2017 में सोशल मीडिया : इन मुद्दों को दी आवाज़,  जगाया कुछ दिलों में प्यार

2017 में सोशल मीडिया : इन मुद्दों को दी आवाज़,  जगाया कुछ दिलों में प्यार2017 में सोशल मीडिया

साल 2017 जाने वाला है लेकिन इस साल ऐसी बहुत सी घटनाएं हुईं जिन्हें मुद्दा बनाने में या लोगों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया ने अहम रोल निभाया। इनमें से कुछ घटनाएं ऐसी भी हैं जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया, कुछ ऐसी हैं जो लोगों के लिए मिसाल बनीं। इस जाते साल में हम याद दिला रहे हैं कुछ ऐसी कहानियों की जो सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों के दिलों में उतर गईं, साथ ही कुछ ऐसे मुद्दों की जिन्हें सोशल मीडिया ने लोगों तक पहुंचने का मंच दिया...

15 अगस्त पर वायरल हुई वो तस्वीर

15 अगस्त 2017 को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई। ये तस्वीर थी असम के ढुबरी ज़िले की। उस वक्त असम मे बाढ़ हुई थी। ढुबरी ज़िले के नस्कारा लोअर प्राइमरी स्कूल में भी कमर तक पानी भरा हुआ था लेकिन स्कूल के दो छात्रों और चार अध्यापकों ने उस पानी में खड़ें होकर स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा भी लहराया और राष्ट्र गान भी गाया। खास बात ये थी कि इन 6 लोगों में से 4 लोग मुसलमान थे। तस्वीर में ताज़ेम सिकदर (मुख्य अध्यापक) , नृपेन रभा (सहायक अध्यापक) व तीसरी कक्षा के दो बच्चे जिआरुल ख़ान और हैदर अली ख़ान नज़र आ रहे हैं। इस तस्वीर को खींचा था सहायक अध्यापक जयदेव रॉय ने और फेसबुक पर अपलोड किया था दूसरे सहायक अध्यापक मिज़ानुर रहमान ने। मिज़ानुर रहमान की पोस्ट को अब तक 1 लाख 10 हज़ार 136 लोग शेयर कर चुके हैं। इसके अलावा ट्विटर और व्हॉट्सऐप पर भी इसे खूब शेयर किया गया।

#MeToo ने तोड़ी महिलाओं की चुप्पी

अक्टूबर महीने की शुरुआत में हॉलीवुड अभिनेता हार्वे वेनिंस्टन पर लगे यौन शोषण के आरोपों की चर्चा दुनिया भर में हुई थी। अमेरिकी अभिनेता हार्वे पर कई अभिनेत्रियों ने यौन हिंसा का आरोप लगाया था और लोगों से अपील की थी कि वे भी आगे आएं और अपने बारे में लिखें। उसके बाद 15 अक्टूबर से सोशल मीडिया पर एक आंदोलन शुरू हुआ था जिसमें महिलाओं से अपील की गई थी कि वे भी अपने साथ हुए यौन शोषण पर बोलें, सिर्फ दो सरल शब्दों में, और लिखें - #MeToo यानि मैं भी।

ट्विटर पर इस मुहिम की शुरुआत हॉलीवुड अभिनेत्री एलिसा मिलानो ने 16 अक्टूबर को की। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा- एक दोस्त के द्वारा प्रस्तावित किया हुआ : अगर सारी महिलाएं यौन शोषण या हिंसा का शिकार हुई हैं तो स्टेटस में लिखें - #MeToo, हो सकता है कि हम लोगों को इस समस्या की भयवहता का अंदाज़ा दिला सकें। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो मेरे ट्वीट के रिप्लाई में भी #MeToo लिखें। एलिसा मिलानो के इस ट्वीट का दुनिया भर के लोगों ने समर्थन किया। अब तक इस ट्वीट को 25 हज़ार से ज़्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है और लगभग 69 हज़ार लोग उनके इस ट्वीट पर रिप्लाई कर चुके हैं। पाकिस्तानी ब्लॉग सियासत के मुताबिक, #MeToo मुहिम 2017 की सबसे ज़्यादा असर करने वाली सामाजिक मुहिम मानी गई।

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“मेरे साथ समय बिताने के कितने पैसे लोगी”

कलकत्ता की पुलिस ने दिया था साथ

पूरी दुनिया में इस मुहिम के शुरू होने के बाद भारत की महिलाओं ने #MeToo के साथ अपने साथ हुए दुव्यर्वहार की घटनाओं के बारे में बताना शुरू किया। इसी कड़ी में कोलकाता पुलिस ने एक अनोखी पहल की शुरुआत की थी। इस बारे में बताते हुए कोलकाता पुलिस ने #MeToo के साथ एक पोस्ट अपने फेसबुक पेज पर लिखी थी। कोलकाता पुलिस के इस पोस्ट की खूब सराहना हो रही है। अभी तक 7300 से ज़्यादा लोग इस पोस्ट को लाइक कर चुके हैं और 2000 से ज़्यादा लोगों ने इसे शेयर किया।

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शहीद की बेटी को लिखा डीआईजी का ये ख़त

28 अगस्त को कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में एक आंतकी हमला हुए, जिसमें दक्षिणी कश्मीर पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर अब्दुल राशिद शहीद हो गए। नकी शहादत पर रोती उनकी बेटी ज़ोरहा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं। उसी वक्त कश्मीर पुलिस के डीआईजी ने ज़ोरहा को एक ख़त लिखा जिसे पढ़कर किसी की भी आंखों में आंसू आ जाएंगे। उनका ये ख़त सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और 1500 से ज़्यादा लोगों ने इसे शेयर किया।

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जब महिलाएं बोलीं - मैं सिंड्रेला नहीं हूं

अगस्त महीने की शुरुआत में चंडीगढ़ का एक मामला पूरे देश में चर्चित हुआ। चंडीगढ़ में बीजेपी के प्रमुख नेता सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पर आईपीएस की बेटी वर्णिका कुंडू का पीछा करने का आरोप लगा। इसके बाद वर्णिका ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर शेयर की जो खूब वायरल हुई। जब मीडिया में ये मुद्दा चर्चित हुआ हरियाणा में बीजेपी के नेता व प्रदेश उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी ने उल्टा वर्णिका को ही दोषी ठहराते हुए कहा कि लड़कियों को आधी रात तक घर से बाहर रहना ही नहीं चाहिए कि लड़के उनका पीछा करें। बस उनका यही बयान महिलाओं को नागवार गुज़रा और वे खुलकर विरोध में उतर आईं। इसी के बाद सोशल मीडिया पर #AintNoCinderella के साथ देशभर की लड़कियों ने ट्वीट करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर इस मुहिम से हज़ारों महिलाएं जुड़ गईं और उन्हें अपने हक़ के लिए बोलने का एक ज़रिया मिला।

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स्वच्छता की वो पहल

हम सबने एक कहावत सुनी है, 'स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है' लेकिन बहुत कम ही लोग हैं जो इस बात पर अमल करते हैं। हमारे दिल में भक्ति तो भरी रहती है लेकिन स्वच्छता के मामले में हम अभी भी काफी पीछे हैं। यहां अभी भी बहुत सी गलियां और सड़कें कूड़े के ढेर से भरी रहती हैं। बहुत कम ही ऐसे लोग हैं जो स्वच्छ भारत मिशन में भारत सरकार का साथ दे रहे हैं। हालांकि दिल्ली मेट्रो में हुई एक घटना इस बारे में आपके विचार पूरी तरह बदल देगी। जुलाई महीने में दिल्ली मेट्रो में प्रांजल दुबे की सफाई पहल को लोगों ने खूब सराहा और प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत मिशने के लिए एक प्रेरणा बताया।

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बीएचयू मामला

सितंबर महीने में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में छात्राओं के साथ छेड़खानी और हिंसा का मामला सामने आया। छात्राओं ने जब छेड़खानी की शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से की तो उन्हें कोई उचित सुरक्षा नहीं मिली, जिसके विरोध में छात्राओं ने विश्वविद्यालय के गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन को ख़त्म करने के लिए पुलिस ने छात्राओं पर लाठी चार्ज किया। हालांकि पुलिस और प्रशासन की पूरी कोशिश यही थी कि उस वक़्त बीएचयू का ये मुद्दा दब जाए लेकिन सोशल मीडिया में इस घटना की कुछ तस्वीरें वायरल होने लगीं। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं दूसरे राज्यों के लोग भी सोशल मीडिया पर इस बारे में खुलकर लिखने लगे। वैसे तो ये मुद्दा दब जाता लेकिन इसे लोगों के सामने लाने और इस मामले में नेताओं व प्रशासन का रवैया दिखाने में सोशल मीडिया ने अहम रोल निभाया।

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