सरकारी किताबें कबाड़ में बेचीं

सरकारी किताबें कबाड़ में बेचीं

जूनियर हाईस्कूल की 15 बोरी किताबें बरामद, कबाड़ी गिरफ्तार

रिपोर्टर - अर्जुन श्रीवास्तव

कांट (शाहजहांपुर)। शासन एक ओर हर माह बेसिक शिक्षा विभाग पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है तो दूसरी ओर इसी विभाग के कर्मचारी शासन की मंशा को नाकाम कर रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला ब्लॉक कांट के जूनियर हाईस्कूल में सामने आया। यहां पर बांटी जाने वाली किताबों को बोरियों में भरकर बेचे जाने की तैयारी चल रही थी। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और खंड शिक्षाधिकारी ने पुस्तकों को कबाड़ व्यापारी और किताब गाड़ी में ले जा रहे चालक को दबोच लिया।

सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकार हर साल करोड़ों रुपये का बजट खर्च करती है ताकि देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को अच्छी तालीम मिल सके लेकिन तहसील सदर क्षेत्र के अन्तर्गत दक्षिण दिशा में ब्लाक कांट के जूनियर हाईस्कूल मोहनपुर के शिक्षक अपना पेट भरने की कोशिश करते पकड़े गए। यहां पर बच्चों की पाठ्य पुस्तकें 15 बोरियों में बिकने जा रही थीं। खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से प्रधानाध्यापक समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने जूनियर हाईस्कूल मोहनपुर के प्रधानाचार्य श्रीराम को नि:शुल्क पुस्तकें बेचने के आरोप में निलम्बित कर दिया। उन्होंने मामले की जांच हेतु तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

एक बच्चे को मिलती हैं 120 रुपए की किताबें

सर्व शिक्षा अभियान की वेबसाइट एजुकेशन फॉर ऑल के अनुसार, एक बच्चे की किताब पर शासन 120 रुपए की धनराशि देता है। वहीं कस्तूरबा गांधी में पढऩे वाली छात्रा को दो सौ रुपए की किताबें दी जाती हैं। वर्ष 2014-15 में प्राइमरी के करीब दस लाख छात्रों के लिए एक अरब 15 करोड़ से अधिक धनराशि सरकार ने दी थी।

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