अरेस्ट' के कारण मौत हो गई। ऐसा कहा जा रहा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था लेकिन हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर है। बहुत से लोग कार्डियक अरेस्ट को दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक समझते हैं। श्रीदेवी की अलावा बॉलीवुड की 'फेवरेट मां' कहीं जाने वाली रीमा लागू( 59 वर्ष) की मौत भी कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई थी। उनके अलावा साउथ की एक्ट्रेस और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मौत भी इसी वजह से हुई थी।

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के हृदय रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. धर्मेन्द्र जैन ने बताया, “कार्डियक अरेस्ट एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसका कुछ खास स्थितियों में अगर समय से इलाज किया जाए तो मरीज की जान बच सकती है। जिन लोगों को दिल की बीमारी होती है, उनमें कार्डियक अरेस्ट होने का खतरा ज्यादा रहता है। अगर किसी के परिवार में दिल की बीमारी रही है तो भी इसका खतरा बना रहता है।”

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हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन तब होता है, जब शरीर की कोरोनरी आर्टरी (धमनी) में अचानक गतिरोध पैदा हो जाता है। इस आर्टरी से हमारे हृदय की पेशियों तक खून पहुंचता है, और जब वहां तक खून पहुंचना बंद हो जाता है, तो वे निष्क्रिय हो जाती हैं, यानी हार्ट अटैक होने पर दिल के भीतर की कुछ पेशियां काम करना बंद कर देती हैं। धमनियों में आए इस तरह आई ब्लॉकेज को दूर करने के लिए कई तरह के उपचार किए जाते हैं, जिनमें एंजियोप्लास्टी, स्टंटिंग और सर्जरी शामिल हैं और कोशिश होती है कि दिल तक खून पहुंचना नियमित हो जाए।

दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट तब होता है, जब दिल के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा हो। आसान भाषा में कहें तो इसमें दिल के भातर विभिन्न हिस्सों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान गड़बड़ हो जाता है, जिसकी वजह से दिल की धड़कन पर बुरा असर पड़ता है। स्थिति पूरी तरह बिगड़ने पर दिल की धड़कन रुक जाती है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। कार्डियक अरेस्ट के इलाज के लिए मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (सीपीआर) दिया जाता है, जिससे उसकी उसकी हृदयगति को नियमित किया जा सके। मरीज को 'डिफाइब्रिलेटर' से बिजली का झटका दिया जाता है, जिससे दिल की धड़कन को नियमित होने में मदद मिलती है।

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कार्डिएक अरेस्ट के दौरान अचानक से दिल खून पंप करना बंद कर देता है। इससे सांस बंद हो जाती है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है। वो रिस्पांस करना बंद कर देता है। दरअसल, खून सप्लाई नहीं होने से शरीर के अहम अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। इससे शरीर निष्क्रिय होने लगता है. यदि जल्द से जल्द एक्शन नहीं लिया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, दिल की धमनियों में इलेक्ट्रिक सिग्नल में दिक्कत आना कार्डियक अरेस्ट की जड़ होता है। भारत में हर साल कार्डिएक अरेस्ट के एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आते हैं।

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण

छाती में दर्द, सांसों की कमी, पल्पीटेशन, अचानक कमजोरी आना, चक्कर आना, बेहोशी, थकान, ब्लैकआउट इन सभी लक्षणों से कार्डियक अरेस्ट को पहचाना जा सकता है। इस समस्या के कुछ लक्षण और भी हैं बचपन से दिल से सम्बंधित बीमारी होना दिल की बनावट सही न होना धड़कन का सहीन होना धड़कन का कभी जल्दी-जल्दी तो कभी रुकरुकर धड़कना। अगर किसी को ऐसी समस्याएं होती हैं तो अपना लगातार चेक करवाते रहना चाहिए।

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इलेक्ट्रिक शॉक है इलाज

अगर कोई कार्डिएक अरेस्ट से पीड़ित है तो उसे इलेक्ट्रिक शॉक ही बचा सकते हैं, जिस डिवाइस से इलेक्ट्रिक शॉक दिए जाते हैं उसे डिफिब्रिलेटर कहते हैं और कार्डिएक अरेस्ट के मरीज की ये आखिरी उम्मीद होती है। कार्डियक अरेस्ट के बारे में पता चलने पर पीड़ित व्यक्ति को तुरंत सीपीआर देना चाहिए और फिर जल्द से जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए।

Tags:    heart diseases 
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