स्कूलों में अब दूध के बाद फल बांटने की तैयारी

स्कूलों में अब दूध के बाद फल बांटने की तैयारीगाँव कनेक्शन

लखनऊ। प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में अभी तक बच्चों को हर बुधवार दूध दिया जाता था लेकिन सरकार अगले वित्तीय वर्ष से मिड डे मील में मौसमी फल बांटने की योजना भी बना रही है। 

प्रदेश सरकार यह योजना समाजवादी पौष्टिक आहार के नाम से शुरू करने जा रही है, जिसका एलान 2016-17 के बजट में होगा। योजना का लाभ परिषदीय स्कूलों, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों, अनुदानित जूनियर हाईस्कूलों और मदरसों के छात्रों को भी मिलेगा। योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देना है, हालांकि अभी तक ये नहीं निर्धारित है कि फल सप्ताह में एक दिन मिलेगा या रोज। 

लखनऊ के मिड डे मील समन्वयक आनन्द मौर्य इस बारे में बताते हैं, ''फल वितरण के लिए प्रति बच्चा तीन रुपये की दर प्रस्तावित की गई है। इस योजना को अगले वर्ष के बजट में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने 207 करोड़ रूपये का बजट मांगा गया है। योजना आने वाले समय में लागू की जाएगी।"

दूध वितरण के बाद फल वितरण पर अध्यापकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने जब गोण्डा जिले के प्राथमिक विद्यालय कटरा के अध्यापक नितिन मिश्रा से बात की तो उन्होनें बताया, ''ये सब हम अध्यापकों की मुसीबतें बढ़ाना है, योजना लागू करना तो आसान ही है उसके बाद कौन पूछने आता है कि क्या हो रहा है। दूध वितरण ही ले लीजिए दस में एक या दो स्कूल में हो पाता है। स्कूल में बच्चे पढ़ने आते हैं, ये सब नियम केवल पढ़ाई में व्यवधान डालते हैं।"

वर्तमान में मिड डे मील योजना से प्रदेश के 1,14,256 प्राथमिक विद्यालयों एवं 54,155 उच्च प्राथमिक विद्यालय आच्छादित हैं। इन विद्यालयों में प्राथमिक स्तर पर अध्ययनरत 133.72 लाख विद्यार्थी एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर 57.78 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। यानि एक करोड़ 91 लाख बच्चों को 200 ग्राम के हिसाब से फल दिया जाएगा यानि एक दिन में 38 हजार कुंतल फल की जरूरत होगी। 

आनन्द मौर्य आगे बताते हैं, ''ये तो शासन का नियम है, लागू होगा तो पालन करना ही होगा। दिक्कत तो आयेगी लेकिन हमें राय देना का अधिकार नहीं है। दूध वितरण में भी कोशिश करते हैं कि शत प्रतिशत हो लेकिन नहीं हो पाता क्योंकि जमीनी दिक्कतें आती हैं।"

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