सरकार ने एमएसपी बढ़ोतरी के नाम पर क्रूर मजाक किया हैः स्वराज अभियान

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लखनऊ। सूखे पर देश भर में अभियान चलाने वाली एक गैर सरकार संस्था ने सूखा झेल रहे किसानों के एमएसपी में कम बढ़ोतरी कर ‘क्रूर मज़ाक’ करने का आरोप लगाया है। 

“मोदी सरकार ने एमएसपी में बढ़ोतरी के नाम पर क्रूर मजाक किया है। जो सरकार लागत पर 50 फिसदी आमद का वादा किसानों से करके सरकार में आयी थी, आज खरीफ की मुख्य फसल धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 4.3% की बढ़ोतरी कर रही है,” सामाज सेवक योगेंद्र यादव की अध्यक्षता वाले गैर सरकारी संगठन स्वराज ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा। विज्ञप्ति में कहा गया कि महंगाई को रोकने की कीमत किसान चुका रहा है। लगातार सूखा की वजह से पहले से ही परेशान किसान की आमदनी बुरी तरह प्रभावित होने वाली है।

संस्था के अनुसार एक तरफ़ खेती की लागत 10 से 15 फ़ीसदी बढ़ रही है, घर का ख़र्च पांच से 10 फ़ीसदी बढ़ रहा है। ऐसे में धान का मूल्य सिर्फ़ 4.0% बढ़ाने का मतलब है किसान की आमदनी में कटौती। स्वराज के अनुसार, “किसानों को अच्छे दिन का वादा करने वाली इस बीजेपी सरकार ने तो कांग्रेस के बुरे दिनों को भी मात दे दी है। कांग्रेस के अंतिम तीन साल में धान का मूल्य 21 फ़ीसदी बढ़ा था, जबकि इस सरकार ने पिछले तीन बार में सिर्फ 12 फीसदी ही मूल्य बढ़ाया है। दाल के मूल्य में हुई बढ़ोतरी भी कांग्रेस राज में हुई बढ़ोतरी से आधी है। यूं भी भारत के किसान को सिर्फ 50 रुपए मिल रहे हैं जबकि दाल विदेश से डेढ़ गुना दाम पर ख़रीदी जा रही है।”

स्वराज संस्था द्वारा कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के बैठक में लिया गया ये फैसला न सिर्फ किसानों के साथ क्रूर मजाक अपितु खुद को किसान हितैषी साबित करने के लिए करोड़ों के विज्ञापन करने वाली केंद्रीय सरकार की किसान विरोधी मनसा को भी जाहिर करता है। ऐसे विकराल सूखे के समय में जब देश का किसान अपने सबसे कठिन समय से गुज़र रहा है, आत्महत्याएं करने को मजबूर हो रहा है तो ये सरकरी कदम उसके घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। “देश के सभी किसान संगठन ऐसे क्रूर फैसले को का पुरजोर विरोध करते है और केंद्रीय सरकार से इस एमएसपी पर पुनर्विचार करने और इसे लागत मूल्य पर कम से कम 50% बढ़ाने की मांग करते है, जो भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में वादा किया था”, संस्था ने अपनी विज्ञप्ति में कहा।

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