स्कूलों में फेल नहीं करने की नीति पांचवीं कक्षा तक ही लागू करने की सिफारिश

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नई दिल्ली (भाषा)। नई शिक्षा नीति तैयार करने के संबंध में गठित समिति ने सुझाव दिया है कि स्कूलों में फेल नहीं करने की नीति पांचवी कक्षा तक ही लागू होनी चाहिए, साथ ही उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत आने की अनुमति दी जानी चाहिए।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति विकसित करने के लिए टीएसआर सुब्रमण्यम के नेतृत्व में बनी समिति ने शुक्रवार को 200 पन्नों की अपनी रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंप दी है।

समिति की सिफारिशों में एक महत्वपूर्ण पहलू कोचिंग के उपाचार पर ध्यान केंद्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के सीखने पर कोई प्रभाव नहीं पड़े। इसमें फेल नहीं करने की नीति की समीक्षा करने का भी सुझाव दिया गया है और छठी कक्षा से परीक्षा लेने का प्रस्ताव किया गया है। शिक्षा के अधिकार कानून में आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए फेल नहीं करने की नीति की बात कही गई है।

अगर कोई छात्र पहली बार में पास नहीं होता है, तब उसे परीक्षा में बैठने के दो और मौके दिये जाने चाहिए। सूत्रों ने बताया कि समिति ने शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर आधारभूत संरचना से जुड़ी चिंताओं पर सुझाव दिये हैं। इसमें एक सुझाव शिक्षा कैडर सेवा गठित करने का है ताकि शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक मानकों को बेहतर बनाया जा सके। समिति ने कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया है, साथ ही शिक्षा में मूल्यों का समावेश करने पर जोर दिया है। इसमें नियामक व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया है।

समिति ने परिणाम दस्तावेजों, सिफारिशों तथा विभिन्न विचार विमर्श से प्राप्त सुझवों का अध्ययन किया और विभिन्न हितधारकों के साथ अनेक दौर की बातचीत की और क्षेत्रीय स्तर पर भी विचार-विमर्श किया। समिति ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों का दौरा भी किया। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति बनाने के लिए विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरु की थी। इस प्रक्रिया में 33 थीम पर ऑनलाइन, जमीनी और राष्ट्रीय स्तर पर थीम आधारित विचार-विमर्श किया गया।

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