सोलर रूफ टॉप के लिए पांच हजार करोड़ का बजट

सोलर रूफ टॉप के लिए पांच हजार करोड़ का बजटगाँव कनेक्शन

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ने आर्थिक मामलों पर चर्चा की। बैठक में नेशनल सोलर मिशन के तहत ग्रिड कनेक्टेड रूफ टॉप सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए 5000 करोड़ के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई है। 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने सौर छतों को बढ़ावा देने के लिए बजट 5000 करोड़ रुपए कर दिया है। राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत यह राशि वर्ष 2019-20 तक की 5 साल की अवधि के लिए है। यह अगले पांच सालों में 4200 मेगावाट की सौर छत प्रणालियों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग किया जाएगा। 

सामान्य श्रेणी के राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें 30 प्रतिशत की पूंजी छूट दी जाएगी और विशेष श्रेणी के राज्यों को 70 प्रतिशत की छूट, यानी उत्तर पूर्व के राज्यों जिसमें सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इसमें कोई छूट हासिल नहीं होगी क्योंकि वे पहले से ही कई छूटों के हकदार हैं जैसे कि त्वरित मूल्यह्रास, कस्टम ड्यूटी रियायतें, उत्पाद शुल्क में छूट और कर छुट्टी आदि।

4200 मेगावाट पावर की यह क्षमता आवासीय, सरकारी, सामाजिक और संस्थागत क्षेत्र (अस्पतालों, शैक्षिक संस्थानों आदि) के माध्यम से आएगी। औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को बिना सब्सिडी के सौर छतों को लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह बाजार का निर्माण औऱ उपभोक्ताओं के विश्वास का निर्माण करेगा और वर्ष 2022 तक 40000 मेगावाट पावर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाजार मोड के माध्यम से संतुलन क्षमता सक्षम हो जाएगा।

सरकार ने राष्ट्रीय सौर मिशन (एनएसएम) के लक्ष्य में वर्ष 2022 तक 20000 मेगावाट से बढ़ाकर 100000 मेगावाट पावर करने के लिए संशोधन किया है। इसमें से 40000 मेगावाट पावर ग्रिड से जुड़े सौर छत प्रणालियों के माध्यम से आना है। इस मंजूरी से सौर छतों को लगाने को बढ़ावा मिलेगा और 40000 मेगावाट पावर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।

आज सौर छतों के माध्यम से 6.50/ किलोवाट घंटा की दर से सौर उर्जा का उत्पादन किया जा सकता है। यह डीजल से चलने वाले बिजली जेनरेटर के मुकाबले काफी सस्ता है। यह उन तमाम बिजली वितरण कंपनियों की लागत से भी सस्ता है जिस लागत पर वे औद्यौगिक, वाणिज्यिक और अन्य घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाती हैं। इस नई पहल से भारत, छतों को सौर उर्जा के उत्पादन के रूप में प्रयोग करने वाला एक बड़ा देश बन जाएगा। यह 40 गीगावॉट प्रति वर्ष कार्बन डाई आक्साइड के उत्पादन में 60 लाख टन की कमी का परिणाम देगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में अपने योगदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने में मदद करेगा।

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