सरकार को गेहूं बेचने को तैयार नहीं किसान

सरकार को गेहूं बेचने को तैयार नहीं किसानगाँव कनेक्शन

इलाहाबाद। इस वर्ष सूखे के कारण गेहूं का उत्पादन बहुत कम हुआ है। छोटे किसानों के पास तो साल भर खाने के लिए भी गेहूं नहीं हुआ है और जिन किसानों के पास गेहूं है वो शासन द्वारा निर्धारित केन्द्रों पर अपना गेहूं बेचना नहीं चाहते हैं। यही वजह है की अब तक सरकारी गेहूं क्रय केन्द्रों पर अभी तक गेहूं की खरीदी नहीं हो पाई है। किसान अपना गेहूं निजी व्यापारियों को बेच रहे हैं, क्योंकी सरकार ने गेहूं का दाम भी कम रखा है और पतला गेहूं भी नहीं खरीदा जा रहा है। 

मंडल के चार जनपदों में गेहूं खरीदने का लक्ष्य दो लाख मीट्रिक टन है। पांच मई तक के सरकारी आकड़ों के अनुसार अभी केवल 6560 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई है। उत्पादन कम होने के कारण किसानों को सरकारी कीमत से ज़्यादा दाम बाज़ार में मिल रहा है। व्यापारी किसानों के घर आकर 1550 से 1650 रुपया प्रति कुंतल की दर से गेहूं खरीद रहे हैं। जबकि सरकारी दर 1525 रुपया प्रति कुंतल है। यही वजह है की इलाहबाद मंडल के तमाम सरकारी क्रय केन्द्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।

बारा ब्लॉक के मौहरिया गाँव के किसान राम दत्त त्रिपाठी (43) कहते हैं, “मैंने अपना 18 कुंतल गेहूं 1650 रुपया प्रति कुंतल की दर से मंडी में व्यापारी को बेचा है। सरकारी केन्द्रों में हर तरह के गेहूं की कीमत एक ही राखी गई है जिससे हमे हमारे गेहूं की सही कीमत नहीं मिल पाती है और व्यापारी हर तरह के गेहूं की सही कीमत देता है और पैसे भी तुरंत मिल जाते हैं।” तमाम छोटे किसान ऐसे भी हैं जिनके पास सिंचाई के अच्छे साधन न होने के कारण उनके गेहूं के दाने पतले हैं, जिनका सरकारी केन्द्रों पर कोई मूल्य नहीं है। जिसके कारण किसान इन केन्द्रों में नहीं जा रहे हैं। ऐसे ही मेजा ब्लॉक के कंचन पुर गाँव एक किसान धिगाम्बर कुमार (24) का कहना है, “मेरे 14 कुंतल गेहूं के दाने पतले हैं जिसके कारण सरकारी केंद्र वाले मेरा गेहूं नहीं खरीदते। इसलिए मैंने उन्हें गाँव में ही 1450 रुपए प्रति कुंतल की दर से बेच दिया। यहाँ पर व्यपारी घर तक आकर सारा गेहूं खरीद लेते हैं जिससे मंडी जाने का खर्च भी बच जाता है। इसलिए हम अपना गेहूं व्यापारियों को ही बेच देते हैं।

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