महिलाओं को चाहिए पितृसत्ता से अाज़ादी, पुरुष भी दे रहे खुलकर साथ

महिलाओं को चाहिए पितृसत्ता से अाज़ादी, पुरुष भी दे रहे खुलकर साथप्रतीकात्मक तस्वीर

भारत को अंग्रेज़ों की हुकूमत से आज़ादी मिले 15 अगस्त को 70 साल हो जाएंगे लेकिन देश की ज़्यादातर महिलाओं को लगता है कि अभी भी पितृसत्ता से आज़ादी नहीं मिल पाई है। उन्हें लगता है कि वे अभी भी पुरुषवादी मानसिकता के शिकार समाज में रहने को मज़बूर हैं। महिलाओं को दिक्कत है इस बात से कि उनके खाने, पहनने, घर से निकलने हर चीज़ पर पुरुषों का पहरा है और यही बात है जो उन्हें नागवार गुज़र रही है। देश की इसी पुरुषवादी मानसिकता को चुनौती देने के लिए महिलाओं का हुजूम टीम मसूका (मानव सुरक्षा कानून) 14 अगस्त की रात 11.30 बजे दिल्ली के जंतर मंतर पर इकट्ठा हो रहा है।

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देश की कई महिलाएं इसके लिए सोशल मीडिया पर #AzadiFromPatriarchy के साथ महिलाओं से अपील कर रही हैं कि वे जंतर मंतर पर इकट्ठा हों। इस समय सोशल मीडिया पर ये हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। देश की तमाम महिलाएं #AzadiFromPatriarchy के साथ ट्वीट कर रही हैं। इन महिलाओं का कहना है कि महिलाओं भी समाज में बराबरी की नागरिक हैं। उन्हें इस बात का अधिकार है कि वे तय कर सकें कि उन्हें क्या पहनना है, किससे प्यार करना है और कब बाहर जाना है। कोई भी पुरुष या नेता उन पर उंगली नहीं उठा सकता।

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इस बारे में ट्वीट करते हुए दीपाली द्विवेदी लिखती हैं - समाज की एक ऐसी व्यवस्था जिसमें पुरुष शक्ति रखते हैं और महिलाओं को काफी हद तक बाहर रखा जाता है... इस तरह का भेदभाव क्यों?

गुंजन कपूर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सीता जी को शामिल करते हुए लिखा - जय सिया राम से जय श्री राम तक। सिया के लिए वास्तव में यह यात्रा कठिन और दर्दनाक रही। सिया मांगे - पितृसत्ता से आज़ादी।

दादू नाम की ट्विटर यूजर ने लिखा - महिलाएं भी समान नागरिक हैं और उनके भी समान अधिकार हैं। फिर वे हम पर शर्तों के हुकुम क्यों चलाते हैं। हमें पितृसत्ता से आज़ादी चाहिए।

विद्या सिंह ने फेसबुक पर लिखा - एक महिला पैंट भी पहने या स्कर्ट, शॉर्ट पहने या साड़ी ये उसकी पितृसत्ता से आज़ादी है और इस स्वतंत्रता दिवस पर भारत की महिलाएं इसे लेकर रहेंगी।

आयशा जैन ने ट्वीट किया - ये वक्त है जंतर मंतर पर 14 अगस्त की रात 11.30 बजे महिलाओं के लिए हो रहे है इस आंदोलन का समर्थन करने का।

हैप्पी गो लकी नाम की ट्विटर यूजर ने लिखा - ये महिलाओं और लड़कियों का भी देश है, अब हमें भी पहनने, खाने और पीने की आज़ादी चाहिए।

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता साध्वी खोसला ने एक ट्वीट किया - भारत अपनी आजादी के 70 वर्षों का जश्न मनाने के लिए तैयार हो रहा है लेकिन हम भारत की महिलाएं अभी भी पितृसत्ता से आज़ादी पाने का इंतज़ार कर रही हैं।

साधवी खोसला ने वीडियो मैसेज के साथ एक और ट्वीट करते हुए लिखा - मेरे वीडियो संदेश सभी महिलाओं को समर्पित हैं। हमें क्या पहनना है, क्या खाना है और कहां जाना है ये कोई दूसरा तय नहीं कर सकता।

कॉलमिस्ट तहशीन पूनावाला ने लिखा - हमें अपनी महिलाओं को यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि उन्हें क्या पहनना है, क्या खाना है और कहां जाना है।

दुष्यंत नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा - सुनिश्चित करें कि आप 14 अगस्त की रात 11.30 बजे जंतर मंतर पर पितृ सत्ता से आज़ादी की मुहिम में शामिल हो रहे हैं।

संयज बाफना ने लिखा - आज़ादी का कोई मतलब नहीं है जब तक हम अपनी महिलाओं को उनकी पसंद तय करने पर शर्म करते रहेंगे। इस स्वतंत्रता दिवस पर पितृसत्ता से आज़ादी की प्रतिज्ञा लीजिए।

अनुज प्रजापति ने ट्वीट किया - आज हमें अज़ादी के नए आंदोलन की ज़रूरत है। आज़ादी इस बात से कि महिलाएं बिना किसी शर्म के अपनी मर्जी से तय कर सकें कि उन्हें क्या खाना है, क्या पहनना है और कहां जाना है।

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