“सबको जानना चाहिए - पीरियड्स क्या होते हैं, लड़कियां पैड का इस्तेमाल क्यों करती हैं” 

“सबको  जानना चाहिए - पीरियड्स क्या होते हैं, लड़कियां पैड का इस्तेमाल क्यों करती हैं” पैडमैन

अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन का ट्रेलर 15 दिसंबर को लॉन्च हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इस फिल्म के ट्रेलर की खूब तारीफ कर रहे हैं लेकिन खास बात ये है कि इस फिल्म के कॉन्सेप्ट ने एक बार फिर लोगों को मौका दिया है कि वे 'पीरियड्स' के बारे में बात कर रहे हैं।

अक्षय कुमार, सोनम कपूर, राधिका आप्टे की मुख्य भूमिका वाली ये फिल्म ट्विंकल खन्ना की किताब 'द लीजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद' पर बनी है। ट्विंकल की इस किताब में तमिलनाडु के सामाजिक कार्यकर्ता अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िंदगी पर बनी है। तमिलनाडु के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कम लागत वाली सैनिटरी नैपकिन मशीन बनाकर ग्रामीण भारत में मासिक धर्म की स्वच्छता की अवधारणा में क्रांतिकारी बदलाव किया।

यह भी पढ़ें : पुरुषों के लिए भी समझना जरुरी है महिलाएं किस दर्द से गुजरती हैं...

फिल्म के ट्रेलर की सोशल मीडिया पर लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं लेकिन इसके साथ ही लोग उस मुद्दे पर भी चर्चा कर रहे हैं जिसके बारे में वे अक्सर बात करने से बचते हैं। वो मुद्दा है माहवारी।

पवरीत नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा - वाह ! इस बात को अक्षय कुमार पर छोड़ दीजिए। वो एक ऐसे मुद्दे पर फिल्म बना देंगे जिस पर ज़्यादातर लोग शर्म करते हैं और ये फिल्म आपका मनोरंजन भी करेगी व शिक्षित भी करेगी।

यह भी पढ़ें : विदेशों में माहवारी को लेकर रूह कंपा देने वाली प्रथाएं, आप सोचेंगे हम किस सदी में जी रहे हैं

सोनम चौरसिया लिखती हैं - ये भारत के लिए सम्मान की बात है, एक आदमी जो हमारे बीच माहवारी के विषय को लेकर आया। मुझे लगता है कि ये विषय आज की जनरेशन के बीच भी एक टैबू है। इसलिए हर किसी को ये जानना बहुत ज़रूरी है कि एक महिला कितना दर्द सहती है और महीने परेशान होती है। अक्षय कुमार आप वास्तव में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : यहां की महिलाएं माहवारी के दौरान करती थीं घास-भूसे का प्रयोग, इस युवा ने बदली तस्वीर

आलोक कुमार शाह ने ट्वीट किया - हां, हर व्यक्ति (खासकर गाँव में) को यह जानना चाहिए कि पीरियड्स क्या होते हैं और लड़कियां पैड का इस्तेमाल क्यों करती हैं ? क्लास 9 या 10 में एक चैप्टर भी होना चाहिए जिसमें पैड के बारे में पढ़ाया जाए। ये तरीका है जिससे युवाओं को इसके बारे में जानकारी मिलेगी और लड़कियां इसके बारे में खुलकर बात कर पाएंगी।

यह भी पढ़ें : जहां महीने के ‘उन दिनों’ में गायों के बाड़े में रहती हैं महिलाएं

अलिशा अग्रवाल लिखती हैं - अक्षय कुमार, आप इतने अच्छे और इतने परफेक्ट कैसे हो जाते हैं? और आप कैसे खुद को कमर्शियल फिल्मों से दूर रखकर इस तरह के अच्छे मुद्दों पर काम कर लेते हैं ? आपकी फिल्मों के ज़रिए बॉलीवुड की मानसिकता और फिल्मों के ट्रेंड में बदलाव लाने के लिए शुक्रिया।

पूजा कनुमुरु ने ट्वीट किया - माहवारी के बारे में खुलकर बात की जा रही है। कभी नहीं सोचा था कि मैं ये दिन देखूंगी। अरुणाचलम को उनकी लगन के लिए व ट्विंकल खन्ना को पैडमैन के ज़रिए इस कहानी को हम तक पहुंचाने और माहवारी की चर्चा को एक बड़ा मंच देने के लिए सलाम।

यह भी पढ़ें : केरल के इस स्कूल ने 105 साल पहले मंजूर की थी माहवारी की छुट्टी

अब नहीं लगेगा माहवारी से डर, अब उन दिनों में भी स्कूल जाएंगी लड़कियां

Share it
Top