सीएम के आदेश के बाद 15 से 16 घंटे मिल रही बिजली

सीएम के आदेश के बाद 15 से 16 घंटे मिल रही बिजलीगाँव कनेक्शन,ललितपुर, बुन्देलखण्ड

मड़ावरा (ललितपुर)। पिछले कई वर्षों से सूखा,ओलावृष्टि जैसी दैवीय आपदाओं से जूझ रहे बुन्देलखण्ड के किसान की हालत दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। सरकार बुदेलखण्ड के किसानों को राहत देने के लिये प्रयासरत है,लेकिन फिर भी अन्नदाताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है। 

बुन्देलखण्ड के किसानों की दयनीय हालात एवं सूखे की स्थिति को देखते हुये प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने बुन्देलखण्ड के सातों जिलों को 30 जनवरी तक सिंचाई के लिये 24 घण्टे बिजली मुहैया करवाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से किसानों में कुछ राहत की उम्मीद जागी लेकिन विद्युत विभाग ने 24 घण्टे बिजली देने से अपने हाथ खड़े कर दिये।

ललितपुर जनपद से 60 किमी दूर बसे गाँव साढूमल के किसान नसीर खान बताते हैं,''मेरे पास लगभग साढ़े पांच एकड़ खेती की जमीन है जिसकी सिंचाई पूरी तरह से नलकूप से मिलने वाले पानी से करता हूं। पिछले वर्षों में जब ठीकठाक बारिश होती थी तब तो नलकूप से एकाध सिंचाईं पर्याप्त हो जाती थी,लेकिन इस बार सूखा पडऩे से हालात काफी खराब है। पलेवा करके खेतों में मटर और गेहूं की फसल बोई थी, लेकिन अब पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाने से खेत सूखे पड़े हैं।" सिंचाईं के लिये मिलने वाली बिजली के बार में नसीर आगे बताते हैं,''दिनभर में लगभग 15-16 घण्टे बिजली मिल पाती है जिससे सूखी पड़ी जमीन का लगभग 10-12 डिसमिल रकबा ही सींच पाता है और ऐसे में पूरे खेत की एक सिंचाईं के लिये महीने भर से ज्यादा का समय लग जायेगा।" वहीं ग्राम तिसगना निवासी किसान अरविन्द झां बताते हैं,''सूखा पडऩे से भूमिगत जलस्तर में भी कमी आयी है, पहले की अपेक्षा नलकूपों से पानी भी काफी कम मात्रा में मिल पा रहा है और यदि 24 घण्टे बिजली मिलती भी है तब भी हालात ज्यादा सुधरने वाले नहीं है। समय पर पर्याप्त सिंचाई न हो पाने से फसल उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और पैदावार भी लगभग आधा ही मिलने की उम्मीद है।"

बताते चलें कि बुन्देलखण्ड का ललितपुर जनपद एक ऐसा जिला बन चुका है जहां पर तीन तरीकों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है, यहां सौर ऊर्जा, पनबिजली और तापीय विधि द्वारा विद्युत उत्पादन हो रहा है फिर भी जिले का 24 घण्टे बिजली नसीब नहीं हो पा रही है। बिना बिजली के सिंचाई के लिये पानी, रोजगार आदि भी प्रभावित हो रहे हैं। क्षेत्र में कारखानों और रोजगार की कमी के चलते ग्रामीणों की पलायन दर में कोई खास गिरावट नहीं आयी है। 

24 घण्टे बिजली आपूर्ति के बारे में मड़ावरा स्थित 33/11 केवीए उपकेन्द्र पर तैनात अवर अभियन्ता रामकुमार वर्मा बताते हैं, ''खपत के सापेक्ष ट्रान्सफार्मरों की कमी और जर्जर विद्युत लाइनों के चलते 24 घण्टे बिजली आपूर्ति करना सम्भव नहीं हो पा रहा है।" बुन्देखण्ड में सूखे ही हालात पर चिन्ता जाहिर करते हुये महरौनी के किसान नेता नाथूराम पाल कहते हैं,''बारिश की कमी के चलते बांधों में पानी न के बराबर ही बचा है और सिंचाई के लिये नलकूप ही एकमात्र सहारा है ऐसे में किसानों के बिजली बिलों में और अधिक अनुदान तथा बिलों की वसूली में भी राहत दिया जाना चाहिये।"

रिपोर्टर-इमरान खान

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