समय रहते करें कद्दूवर्गीय फसलों में कीट-रोग प्रबंधन

समय रहते करें कद्दूवर्गीय फसलों में कीट-रोग प्रबंधनगाँव कनेक्शन

लखनऊ। फरवरी-मार्च में लगाई गई कद्दू वर्गीय फसलों में इस समय उत्पादन मिलने लगता है। तापमान बढ़ने के साथ ही फसलों में कीट भी अधिक लगने लगते हैं। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. राम प्रकाश श्रीवास्तव बता रहे हैं, कि कैसे इन कीटों से फसलों को बचाया जा सकता है।

कद्दू वर्गीय सब्जियों में कीट प्रबंधन

लाल भृंग: यह कीट कद्दू वर्गीय सभी सब्जियों को हानि पहुंचाता है।

इसकी वयस्क सूड़ी लाल रंग की लगभग पांच-आठ मिमी लंबी होती है। सूड़ी घास और झाड़ियों में छिपकर रहते हैं और तापमान बढ़ते ही झाड़ियों से निकलकर बाहर आती हैं। ये जड़ और तनों को बड़ी तेजी से खाने लगते हैं। 

रोकथाम : पेड़ के चारों ओर पांच प्रतिशत बीएचपी चूर्ण मिट्टी में मिलाएं। बीएचपी की मात्रा 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर के अनुसार होनी चाहिए। इसके अतिरक्ति सुबह या शाम के समय जब यह सूड़ी अधिक नुकसान पहुंचाती है, पांच प्रतिशत बीएचपी के पाउडर का छिड़काव करें।

मेलान मक्खी :  यह फलनाशक मक्खी तरबूज, खरबूज, कद्दू, खीरा जैसी सभी सभी कद्दू वर्गीय सब्जियों को नुकसान पहुंचाती है। वयस्क मक्खी गर्मी में ज्यादा सक्रिय होती है। मादा कोमल फल पर छेद करके उसमें चार-आठ अंडे प्रत्येक छेद में देती है। लगभग आठ-नौ दिनों में अंडों से बच्चे निकलकर फलों के गूदे के खाते हैं। फल पर जिस स्थान पर कीट खाते हैं। भूरे रंग का निशान बन जाता है और फल सड़ जाते हैं।

रोकथाम: पेड़ के चारों ओर मिट्टी की गुड़ाई करने से इनके प्यूपा धूप में मर जाते हैं। प्रभावित फलों को एकत्र कर जमीन में 600 मिमी गहराई पर दबा देना चाहिए। 

जहरीली बेट (50 ग्राम मेलाथियान, 200 ग्राम शीरा, दो लीटर पानी) के प्रयोग से नष्ट किया जा सकता है। 

माहूं : इसके वयस्क और बच्चे दोनों ही पौधों की पत्तियों और ऊपरी प्ररोह पर रस चूसते रहते हैं। यह कीड़ा एक तरल पदार्थ विसर्जित करता है, जिसपर बाद में फफूंदी उग आती है। खरबूजा और तरबूजे के अतिरक्ति ये बैंगन, कपास, भिण्डी, खीरा को भी नुकसान पहुंचाता है।

रोकथाम: इसको नष्ट करने के लिए 0.03 प्रतिशत मोनोक्रोटोफास या डेमीक्रान का छिड़काव करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखना चाहिए इस विषैली दवा का छिड़काव फल पर न हो। अन्य दवाएं जो नीम से बनती हैं, जैसे, मल्टीनीम, नीमरिन प्रयोग जड़ वाली सब्जियों में करें।

लौकी का बग कीट: इस कीट के बच्चे और वयस्क दोनों ही हानिकारक होते हैं, ये कोमल पत्तियों, कलियों, तनों और फलों का रस चूसते हैं। फल बढ़वार की अवस्था में इस कीट के प्रभाव से लौकी लकड़ी की तरह कड़ी हो जाती है।

रोकथाम: इसकी रोकथाम के लिए ओजोन बायोटेक, ओजानीम त्रिशूल 3000 पीपीएम या 10000 पीपीएम का प्रयोग करना चाहिए।

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