अमेरिका की एक मां ने बेटी के लिए लिखा ऐसा ख़त, हर बेटी को होती है जिसकी चाहत

अमेरिका की एक मां ने बेटी के लिए लिखा ऐसा ख़त, हर बेटी को होती है जिसकी चाहतटोनी हैमर और उनकी बेटी

लखनऊ। हमारे देश में लड़कियों के साथ असमानता को लेकर बातें अक्सर सुनने में आती हैं। ऐसा देखने में आता है कि हमारे समाज में लड़कियों को अपनी मर्जी से कपड़े पहनने, घूमने फिरने, पढ़ने तक की आज़ादी नहीं है। हमें लगता है कि पश्चिमी देशों में महिलाएं हमसे बहुत ज़्यादा आज़ाद हैं लेकिन लड़कियों से जुड़ी कुछ ऐसी बातें होती हैं जो हर देश में उन्हें झेलनी ही पड़ती है और सबसे बड़ी बात ये है कि हर जगह महिलाओं और पुरुषों के लिए नियम अलग होते हैं।

ऐसी ही कुछ बातों को अमेरिका की ब्लॉगर टोनी हैमर ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है। टोनी ने अपनी बेटी के लिए एक पोस्ट लिखी है। अपनी बेटी के लिए लिखे इस खुले ख़त में उन्होंने उसे समझाया कि सामाजिक दबाव में आकर उसे क्या - क्या करने की ज़रूरत नहीं है।

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टोनी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लगभग 10 हज़ार लोग इस पोस्ट को लाइक कर चुके हैं और सात हज़ार से ज्य़ादा शेयर हो चुके हैं।

पढ़िए टोनी हैमर की फेसबुक पोस्ट :

मेरी बेटी के लिए,

जब कोई और तुमसे टकराए तो माफी मत मांगना। ये समझकर कि तुम किसी को दर्द दे रही हो माफी मत मांगना। तुम किसी के लिए दर्द नहीं हो। तुम इंसान हो, जिसके विचार हैं, जिसकी संवेदनाएं हैं और जो सम्मान की हक़दार है। जिस लड़के के साथ तुम बाहर नहीं जाना चाहतीं उसके साथ जाने के लिए तुम्हें वजह तलाशने की ज़रूरत नहीं है। तुम्हें किसी को सफाई देने की ज़रूरत नहीं है। एक सिम्पल सा 'नहीं धन्यवाद' भी स्वीकार किया जाना चाहिए।

तुम किसी के सामने क्या खाती हो इसके बारे में ज़्यादा मत सोचो। अगर तुम्हें भूख लगी है, खाओ और वो खाओ जो तुम खाना चाहती हो। अगर तुम्हें पिज़्जा खाना है तो सिर्फ इसलिए सलाद मत मंगवाओ क्योंकि तुम्हारे आस-पास के बाकी लोग सलाद खा रहे हैं। तुम पिज़्ज़ा ही खाओ।

किसी दूसरे को खुश करने के लिए अपने बाल लंबे मत करो। जिस ड्रेस को तुम नहीं पहनना चाहतीं उसे मत पहनो। सिर्फ इसलिए घर पर मत रुको क्योंकि तुम्हारे साथ बाहर जाने वाला कोई नहीं है। अपने साथ बाहर जाओ। खुद से, खुद के लिए अनुभव लो।

अपने आंसुओं को मत रोको। रोने का मतलब है, तुम कुछ ऐसा महसूस कर रही हो जिसे बाहर निकालना ज़रूरी है। यह कमज़ोरी नहीं है। यह इंसान होना है।

इसलिए मत हंसों क्योंकि तुमसे किसी ने हंसने के लिए बोला है। अपने ही जोक्स पर हंसने से मत डरो। सिर्फ सभ्य दिखने के लिए 'हां' मत बोलो। 'न' बोलो क्योंकि ये तुम्हारी ज़िंदगी है। अपने विचारों को मत छुपाओ। बोलो और तेज़ बोलो। तुम्हें सुना जाएगा। जो तुम हो, उसके लिए शर्मिंदा मत हो। बहादुर, साहसिक और सुंदर बनो। बिना किसी शर्मिंदगी के वो बनो, जो तुम हो।

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