सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति होगी ऑनलाइन

सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति होगी ऑनलाइनगाँव कनेक्शन

जरवल(गोण्डा)। स्कूलों में बच्चों की कम संख्या होने पर अध्यापकों और बच्चे के परिवार को हर्जाना भरना पड़ेगा। परिषदीय स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 70 प्रतिशत होनी जरूरी कर दी गई है। समाजवादी पेंशन योजना के तहत सरकारी स्कूलों में हाईटेक हाजिरी के लिए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निर्देश जारी किये हैं।

गोण्डा जिले से लगभग 35 किमी दूर जरवल के प्राथमिक विद्यालय बड़सारा में सुबह साढ़े नौ बजे मात्र 38 बच्चे उपस्थित हैं जबकि विद्यालय में कुल बच्चों की संख्या 98 है। आस पास के कुल पांच स्कूलों में बच्चों की संख्या पंजीकृत बच्चों की आधी भी नहीं थी। स्कूल की अध्यापिका रंजना चौबे बताती हैं, ''स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम रहती है, खासकर कक्षा चार व पांच से लड़कियों की उपस्थिति तो बहुत ही कम हो जाती है। ऐसे में अब जो नियम आया है कि जिन बच्चों की उपस्थिति कम होगी उनके परिवार को समाजवादी पेंशन नहीं मिलेगी तो सुधार दिखेगा और बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ेगी।"

देशभर में शैक्षिक गणना करने वाली संस्था राष्ट्रीय शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली (डीआईएसई) की रिपोर्ट 2013-14 के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1,53,220 है और माध्यमिक स्कूलों की संख्या 31,624 है।  राज्य सरकार ने गरीबों के लिए समाजवादी पेंशन योजना शुरू की। इस योजना की पहली शर्त थी कि पेंशन का लाभ लेने वालों को अपने परिवार के बच्चों का अनिवार्य रूप से दाखिला कराना होगा। समाज कल्याण विभाग ने समाजवादी पेंशन के पात्रों का जिलेवार सर्वे कराया था। 33.35 लाख लाभार्थियों के परिवारों के सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है। इसमें 26.87 लाख का विवरण ऑनलाइन किया जा चुका है। लाभार्थियों के सत्यापन के दौरान करीब 18,000 ऐसे बच्चे पाए गए हैं जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। 

गोण्डा जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी फतेह बहादुर सिंह बताते हैं, ''छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन करने के लिए एक साफ्टवेयर तैयार किया गया है जिसमें सभी बच्चों की कक्षा व रोल नम्बर अपलोड किया गया है। आदेश है कि स्कूल खुलने के एक घंटे तक सभी प्रधानाध्यापक अपने मोबाइल से कक्षा और उपस्थित बच्चों की संख्या एसएमएस से भेजगें। अगर इसमें देरी होती है तो स्कूल को उस दिन बंद समझा जायेगा और कार्रवाई की जायेगी।" शासनादेश में ये भी कहा गया है कि जिन मण्डलों में अच्छा परिणाम रहेगा वहां के संबंधित अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। पुरस्कार के लिए वही विद्यालय योग्य होंगे, जहां के अध्यापकों की उपस्थिति भी 90 प्रतिशत हो। लगातार डिफाल्टर होने पर स्कूलों में प्रधानाध्यापक के वेतन से 100 रुपए और सहायक अध्यापक के वेतन से 50 रुपए की कटौती की जायेगी। 

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