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शैतान आंखों की नज़र में आपके मासूम !

शैतान आंखों की नज़र में आपके मासूम !गाँवकनेक्शन

लखनऊ/मथुरा। हास्टल के बाहर से जब कार सवार बदमाशों ने एक 15 साल की लड़की को अगवा कर लिया तो वह लगातार चुपके-चुपके मोबाइल से मैसेज किए जा रही थी।

झारखंड के लोहरगा से अगवा की गई ये लड़की लगातार हेल्पलाइन के नंबर 1090 पर मैसेज कर रही थी, और इस वजह से पुलिस उसे 19 मार्च को छुड़ाने में सफल रही। लेकिन इस किशाेरी की तरह हजारों बच्चे खुशनसीब नहीं होते। बच्चों की तस्करी का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यूपी में भी भारत-नेपाल सीमा के क्षेत्रों में बच्चों की तस्करी सबसे अिधक होती है।

देश भर में होने वाले अपराध को दर्ज़ करने वाली संस्था ‘एनसीआरबी’ की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में मानव तस्करी की घटनाओं में 38.7 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

बच्चों को आसानी से शिकार बनाने वाले ये तस्कर सबसे ज्यादा उन्हें दूर-दराज के इलाकों से काम कराने के बहाने या अच्छी जगह पढ़ाने का झांसा देकर लाते हैं और दूसरों के हाथों बे देते हैं।

मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी ने बताया, “झारखंड के राजेश सिंह नामक के एक युवक ने 40 हजार रुपए में वहां से अगवा की गई इस किशोरी का सौदा वृंदावन में रहने वाले पांच लोगों से किया था।”

इससे पहले तीन मार्च, 2016 को नेपाल में रहने वाले दो बच्चों को चाइल्ड लाइन ने बाराबंकी के राम नगर में छुड़ाया। ये नेपाल से तस्करी करके लाए गए थे और गोरखपुर के एक होटल में इनसे काम कराया जा रहा था। इन बच्चों को सौतेले पिता ने ही होटल पर बेच दिया था।

बाराबंकी चाइल्ड लाइन की निदेशक नाहिद अकील बताती हैं, “वर्ष 2015 में जि़ले में करीब 1200 ऐसे मामले सामने आए जो मानव तस्करी से जुड़े थे।”

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में 21,500 से अधिक लोग तस्करी के मामले में भारत में पकड़े गए।

साथ ही, 64,500 से अधिक गिरफ्त से बाहर हैं। नेपाल में मानव तस्करी रोकने के लिए काम कर रही संस्था ‘माइती’ के प्रवक्ता अच्युत कुमार कहते हैं, “हाल में ही असम की 12 लड़कियां नेपाल में बरामद हुई थीं। वर्ष 2015 में भारत-नेपाल बार्डर पर संस्था ने 3800 लड़कियों को तस्करी से बचाया है। यह सभी नेपाल से भारत आ रही थीं।” 

अमेरिका के विदेश विभाग की वर्ष 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत बच्चों की तस्करी रोकने में असफल रहा है। 90 फीसदी तस्करी के मामले भारत के अंदर ही हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत-नेपाल सीमा के अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और गुजरात से सबसे अधिक तस्करी हो रही है। 

संगठित अपराध जांच एजेंसी के गठन के निर्देश

दिसंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को देश में मानव तस्करी की घटनाओं की जांच के लिए 01 दिसंबर, 2016 तक संगठित अपराध जांच एजेंसी के गठन का निर्देश दिया था। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भी तस्करी के शिकार पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास पर कानून बनाने के लिए विचार-विमर्श की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे।

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