करीब चार महीने तक ‘गंगा जगाओ अभियान यात्रा’ करेंगे लेखक निलय उपाध्याय 

करीब चार महीने तक ‘गंगा जगाओ अभियान यात्रा’ करेंगे लेखक निलय उपाध्याय सड़क मार्ग से लगभग 6000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान एक हजार समर्पित गंगा प्रेमियों को अभियान से जोड़ने कालिया संकल्प।

दिवेन्द्र सिंह (स्वयं डेस्क)

चौबेपुर (वाराणसी)। गंगा की अविरलता और संरक्षण के प्रति आम जनता में जागृति लाने और गंगा किनारे स्थित ऐतिहासिक तथा पौराणिक स्थानों का अध्ययन करने उद्देश्य से गंगा परिक्रमा यात्रा का शुभारम्भ कैथी स्थित गंगा गोमती संगम तट पर संकल्प लेकर किया गया।

सुविख्यात कवि एवं लेखक निलय उपाध्याय के नेतृत्व में "गंगा जगाओ अभियान यात्रा" नाम से निकली यह वाहन यात्रा कैथी से प्रारंभ होकर गंगा बाएं तट से होते हुए गंगा सागर तक जायेगी और वहां से वापस दाहिने तट गोमुख तक जाएगी और वापस परिक्रमा करते हुए अनुमानित 3-4 माह में कैथी में ही समाप्त होगी। सड़क मार्ग से लगभग 6000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान एक हजार समर्पित गंगा प्रेमियों को अभियान से जोड़ने का संकल्प लेकर यात्रा का आगाज किया गया है।

इस अवसर पर निलय उपाध्याय ने कहा, "गंगा पर अस्तित्व का संकट है, हिमालयी क्षेत्र में बनी बांध परियोजनाओं के कारण नदी मरने के कगार पर खड़ी है। गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों और नालों से लाया गया अपशिष्ट और रासायनिक कचरा ढोते-ढोते गंगा थक चुकी हैं। अब उनकी रक्षा का संकल्प लेना होगा और इस कार्य के लिए गंगा प्रेमियों को समर्पित होकर लगना होगा। उन्होंने कहा कि गंगा का अतीत हमारा अतीत था गंगा का वर्तमान हमारा वर्तमान है और गंगा का भविष्य हमारा भविष्य होगा। अपने भविष्य के लिए हमे जगना होगा। गंगा को असाध्य बीमारी से मुक्त कराना होगा।

'देवो का देव देव महादेव' धारावाहिक, दशरथ मांझी पर आधारित पुस्तक 'पहाड़' आदि रचनाओं के लेखक मुम्बई वासी निलय उपाध्याय ने वर्ष 2013 में साइकिल से 145 दिन में गंगोत्री से गंगा सागर तक यात्रा कर के गंगा की स्थिति का अध्ययन किया था। उनकी पुस्तक 'गंगोत्री से गंगासागर तक' में उस यात्रा का विस्तृत विवरण है। सरकार द्वारा उस पुस्तक को संज्ञान में लिया गया है। यात्रा में उनके साथ पत्रकार मोहन सिंह, अभय शर्मा भी शामिल हैं।

यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पड़ाव करते हुए गंगा के किनारे के प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण स्थलों का अध्ययन और गंगा नदी और उसके किनारे की संस्कृति और परम्परा पर भी जानकारियां एकत्र की जाएंगी।

यात्री दल का अभिनंदन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि हमारा जीवन और अस्तित्व गंगा से जुड़ा हुआ है, हमें गंगा में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न करने और न करने देने का दृढ़ संकल्प लेना होगा और उसे जीवन में सही अर्थों में उतारना भी होगा।"

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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