स्कूली छात्रों को अपना शिकार बना रहे नशे के सौदागर

स्कूली छात्रों को अपना शिकार बना रहे नशे के सौदागरgaonconnection, स्कूली छात्रों को अपना शिकार बना रहे नशे के सौदागर

मेरठ। रात के सवा ग्यारह बज रहे थे। मेरठ की मवाना रोड पर इक्का-दुक्का गाड़ियां ही गुज़र रही थी। लेकिन इस अंधेरे में कुछ आहटें भी थी। एक खुफ़िया जानकारी के आधार पर ‘गाँव कनेक्शन’ रिपोर्टर अपने कैमरामैन के साथ इन्ही आहटों को करीब से समझने के लिए मौके पर मौजूद थे। उन्होने देखा कि सड़क के किनारे कुछ लोग ‘लेन-देन’ में लगे थे। हैरानी की बात ये थी इस लेन-देन में बातचीत का ना के बराबर इस्तेमाल हो रहा था। एक शख्स ने दूसरे से दबे अंदाज़ में कहा “पुड़िया” दूसरे ने पूछा “कौन सी” पहले ने एक इशारा किया और दूसरे ने मुट्ठी में कुछ थमा दिया। पैसे लिये और दोनों अपने-अपने रास्ते।

ये समझना मुश्किल नहीं था कि जो खेल यहां चल रहा था वो नशे का खेल था।

वो खतरनाक खेल जो उत्तर प्रदेश में बीते कुछ समय से तेज़ी से फैल रहा है। हालत ये है कि अब नशे का ये सामान रात ढलते ही चोरी-छिपे नुक्कड़ों पर 50,100 और 200 में आराम से मिल जाता है। आकड़ों की माने तो उत्तर प्रदेश में जिस तरह तेज़ी से नशे का जाल फैल रहा है वो दिन दूर नहीं कि जब नशे के इस्तेमाल के मामले में देश में दूसरे नंबर के पायदान पर खड़ा यूपी, अव्वल नंबर पंजाब को पिछाड़ देगा।

नशा उन्मूलन के लिए काम कर रही तमाम संस्थाओं की रिपोर्ट्स कहती हैं कि उत्तर प्रदेश में आने वाला नशे का सामान ज्यादातर पंजाब से आता है। यही वजह है कि हाल ही में, प्रशासन के हरकत में आने पर पुलिस ने नशा के तमाम कारोबारी और स्मगलर्स पर नकेल डालने की कोशिश की है। नार्कोटिक्स ब्यूरो इंडिया के अनुसार साल 2014 से ही उत्तर प्रदेश में 15 किग्रा हेरोइन, 8682 किग्रा गांजा और 994 किग्रा हशीश बरामद किया गया है। इसके अलावा आंकड़ों में ये बात भी साफ की गई है कि ज़ब्त किया गए सामान का 60 फीसदी हिस्सा पंजाब से आया था। 

“गाँव कनेक्शन” बीते लंबे समय से नशाखोरी के खिलाफ ‘नशे का जाल’ नाम की मुहिम चला रहा है। और इसी दौरान यूपी के कई इलाकों की छानबीन में ये साफ हुआ है कि नशे के सौदागर ज्यादातर स्कूली छात्रों को अपना शिकार बनाते हैं। इन सौदागरों के ‘एजेंट’ भी वो स्कूली छात्र होते हैं जो अपने दोस्तों को पहले एक-बार नशा कराते हैं और फिर उन्हें इसका आदि बनाकर नशे का सामान सप्लाई करते हैं। नशे के कारोबारी अब सिर्फ ‘सप्लाई’ पर काम नहीं करते बल्कि ‘डिमांड’ भी पैदा कर रहे हैं। मुहिम के दौरान की गई छानबीन से ये भी साफ हुआ है कि इस खतरनाक खेल के पुरानी खिलाड़ी चरस, गांजा, डोडा, अफीम पंजाब के अलावा यूपी के बाराबंकी और उत्तराखंड के पहाड़ों से मंगवाते हैं जबकि स्मैक, ब्राउन शुगर और हेरोइन  मध्य प्रदेश के मंदसौर से मंगवाई जाती हैं।

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

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