करोड़ों खपाए, मगर नहीं बदल सकी बस अड्डों की सूरत

करोड़ों खपाए, मगर नहीं बदल सकी बस अड्डों की सूरतप्रदेश के कई बस अड्डे मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले वर्ष बस अड्डों की स्थिति सुधारने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए 56 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था, मगर अभी भी प्रदेश के कई बस अड्डे मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। प्रदेश में बस अड्डों की तस्वीर यह है कि हर जिले में बसों की स्थिति खराब है और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं भी अधर में हैं।

शाहजहांपुर जिले से 50 किलोमीटर मीरानपुर कटरा के बस अड्डे में यात्रियों के लिए पीने के पानी के लिए दो इंडिया मार्का हैंडपंप ही लगाए गए थे, वो भी खराब पड़े हुए हैं। कटरा में रहने वाले वीरेंद्र कुमार (40 वर्ष) बताते हैं, “बस अड्डे पर कोई ध्यान नहीं देता है। शौचालय में भी हैंडपंप खराब पड़ा है। अगर बस नहीं आई हैं तो बैठने के लिए भी कोई जगह नहीं है।” वीरेंद्र रोज मीरानपुर कटरा से बरेली नौकरी करने के लिए जाते हैं।

वहीं, बाराबंकी जिले में बस अड्डे की व्यवस्था है, लेकिन उस बस अड्डे में भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। इसके अलावा जिले के बड़े कस्बों में बस अड्डे बने ही नहीं है और यात्रियों को सड़क के किनारे खड़े होकर ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। दूसरी ओर गोंडा जिले के बस स्टेशन में 70 बसें हैं, जिसमें 25 बसों की हालत खराब है। साथ ही कार्यशाला जर्जर हो चुकी है। बिजली के तार टूटने की हालत में हैं। ऐसी स्थिति गोंडा जिले के बस अड्डें की ही नहीं है, बल्कि ऐसी मूलभूत सुविधाओं से कई बस अड्डे कोसों दूर हैं।

पूरे प्रदेश के बस अड्डों की स्थिति का सर्वे कराया गया है। जितना बजट आता है, उतना बस अड्डों की मरम्मत में लगा दिया जाता है। इस बार 50 करोड़ का बजट है। इससे जिन बस अड्डों की स्थिति बहुत खराब है, उनको सही कराया जाएगा।
मोहम्मद इरफान, अधिशासी अभियंता, निर्माण इकाई, परिवहन विभाग, (लखनऊ)

श्रावस्ती से बहराइच जा रहे गिलौला निवासी लाल बहादुर (49 वर्ष) बताते हैं,'' हमारा गाँव बहराइच के चितौरा ब्लॉक में है और हम श्रावस्ती जिले में पिछले आठ वर्षों से सिंचाई विभाग में काम करते हैं। पहले इस स्टेशन के परिसर में निगम द्वारा बुकिंग, खिड़की, कैंटीन व कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया था, पर समय के साथ बस स्टेशन का कायाकल्प होने के बजाय यह और बदहाली के दौर में पहुंच गया है। स्टेशन पर हर तरफ कचरे के ढेर लगे रहते हैं। यहां साफ-सफाई का कोई नामो-निशान तक नहीं है।''

फिर कराया गया है सर्वे

अब परिवहन विभाग की ओर से प्रदेश के अन्य बस अड्डों की स्थिति का सर्वे कराया था, जिसमें प्रदेश में 162 ऐसे बस अड्डे हैं, जिनकी स्थिति काफी ज्यादा खराब है। इसमें लखनऊ स्थित चारबाग बस अड्डा भी शामिल है। अब वर्ष 2016-17 में 162 बस अड्डे की दशा सुधारने के लिए 50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें यात्रियों के बैठने के लिए सीटें, बस स्टेशन परिसर में पीने का स्वच्छ पानी और साफ-सुथरे शौचालय से लेकर खानपान की बेहतर सुविधा शामिल है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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